खुश रहने की अनिवार्य शर्त कि आप खुशियां बांटें : चांदनी आजाद अली

फरीदाबाद : खुश रहने की अनिवार्य शर्त यह है कि आप खुशियां बांटें। खुशियां बांटने से बढ़ती हैं और दुख बांटने से घटता है। यही वह दर्शन है जो हमें स्व से पर-कल्याण यानी परोपकारी बनने की ओर अग्रसर करता है। उक्त विचार जिले की प्रमुख समाजसेवी संस्था वूमेन्स पॉवर चांदनी आजाद अली ने संस्था के द्वारा नियमित रूप से जरूरतमंद लोगों के लिए चलाये जा रहे फल, खाद्य और अन्य जरुरी सामग्री के वितरण कार्यक्रम की जानकारी देते हुए रखे।

चांदनी ने कहा कि भागदौड़ भरे जीवन में मन यह सोचने को विवश करता है कि सबके लिए जीने का क्या सुख है? मनुष्य के समाज के प्रति उसके कुछ कर्तव्य भी होते हैं। सबसे बड़ा कर्तव्य है एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होना और यथाशक्ति सहायता करना। हाथ की शोभा गहनों और कीमती हीरे की घडिय़ों से नहीं है, परंतु दान से मानी गई है। हाथ का आभूषण कंगन नहीं दान है।

चांदनी आज़ाद अली ने कहा कि घर की तिजोरी में बंद पड़ा धन अगर किसी की सेवा में, सहायता में, स्कूल व अस्पताल बनाने में, किसी भूखे को भोजन देने में खर्च कर दिया जाए तो उससे बढक़र धन का और कोई इस्तेमाल नहीं हो सकता।

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि चाहे खर्च की गई रकम छोटी ही क्यों न हो, व्यक्ति को प्रसन्न बनाती है। उन्होंने बताया कि वूमेन्स पॉवर की यूथ टीम लगातार प्रयास कर रही है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों में खुशियां बांटे और उसी कड़ी में कभी खाना वितरण तो कभी फल वितरण कर रही है।

इस दौरान चांदनी आजाद अली ने अपनी यूथ टीम की मेहनत का उल्लेख करते हुए कहा कि टीम के बच्चे ना रात देखते हैं ना दिन देखते हैं और हमेशा समाज हित में प्रयास करते रहते हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों में खुशियां बांटे। इस काम को करने में यूथ टीम से अमन दीपांशु चौधरी, श्रुति चौधरी, उमंग, स्नेहा, सरिता और अंजलि गुप्ता पूरी लगन से लगे हुए हैं।

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