विश्व मधुमेह दिवस : उचित जीवन शैली और योग से डायबिटीज को हराएँ

फरीदाबाद ! राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एन एच तीन फरीदाबाद में प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड और जूनियर रेडक्रॉस व गाइडस के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाया गया। प्राचार्य, ब्रिगेड और जूनियर रेडक्रॉस प्रभारी रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने बताया कि प्रत्येक वर्ष विश्वभर में 14 नवम्बर को अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह दिवस अथवा विश्व डायबिटीज दिवस मनाया जाता है। यह दिवस 14 नवंबर को सर फ्रेडरिक बैंटिंग के जन्मदिवस पर मनाया जाता है जिन्होंने कनाडा के टोरन्टो शहर में बेन्ट के साथ मिलकर सन 1921 में इन्सुलिन की खोज की थी ! उन्होंने कहा कि डायबिटीज एक बहुत ही खतरनाक बीमारी है। वर्तमान में हर 5 में से 1 व्‍यक्‍ति मधुमेह की बीमारी से ग्रसित है। मधुमेह अधिकांशत: लोगों को अनुवांशि‍क होती है। यदि किसी परिवार में मधुमेह की बीमारी पहले से है तो उस परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह बढ़ती जाती है। यह मुख्‍यत: पीड़ित व्‍यक्‍ति के रक्त में, ग्‍लूकोज की मात्रा ज्‍यादा होने के कारण होती है।

पिछले 10 सालों से भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या में चिंताजनक वृद्धि हुई है। आंकड़ों की यह बढ़त आधुनिक जीवन शैली और आहार की अनियमितता की वजह से विकराल हो रही है। लेकिन हम में से बहुत से लोग नहीं जानते कि मधुमेह आखिर है क्या और किन कारणों से यह लगातार फैल रहा है।डिप्टी सिविल सर्जन और उन की टीम ने कहा ऐसा दो कारणों से होता है – पहला, जब किसी व्‍यक्‍ति के शरीर में इंसुलिन का बनना बंद हो जाता है या व्‍यक्‍ति के शरीर की कोशिकाएं बन रही इंसुलिन पर प्रतिक्रिया नहीं करते। जब रोगी के शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाती है, उस समय व्‍यक्ति को मानव निर्मित इंसुलिन का सहारा लेना पड़ता है। और दूसरा जब रोगी के शरीर की कोशिकाएं उसके शरीर की इंसुलिन पर प्रतिक्रिया करना बंद कर देती हैं, उस स्‍थिति में भी व्‍यक्ति को मधुमेह जैसी बीमारी का सामना करना पड़ता है। इस के लक्षण थकान, कमजोरी, पैरों में दर्द, पैर का घाव ठीक न होना या गैंग्रीन का रूप ले लेना, अधिक पेशाब और भूख लगना, वजन कम होना, बार- बार चश्मे का नंबर बदलना, जननांगों में खुजली व संक्रमण होना, मानसिक समस्याएं आदि।

डिप्टी सिविल सर्जन ने बताया कि खाना खाने से पहले शूगर  70 से 130 मिग्रा के बीच होना चाहिए। खाना खाने के बाद रक्त में ग्लूकोज की मात्रा 180 मिग्रा से कम होनी चाहिए। सोते समय खून में शर्करा की सामान्य मात्रा 100 से 140 मिग्रा होती है। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने डिप्टी सिविल सर्जन और उन की टीम का छात्राओं और अध्यापकों को जागरूक करने के लिए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की व्यवस्था के लिए प्राध्यापिका जसनीत कौर का विशेष आभार जताया।

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