जूनियर रेडक्रॉस और ब्रिगेड द्वारा प्राकृतिक आपदा निवारण दिवस पर कार्यक्रम आयोजित

फरीदाबाद ! राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एन एच तीन फरीदाबाद की सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड, गाइडस और जूनियर रेडक्रॉस द्वारा प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा की अध्यक्षता में प्राकृतिक आपदा निवारण दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। ब्रिगेड एवम् जूनियर रेडक्रॉस प्रभारी प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने बताया कि आपदा एक अचानक होने वाली विध्वंसकारी घटना होती है जिस से एक साथ भारी जान-माल यानि मानवीय, भौतिक, पर्यावरणीय एवं सामाजिक क्षति होती है। प्रीपेयरडनेस एंड रिस्पांस टीम में पेशेवर स्वयंसेवक सम्मिलित होते हैं जो आपातकाल की तैयारी की योजनाओं के साथ सक्रिय रहते है। ये पेशेवर नेटवर्किंग, संसाधन वितरण और आपदाओं में प्रमुख अवसर प्रदान करता है। इस संगठन ने प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ एक कौशल रक्षा प्रणाली का निर्माण करने का कार्य भी किया है। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि इस ऐतिहासिक दिन का पालन करना और आपदा से पूर्व और आपदा के पश्चात की तैयारी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्राकृतिक आपदा, उनकी विभिन्न श्रेणियों, उनके परिणामों और प्राकृतिक आपदाओं को रोकने के तरीकों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक मंच है। इस दिन प्राकृतिक आपदाओं के बारे में ज्ञान फैलाने के लिए स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाती है।
मनचंदा ने कहा कि सभी राज्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि सभी प्रकार की घटनाओं के लिए सभी को तैयार किया जा सके। यह दिन विश्व में सभी लोगों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देता है। इससे पहले कि वे किसी भी प्रकार की आपदा का शिकार बने यह उस आपदा को भी दूर करने पर जोर देता है। इससे सभी लोगों को ऐसी प्राकृतिक आपदाओं की घटना के साथ मानव जाति के खतरों के बारे में शिक्षा मिलती है। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि यदि हम सफलतापूर्वक एक आदर्श वैज्ञानिक प्रबंधन की योजना तैयार करते हैं तो संभव है कि आपदा के प्रभाव को कम कर सकेंगे जिसका मानव जाति सामना कर रही है और भूकंप, दुर्घटना, बाढ़, सुनामी, आग आदि जैसी घटनाओं के लिए उच्च प्रशिक्षित टीमों की आवश्यकता होती है और इसलिए आपदा प्रबंधन के लिए टीमों का प्रशिक्षण किया जाता रहा है। प्राकृतिक आपदाएं और बड़ी क्षति के लिए हम सभी भारतवासियों ने आपदाओं से सीख ली है। इसलिए प्राकृतिक आपदाओं से लड़ने के लिए तीन मॉडलों का इस्तेमाल करना होगा और यह नई पहल शुरू करने के लिए यह सबसे अच्छा मंच है। ये तीन मॉडल दत्तक ग्रहण मोड, प्रदर्शन मोड और अंत में प्रसार मोड हैं। प्रभावी नियोजन हमेशा किसी भी चीज का सबसे अच्छा प्रतिसाद है जो हमारे नियंत्रण में नहीं है और हमें प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं के मामले में ऐसा ही करना चाहिए। आज बालिकाओं हर्षिका, तबिंदा, निशा, सोनी तथा अंजलि ने आपदा प्रबंधन के लिए प्री प्रिपेयर्ड और पोस्ट प्रेपर्यड रहने के लिए जागरूक किया जिस की प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा, प्राध्यापिका जसनीत कौर, रसायन प्रवक्ता पूनम, विनोद बैंसला, दान सिंह तथा सुनील नागर ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की।



