महाराष्ट्र के भंडारा के जिला अस्पताल में लगी आग ने 10 माताओं की कोख सूनी कर दी, अग्निकांड में 10 बच्चों की मौत

मुंबई/नई दिल्ली : महाराष्ट्र के भंडारा जिला अस्पताल में शुक्रवार देर रात विशेष नवजात देखरेख इकाई में आग लगने से 10 नवजात बच्चों की मौत हो गई, डॉक्टरों ने यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र अस्पताल अग्निकांड पर दु:ख व्यक्त किया। एक डॉक्टर ने बताया कि नवजात बच्चों की उम्र एक महीने से तीन महीने के बीच थी। जिला सिविल सर्जन प्रमोद खंडाते ने बताया कि भंडारा जिला अस्पताल में शुक्रवार देर रात एक बजकर 30 मिनट के आसपास आग लग गई। इकाई में 17 बच्चे थे, जिनमें से सात को बचा लिया गया।

महाराष्ट्र के भंडारा के जिला अस्पताल में शुक्रवार रात लगी आग ने 10 माताओं की कोख सूनी कर दी। पूरी घटना की जानकारी देते हुए अस्पताल के एक स्टाफ ने कहा कि उन्हें पौने दो बजे रात को कॉल आया कि ऊपर बच्चों के वार्ड में आग लग गई है। इस रूम में 11 बच्चे थे। इस शख्स ने कहा कि कमरे में काला धुआं भर गया था, अंदर मुझे कुछ नहीं दिख रहा था। मैंने गार्ड को बुलाया लेकिन हम कुछ नहीं कर सके। उस वक्त हम लोगों ने छठे और सातवें फ्लोर को तुरंत खाली करवा दिया।

सीढ़ी लगाकर ऊपर चढ़े, दरवाजे तोड़े : एक शख्स ने कहा कि हम फायर ब्रिगेड की गाड़ी से बालकनी में चढ़े और दरवाजा तोड़ दिया और खिड़कियां तोड़ीं, इसके बाद हम अंदर गए। इसके बाद जो बच्चे अंदर थे उसे हम लोगों ने सबसे पहले बाहर निकाला। आधे बच्चे जल गए थे, जो बच्चे नहीं भी जले थे, उनके अंदर भी जान नहीं बची थी।

ड्यूटी पर तैनात नर्स को पहले एहसास हुआ कि बच्चों के वार्ड से धुआं आ रहा है। भंडारा के सिविल सर्जन डॉ प्रमोद खंडाके ने बताया कि जानकारी मिलते ही सभी लोग वार्ड की और दौड़े, तब उन्होंने अंदर धुआं देखा। रिपोर्ट के मुताबिक कमरे में पूरा धुआं भरा हुआ था और नर्सों को भी सांस लेने में दिक्कत हो रही थी।

हादसे के दौरान वार्ड में नहीं था कोई : हादसे के दौरान वार्ड में कोई नहीं था, इसलिए बच्चों की जलकर मौत हुई। अस्पताल के सिविल सर्जन ने बताया कि इस अस्पताल की क्षमता 485 बेड की है। अब सवाल है कि अस्पताल के सीनियर मेंबर कहां थे, क्या डॉक्टर रात में राउंड ले रहे थे या नहीं? चाइल्ड वार्ड में हर घंटे डॉक्टर और नर्सें आती रहती हैं, फिर ऐसा क्यों नहीं हुआ, इसका जवाब अस्पताल के डॉक्टर और मैनेजमेंट को देना पड़ेगा।

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