जोरदार नारेबाजी कर लघु सचिवालय पहुँचे कर्मचारियों ने एसडीएम के मार्फ़त देश के प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा

फरीदाबाद ! समस्त प्रदेश में जारी विरोध प्रदर्शनों में ट्रेड यूनियन के आव्हान पर हरियाणा कर्मचारी महासंघ से संबंधित हरियाणा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड वर्कर्स यूनियन ने कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ लघु सचिवालय सेक्टर-12 पर एकत्र होकर प्रदर्शन करते हुए फरीदाबाद के जिला उपायुक्त मार्फ़त से एसडीएम रन विजय को देश के प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा । विरोध प्रदर्शन करते हुए विभिन्न विभागों के कर्मचारी एचएसईबी वर्कर यूनियन के प्रदेश महासचिव सुनील खटाना के नेतृत्व में कोरोना महामारी काल मे सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रख उचित दूरी बनाकर सरकार के खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी की जिसमे उन्होंने केन्द्र सरकार व प्रदेश की गठबंधन सरकार के खिलाफ अपना रोष जाहिर किया ।

कर्मचारियों के इस प्रदर्शन को संबोधित करते हुए महासचिव सुनील खटाना ने बताया कि केन्द्र व राज्य की गठबंधन सरकार कर्मचारी और मजदूर विरोधी नीति अपनाकर कार्य कर रही है । जबकि प्रदेश का कर्मचारी पिछले छह महीने से कोरोना महामारी में पूरी निष्ठा से शिद्दत के साथ जनहित के कामों में जुटा हुआ है । अपनी जान की भी परवाह ना करते हुए स्वास्थ्य, बिजली, जनस्वास्थ्य और परिवहन विभाग जैसी अत्यंत जरूरी सेवाओं को संभाल रहे है । इसके बावजूद प्रदेश सरकार आमजन मानुष से सीधे सरोकार रखने वाले इन महत्त्वपूर्ण विभागों को निजीकरण करने पर तुली है । प्रदेश में रोजगार का अभाव पहले से ही है । ऊपर से विभागों में लगे कर्मियों की आयेदिन छटनी की जा रही है । हाल ही में 1983 पीटीआई शारीरिक शिक्षकों को नौकरी से निकाल दिया गया और जो पिछले कई दिनों से अनशन पर बैठे हैं । इनका समर्थन करते हुए यूनियन माँग करती है कि इन्हें बिना विलम्ब किये जल्द नौकरी पर लिया जाए । सरकार ने कर्मचारियों व पेंशनरों की मूलभूत सुविधाएँ डीए, एलटीसी व अन्य भत्तों को जो बन्द किया है । यूनियन इसकी कड़े शब्दों में निन्दा करती है । जिसके लिये यूनियन अपने माँग पत्र के जरिये माँग करती है कि इन्हें सरकार अमल में लाये ।

मुख्य माँगों में मजदूरों के हितों में बने कानूनों को कमजोर करने व निरस्त करने के निर्णय वापिस हों,  कर्मियों व मजदूरों के कार्यदिवस 8 घन्टे ही हों ना कि आगे बढ़ाए जाएं, विभागों में लगे कच्चे कर्मचारियों को ठेकेदारी मार्फ़त से हटाकर सरकार के विभागीय पे-रोल पर रखे जाए, एनपीएस (न्यू पेन्शन स्कीम) को तुरन्त बन्द कर 2004 से पहले वाली पुरानी पेंशन प्रणाली यथावत शीघ्र बहाल हों, उपभोक्ता विरोधी व कर्मचारी विरोधी बिजली निजीकरण से संबंधी इलेक्ट्रिसिटी संशोधन बिल 2020 वापिस हो, रोडवेज में ठेकेदारी प्रणाली खत्म कर किलोमीटर स्कीम रद्द हो व खाली पड़े पदों को सृजित कर तुरन्त भरा जाए, फैक्ट्री मजदूरों को लॉकडाउन अवधि का पूरा मानदेय मिलना चाहिये और जो प्रवासी मजदूर इस दौरान दुर्घटना में मारे गए हैं । उन्हें अविलम्ब प्रयाप्त मुआवजा दिया जाए, जरूरी सेवाओं में लगे स्थाई व अस्थाई कर्मचारी व स्कीम वर्कर्स को सुरक्षा उपकरण, एक समान बीमा लाभ व अतरिक्त जोखिम भत्ता दिया जाए, कर्मचारी भविष्य निधि के अंशदान को पुनः बहाल करते हुए 24 प्रतिशत रकम डाल व जीपीएफ पर घटाई ब्याज दर वापिस हों, विभागों का निजीकरण बन्द करके युवाओं को स्थाई दिया जाए आदि अनेक सूत्रीय माँगों को लेकर के कर्मचारियों ने माँगपत्र को देश के प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ।

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