जे.सी. बोस विश्वविद्यालय में 5वें राष्ट्रीय गुणवत्ता सम्मेलन का शुभारंभ
गुणवत्ता को डिजिटल, ग्रीन एवं मानव-केंद्रित इंजीनियरिंग के माध्यम से राष्ट्रीय प्रगति का हिस्सा बनाने पर चर्चा

फरीदाबाद, 1 मई : 5वें राष्ट्रीय गुणवत्ता सम्मेलन का शुभारंभ आज जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद में हुआ। दो दिवसीय इस सम्मेलन का संयुक्त आयोजन सेफ्टी एंड क्वालिटी फोरम, द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), आईईआई फरीदाबाद लोकल सेंटर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग, जे.सी. बोस विश्वविद्यालय द्वारा किया जा रहा है।
सम्मेलन की थीम “भारत के लिए नेक्स्ट-जन क्वालिटी सिस्टम: डिजिटल, ग्रीन एवं मानव-केंद्रित इंजीनियरिंग द्वारा राष्ट्रीय उत्कृष्टता” रखी गई है। इसका उद्देश्य नवाचार, सतत विकास और जन-केंद्रित इंजीनियरिंग के माध्यम से भविष्य उन्मुख गुणवत्ता प्रणालियों को बढ़ावा देना है।
उद्घाटन सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं गणेश वंदना के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत करते हुए इंजी. इंदरदीप सिंह ओबरॉय, एफआईई, चेयरमैन, आईईआई फरीदाबाद लोकल सेंटर, ने कहा कि गुणवत्ता को राष्ट्रीय प्रगति के लिए कार्य-संस्कृति और सोच का हिस्सा बनाना होगा।
प्रो. प्रदीप कुमार डिमरी, एफआईई, संयोजक, ने भारत के उज्ज्वल भविष्य हेतु बुद्धिमान, सतत एवं मानव-केंद्रित गुणवत्ता प्रणालियों की आवश्यकता पर बल दिया। प्रो. मुनीश वशिष्ठ, एफआईई, अध्यक्ष, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग, ने प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की नवाचार, अनुसंधान एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
देवेंद्र गिल, चेयरमैन, एसक्यूएफ, ने सतत सुधार एवं नवाचार पर जोर दिया, जबकि मेजर जनरल एम.जे.एस. सयाली, वीएसएम (सेवानिवृत्त), सचिव एवं महानिदेशक, आईईआई, ने इंजीनियरिंग संस्थानों से गुणवत्ता परिवर्तन का नेतृत्व करने का आह्वान किया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में इंजी. मनीष एम. कोठारी, एफआईई, अध्यक्ष, आईईआई, ने पेशेवरों एवं संस्थानों से उभरती तकनीकों और सतत प्रक्रियाओं को अपनाकर भारत को गुणवत्ता उत्कृष्टता का वैश्विक मानक बनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सम्मेलन की स्मारिका का विमोचन किया गया तथा चार क्वालिटी एक्सीलेंस अवार्ड प्रदान किए गए। दिल्ली स्टेट सेंटर, करम एवं यूआरएस सहित प्रायोजकों को भी सम्मानित किया गया।
सम्मेलन को उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रतिसाद प्राप्त हुआ। लगभग 70 शोध पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 28 शोध पत्रों का तकनीकी सत्रों हेतु चयन किया गया। देश-विदेश के विशेषज्ञ ऑनलाइन माध्यम से भी जुड़े। सम्मेलन के साथ-साथ 12 घंटे का हैकाथॉन भी आयोजित किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न संस्थानों के छात्र नवाचार आधारित चुनौतियों पर कार्य कर रहे हैं।
प्रमोद कुमार, निदेशक, एसक्यूएफ, ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, प्रायोजकों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन के आगामी सत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवीकरणीय ऊर्जा, सतत विनिर्माण, डिजिटल सुरक्षा एवं अगली पीढ़ी की गुणवत्ता प्रणालियों पर तकनीकी प्रस्तुतियाँ एवं विशेषज्ञ चर्चा होगी।



