डिजिटल अरेस्ट कर कानून प्रवर्तन एजेंसियों का डर दिखाकर की गई थी 2.13 करोड़ रुपये की साइबर ठगी
साइबर थाना बल्लभगढ़ की टीम ने खाता उपलब्ध करवाने वाले को जयपुर से किया काबू

फरीदाबाद पुलिस की त्वरित कार्रवाई से 1.05 करोड़ रुपये शिकायतकर्ता के खाता में वापिस आये
ठगी की राशि को 3,800 से अधिक बैंक खातों में ट्रांसफर कर मनी ट्रेल को छिपाने का प्रयास
फरीदाबाद, 6 अगस्त। फरीदाबाद पुलिस के साइबर थाना बल्लभगढ़ ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.13 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में सफलता हासिल करते हुए ठगी में इस्तेमाल बैंक खाता उपलब्ध कराने वाले एक आरोपी को राजस्थान के जयपुर से गिरफ्तार किया है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते शिकायतकर्ता के 1.05 करोड़ रुपये समय रहते फ्रीज कराकर वापस उसके खाते में ट्रांसफर करा दिए गए। जांच में यह भी सामने आया है कि साइबर ठगों ने ठगी की रकम को तीन अलग-अलग लेयर में 3,800 से अधिक बैंक खातों में ट्रांसफर कर मनी ट्रेल को छिपाने का प्रयास किया था।
पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी की पहचान राकेश निवासी वार्ड देबरी, शिप्रा पथ, जयपुर (राजस्थान) के रूप में हुई है। जिसको माननीय अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। मामले में अब तक 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पूछताछ में सामने आया कि राकेश ने खाताधारक ऐश्वर्य वर्धन का बैंक खाता साइबर ठगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी खाते में ठगी की राशि का एक हिस्सा प्राप्त हुआ था। आरोपी ने खाते में आई 5.10 लाख रुपये की राशि चेक के माध्यम से ऐश्वर्य वर्धन खाताधारक की मदद से निकलवाकर आगे एक अन्य व्यक्ति को सौंप दी। पूछताछ में उसने बताया कि वह जयपुर में रंग-रोगन का कार्य करता है।
प्रवक्ता के अनुसार शिकायत मिलते ही साइबर थाना बल्लभगढ़ की टीम ने बिना समय गंवाए बैंक खातों का तकनीकी विश्लेषण शुरू किया और विभिन्न बैंकों से समन्वय स्थापित कर ठगी की 1 करोड़ 5 लाख रुपये की राशि संबंधित खातों में तत्काल फ्रीज करवा दी। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह पूरी राशि शिकायतकर्ता के बैंक खाते में वापस ट्रांसफर करवा दी गई। फरीदाबाद पुलिस की तत्परता और त्वरित कार्रवाई के कारण पीड़ित को भारी आर्थिक नुकसान से बचाया जा सका।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि ठगी की राशि सबसे पहले चार बैंक खातों में भेजी गई। इसके बाद पहली लेयर से रकम करीब 1,400 खातों में ट्रांसफर की गई और फिर तीसरी लेयर में इसे लगभग 2,400 अन्य बैंक खातों में भेजकर मनी ट्रेल को जटिल बनाने का प्रयास किया गया। इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य खाताधारकों, बैंक खातों के संचालकों और साइबर ठगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया कि 13 जनवरी 2026 को शिकायतकर्ता की पत्नी के मोबाइल फोन पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने स्वयं को टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड से जुड़े एक बैंक खाते का इस्तेमाल 20 लाख रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। इसके बाद कॉल को कथित रूप से मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के पास ट्रांसफर कर दिया गया।
ठगों ने पति-पत्नी को लगातार वीडियो कॉल पर रखकर उन्हें घर से बाहर जाने और किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क करने से मना किया। हर दो घंटे में वीडियो कॉल कर उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जाती रही, ताकि वे किसी से सलाह न ले सकें। इस दौरान खुद को विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाया गया।
15 जनवरी को ठगों ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के नाम से फर्जी “Freezing Funds Control Order” और “Arrest Order” भेजे। अगले दिन 16 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के नाम से एक और फर्जी पत्र भेजकर कथित सत्यापन प्रक्रिया का हवाला दिया गया और निर्देश दिए गए कि जांच पूरी होने तक उनके सभी बैंक खातों की राशि बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दी जाए। साथ ही 48 से 72 घंटे के भीतर पूरी राशि वापस लौटाने का झूठा भरोसा भी दिया गया।
गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के डर से पीड़ित ने जनवरी 2026 के दौरान अलग-अलग बैंक ट्रांजेक्शनों के माध्यम से कुल 2,13,16,000 रुपये साइबर ठगों द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिए।
राशि प्राप्त करने के बाद ठगों ने सुप्रीम कोर्ट के नाम से फर्जी एनओसी (NOC) और पीसीसी (PCC) भी भेजे, जिनमें दावा किया गया कि शिकायतकर्ता को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले से पूरी तरह बरी कर दिया गया है। जब पीड़ित ने अपनी जमा राशि वापस लेने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया तो सभी मोबाइल नंबर बंद मिले और किसी भी आरोपी से संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद पीड़ित ने साइबर थाना बल्लभगढ़ में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर मामला दर्ज कर गहन जांच शुरू की गई।
फरीदाबाद पुलिस की लोगों से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी, पुलिस, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, आरबीआई या सुप्रीम कोर्ट किसी व्यक्ति को वीडियो कॉल पर रखकर पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश नहीं देता। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को सरकारी अधिकारी बताकर गिरफ्तारी, मनी लॉन्ड्रिंग या डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर धनराशि मांगता है तो उसकी बातों में बिल्कुल न आएं। कानून में कहीं भी डिजिटल अरेस्ट का प्रावधान नहीं है। ऐसी किसी भी घटना की तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 और नजदीकी साइबर थाना से संपर्क करें।



