किफायती स्वच्छ ऊर्जा, उपभोक्ता सुरक्षा और सतत विकास के लिए मानक अत्यंत आवश्यक- खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेश नागर

किफायती बनाने की होड़ में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए, मानक उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाते हैं- राजेश नागर

  • उपभोक्ता संरक्षण में बीआईएस प्रमाणन, मानक चिह्न और विधिक माप विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका- नागर
  • स्वच्छ ऊर्जा की उभरती तकनीकों के लिए भारतीय मानक अपनाकर हरियाणा के एमएसएमई अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ा सकते हैं- राजेश नागर

चंडीगढ़, 14 अक्टूबर- हरियाणा के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेश नागर ने कहा कि उत्पादों की सुरक्षा, उपभोक्ता संरक्षण, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता और सतत विकास सुनिश्चित करने में मानकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। श्री नागर ने कहा कि मानकों को गुणवत्ता, सुरक्षा, स्थिरता और समावेशी विकास का प्रभावी माध्यम बनाया जाना चाहिए। इससे ’’सतत विकास लक्ष्य-7-किफायती एवं स्वच्छ ऊर्जा’’ सहित व्यापक सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में भी सहायता मिलेगी। उन्होंने गुणवत्ता को साझा जिम्मेदारी और मानकों को अधिक टिकाऊ हरियाणा तथा बेहतर भारत के निर्माण का साझा मार्ग बनाने का आह्वान किया।

वे भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस), उत्तरी क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ द्वारा आयोजित ’’विश्व मानक दिवस 2026’’ समारोह में उपस्थितनों को संबोधित कर रहे थे।

इस वर्ष विश्व मानक दिवस की थीम ’’“बेहतर विश्व के लिए साझा दृष्टिकोण- सतत विकास लक्ष्य-7-किफायती एवं स्वच्छ ऊर्जा पर विशेष ध्यान”’’ है। श्री नागर ने कहा कि यह थीम आर्थिक विकास और जीवन स्तर में सुधार के लिए सुलभ, विश्वसनीय और टिकाऊ ऊर्जा के महत्व को बताती है। किफायती एवं स्वच्छ ऊर्जा केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि, खाद्य सुरक्षा, औद्योगिक विकास और सार्वजनिक सेवाओं के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मानक भले ही तकनीकी दस्तावेज प्रतीत होते हों, लेकिन उनका प्रभाव प्रत्येक नागरिक के दैनिक जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। हमारे द्वारा उपयोग किए जाने वाले खाद्य पदार्थों और आवश्यक वस्तुओं की गुणवत्ता से लेकर विद्युत उपकरणों की सुरक्षा तथा तौलने और मापने वाले उपकरणों की सटीकता तक, मानक हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ऊर्जा भंडारण और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों में हो रहे विकास से नागरिकों और उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं। हालांकि, यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि इन तकनीकों से जुड़े उत्पाद सुरक्षित, विश्वसनीय, ऊर्जा-कुशल और अपने निर्धारित उपयोग के अनुकूल हों। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में सुरक्षित और टिकाऊ बदलाव के लिए मानक एक मजबूत तकनीकी आधार प्रदान करते हैं।

हरियाणा के संबंध में मानकों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए श्री नागर ने कहा कि राज्य की मजबूत कृषि व्यवस्था, विस्तारित औद्योगिक क्षेत्र, बढ़ता सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) तंत्र तथा विकसित होते शहरी केंद्र विश्वसनीय ऊर्जा और गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे पर निर्भर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वस्तुओं को किफायती बनाने के प्रयासों में उनकी गुणवत्ता, सुरक्षा और कार्यक्षमता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।

भारतीय मानक ब्यूरो की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि बीआईएस सौर ऊर्जा प्रणालियों, पवन ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, विद्युत पारेषण और ऊर्जा प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय मानकों के विकास एवं प्रोत्साहन के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। ये मानक स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों को अपनाने में सहायता करने के साथ-साथ उपभोक्ताओं और उद्योगों का विश्वास भी बढ़ाते हैं।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए श्री नागर ने कहा कि मानकों का सीधा संबंध उपभोक्ता कल्याण से है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से वितरित की जाने वाली वस्तुओं की गुणवत्ता, खाद्य उत्पादों एवं उनकी पैकेजिंग, भंडारण और गोदामों की व्यवस्था तथा व्यापार में इस्तेमाल होने वाले माप-तौल उपकरणों की सटीकता का जनस्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ताओं के हितों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। खाद्यान्न भंडारण से संबंधित मानकों का उल्लेख करते हुए उन्होंने ’’आईएस 16144ः2014’’, जो खाद्यान्न भंडारण गोदामों के लिए कार्य-पद्धति निर्धारित करता है, तथा ’’आईएस 609ः2020’’, जो मौजूदा खाद्यान्न भंडारण संरचनाओं में सुधार के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है, के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि निर्धारित मानकों का पालन खाद्यान्न की गुणवत्ता, भंडारण व्यवस्था और उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत बनाने में सहायक है।

श्री नागर ने कहा कि मानकीकरण, प्रमाणन और विधिक माप विज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं तथा बाजार में निष्पक्षता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रत्येक उपभोक्ता को यह विश्वास होना चाहिए कि वह जो उत्पाद खरीद रहा है, उसकी गुणवत्ता, मात्रा, सुरक्षा और कार्यक्षमता निर्धारित मानकों के अनुरूप है। उन्होंने उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ाने में बीआईएस प्रमाणन प्रणाली और मानक चिह्न के महत्व पर जोर दिया और उपभोक्ताओं में जागरूकता होना भी उतना ही आवश्यक है। नागरिकों को यह जानकारी होनी चाहिए कि मानक चिह्न का क्या अर्थ है, उसकी प्रामाणिकता की जांच कैसे की जा सकती है और घटिया गुणवत्ता वाले उत्पादों अथवा प्रमाणन चिह्न के दुरुपयोग के विरुद्ध शिकायत कहां दर्ज कराई जा सकती है।

श्री नागर ने बीआईएस के हरियाणा शाखा कार्यालय द्वारा उपभोक्ता जागरूकता और जनसंपर्क के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उपभोक्ता संगठनों के साथ संवाद और विभिन्न जिलों में आयोजित किए जा रहे ’’शाइन कार्यक्रमों’’ के माध्यम से मानकों, गुणवत्ता आश्वासन और उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा रही है। ऐसे प्रयास नागरिकों को सोच-समझकर खरीदारी करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। बीआईएस और हरियाणा सरकार के बीच समन्वय का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय समन्वय व्यवस्था के माध्यम से गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं के क्रियान्वयन में बीआईएस और राज्य सरकार के विभागों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलता है। इसमें गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (क्यूसीओ) का क्रियान्वयन और मानक चिह्न के दुरुपयोग के विरुद्ध कार्रवाई भी शामिल है। उन्होंने उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने में राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोगों, उपभोक्ता हेल्पलाइन और जागरूकता कार्यक्रमों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।

एमएसएमई क्षेत्र के साथ बीआईएस के प्रयासों की सराहना करते हुए श्री नागर ने कहा कि विभिन्न जिलों में आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों से उद्यमियों को भारतीय मानकों, प्रमाणन संबंधी आवश्यकताओं और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं की जानकारी मिलती है। उन्होंने कहा कि मानकों को केवल नियामकीय बाध्यता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इन्हें उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने और उपभोक्ताओं का विश्वास अर्जित करने के अवसर के रूप में अपनाना चाहिए। श्री नागर ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्वच्छ ऊर्जा की अन्य उभरती तकनीकों में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए हरियाणा के एमएसएमई को उपयुक्त भारतीय मानकों को अपनाना चाहिए। इससे वे गुणवत्ता को मजबूत करने के साथ-साथ बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी बेहतर बना सकते हैं।

उन्होंने विश्व मानक दिवस 2026 के आयोजन के लिए भारतीय मानक ब्यूरो को बधाई दी और गुणवत्ता व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग, मानक संस्थानों और उपभोक्ता संगठनों को मिलकर ऐसी संस्कृति विकसित करनी चाहिए, जिसमें गुणवत्ता को प्राथमिकता मिले, मानकों के प्रति जागरूकता बढ़े, नियमों का पालन सुनिश्चित हो और उपभोक्ता सशक्त बनें।

कार्यक्रम में पहुंचने पर बीआईएस के अधिकारियों द्वारा खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेश नागर को पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। इसी प्रकार, मंत्री को शॉल ओढाकर उन्हें सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम में चंडीगढ़ के महापौर सौरभ जोशी, बीआईएस के उत्तरी क्षेत्रीय कार्यालय के उप महानिदेशक दीपक कुमार सिंगला सहित वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, उपभोक्ता संगठनों के सदस्य, शिक्षाविद् और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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