इस्कॉन फरीदाबाद में रामनवमी महोत्सव मनाया गया

फरीदाबाद : इस्कॉन फरीदाबाद व विश्व भर के इस्कॉन मन्दिरों में भगवान श्रीराम का प्रकट्य दिवस रामनवमी महोत्सव बहुत ही धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया। भगवद्गीता में भगवान अपने पृथ्वी पर आने के दो प्रमुख कारण बताते हैं। एक तो भक्तों की प्रसन्नता व उनका उद्धार करने और दूसरा दुष्टों का विनाश कर धर्म की फिर से स्थापना करने के लिए। लेकिन वह मुख्य रूप से भक्तों को प्रसन्न करने के लिए आते हैं। इसलिए जब भगवान इस धराधाम पर प्रकट होते हैं तो अपनी लीलाओं द्वारा भक्तों को आकर्षित करते हैं और इस प्रकार उनकी लीलाओं को अनंत काल तक याद किया जाता है।

भगवान श्रीराम भी इसी उद्देश्य के लिए अवतरित हुए, उन्होंने अपनी लीलाओं का प्रदर्शन किया और पूरे ब्रह्मांड को आकर्षित किया। अपने कर्मों के माध्यम से उन्होंने सिखाया कि कैसे एक आदर्श पुत्र, भाई, पति, स्वामी और राजा बनना है। वे त्रेतायुग में अवतरित हुए, आज भी उनके गौरवशाली कार्यों व आदर्शों को याद किया जाता है व उनका अनुसरण किया जाता है। उन्होंने अपने राज्य पर इस तरह शासन किया कि आज तक लोग चाहते हैं कि “राम राज्य” पृथ्वी पर आए। भगवान का ध्यान करने से व्यक्ति पापों से छुटकारा पा सकता है और वापस अपने शाश्वत धाम वैकुंठ में प्रवेश पा सकता है। ऐसी है प्रभु के ध्यान की शक्ति। भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने एक पूर्ण मानव के रूप में कार्य किया था।

मंदिर के अध्यक्ष गोपीश्वर दास का यह कहना है कि “हम मंदिर में सभी महत्वपूर्ण त्योहार बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं। इन त्योहारों को मनाने का मुख्य उद्देश्य भगवान को याद करना व उनके साथ आनंद लेना है। शास्त्र कहते हैं “स्मर्तव्यः सततं विष्णुर् विस्मर्तव्यो न जातुचित् ।” अर्थात हमें हमेशा कृष्ण को हमेशा याद रखना चाहिए और उन्हें कभी नहीं भूलना चाहिए। कृष्ण को भूलने के कारण ही हमारे जीवन में समस्याएं और दुःख उत्पन्न होते हैं। कृष्ण और राम में कोई भेद नहीं है। हमारे जीवन में जितने भी दुःख व कष्ट हैं वह भगवान को याद न करने व उनसे अपने शाश्वत सम्बन्ध को भुलाने के कारण हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस्कॉन फरीदाबाद में रामनवमी महोत्सव मनाया गया। इसी दिन इस्कॉन मंदिर, ईस्ट आफ कैलाश, दिल्ली की 25वां स्थापना दिवस सिल्वर जुबली के रूप में बहुत ही धूमधाम से मनाया। इस्कॉन मंदिर दिल्ली से ही हमें सेवाभाव व प्रचार प्रसार कार्यों को सही ढंग से करने की प्रेरणा प्राप्त होती है। 25 साल पहले आज ही के दिन दिल्ली में भव्य व साफ-सुथरे मंदिर की स्थापना हुई थी। हमारे देश की माननीय राष्ट्रपति जी ने व प्रधानमंत्री जी ने इस्कॉन के कार्यों को देखते हुए प्रशंसा-पत्र प्रदान किया।”
इस शुभ दिवस की शुरुआत प्रातः 4.30 बजे मंगल आरती के साथ हुई। इसके बाद पूरे दिन जप, कीर्तन, कथा और फिर विभिन्न रस, दूध, शहद नारियल पानी आदि से भगवान का अभिषेक किया गया। भक्तगण भगवान की प्रसन्नता के लिए विभिन्न प्रकार के व्यंजन भोग लगाने के लिए लाए। तत्पश्चात भक्तों को प्रसादम् बांटा गया। मंदिर में पूरे दिन भगवान के दर्शनार्थ श्रद्धालुगण आते रहे और कीर्तन भी पूरे दिन चलता रहा। इन सभी कार्यक्रमों की यूट्यूब पर ऑनलाइन स्ट्रीमिंग भी उपलब्ध थी।



