जे.सी. बोस विश्वविद्यालय में विज्ञान के विद्यार्थियों ने ‘सत्रारंभ-2026’ के साथ शुरू की शैक्षणिक यात्रा
तीन दिवसीय इंडक्शन प्रोग्राम-2026 का शुभारंभ, वैज्ञानिक सोच एवं प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया

फरीदाबाद, 5 अक्टूबर। जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के विज्ञान संकाय द्वारा नवप्रवेशित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण, मूल्यों, अवसरों, अनुसंधान संस्कृति एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों से परिचित कराने के उद्देश्य से तीन दिवसीय इंडक्शन प्रोग्राम-2026 ‘सत्रारंभ-2026’ का शुभारंभ किया गया।
उद्घाटन सत्र में केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा, महेंद्रगढ़ के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. पवन कुमार शर्मा मुख्य अतिथि तथा आईआईटी दिल्ली के भौतिकी विभाग के प्रो. राजेंद्र सिंह ढाका विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात राष्ट्रीय गीत एवं विश्वविद्यालय कुलगीत प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक यात्रा, उपलब्धियों, आधारभूत संरचना, शैक्षणिक कार्यक्रमों एवं अनुसंधान गतिविधियों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई।

अतिथियों एवं विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रो. अनुराधा शर्मा ने मानव सभ्यता एवं तकनीकी विकास में विज्ञान की मौलिक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक जिज्ञासा, तार्किक चिंतन, रचनात्मकता तथा अनुसंधानपरक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
मुख्यातिथि एवं केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा, महेंद्रगढ़ के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. पवन कुमार शर्मा ने “द अल्केमी ऑफ द फ्यूचर” विषय पर प्रेरणादायक व्याख्यान दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को ‘अमृत काल’ के निर्माता बनने के लिए प्रेरित करते हुए अंतर्विषयक शिक्षा, वैज्ञानिक सोच तथा प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मानव बुद्धिमत्ता का विकल्प नहीं, बल्कि उसे सशक्त बनाने वाला उपकरण बताते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से आलोचनात्मक चिंतन विकसित करने तथा डिजिटल विचलनों और भ्रामक प्रभावों से सावधान रहने का आह्वान किया। उन्होंने अनुशासन, सकारात्मक संगति, आत्मचिंतन तथा अध्ययन के प्रति समर्पित दृष्टिकोण के महत्व को भी उल्लेख किया।
आईआईटी दिल्ली के भौतिकी विभाग के प्रो. राजेंद्र सिंह ढाका ने विवेक अर्थात सही और गलत में अंतर करने की क्षमता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अत्यधिक डिजिटल प्रभाव से मुक्त रहने के लिए “डिजिटल व्रत” की अवधारणा अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने सुपरकंडक्टिविटी का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को अनुशासन एवं दृढ़ संकल्प के माध्यम से अपने व्यक्तिगत एवं शैक्षणिक जीवन की ‘रुकावटों’ को दूर करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विज्ञान के विद्यार्थियों से तकनीकी नवाचार में सक्रिय योगदान देने, विशेषकर सोडियम-आयन बैटरी जैसे उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने समय प्रबंधन, असफलता अथवा अस्वीकृति से सीखने, पारिवारिक मूल्यों से जुड़े रहने तथा राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता के महत्व पर बल दिया।
इससे पहले, डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रो. प्रदीप डिमरी ने विद्यार्थियों को शैक्षणिक, करियर एवं व्यक्तिगत चुनौतियों का धैर्य और दृढ़ता के साथ सामना करने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के विभिन्न क्लबों में सक्रिय भागीदारी करने तथा ज्ञान, चरित्र और सामाजिक योगदान के माध्यम से वाईएमसीए की विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। भारत-2047 का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारतीय संस्कृति एवं मूल्यों पर आधारित सॉफ्ट पावर के साथ-साथ विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, अर्थव्यवस्था एवं रणनीतिक क्षमताओं के माध्यम से हार्ड पावर को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध संदेश “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर उत्कृष्टता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
उद्घाटन सत्र के अंत में पर्यावरण विज्ञान विभाग की अध्यक्ष एवं इंडक्शन प्रोग्राम-2026 की संयोजक डॉ. रेणुका गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन में कुलगुरु प्रो. संजय कौशिक एवं कुलसचिव प्रो. अजय रँगा के मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, प्रो. अनुराधा शर्मा, विभिन्न विभागों के अध्यक्षों, शिक्षकों, आयोजन समिति तथा विद्यार्थियों के सहयोग के लिए भी धन्यवाद दिया और ‘सत्रारंभ-2026’ के सफल शुभारंभ में उनके योगदान की सराहना की।



