बल्लबगढ़ के ऐतिहासिक मटियामहल को नेताओं और अधिकारियों ने मिलकर मटियामेट किया : पाराशर

फरीदाबाद 11 जनवरी। बल्लबगढ़ के ऐतिहासिक मटियामहल को नेताओं और अधिकारियों ने मिलकर मटियामेट किया तभी आज तक भूमाफियाओं पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। ये कहना है बार एसोशिएशन के पूर्व प्रधान एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के प्रधान एडवोकेट एल. एन. पाराशर का जिन्होंने कहा कि मार्च 2019 में उनके द्वारा आवाज उठाने पर मई 2019 में मौके पर एसडीएम गए थे और उन्होंने कार्यवाही की बात की थी लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई।

वकील पाराशर ने कहा कि मई में एसडीएम बल्लबगढ़ ने पूरी जमीन की विडियोग्राफी भी कराई। एसडीएम ने बताया था कि इस जमीन की जांच के लिए तहसीलदार व पटवारी को आदेश दे दिए गए हैं लेकिन अब तक कोई जाँच नहीं हुई। एडवोकेट पाराशर ने बताया कि उन्हें पता चला था कि अंबेडकर चौक के पास मटिया महल प्राचीन काल से बना हुआ था। इसकी करीब 800 वर्गगज जगह खाली पड़ी हुई थी। बीजेपी सरकार आने के बाद नेताओं ने इस जमीन को कब्जाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते मिलीभगत से यहां 550 वर्गगज पर मल्टीस्टोरी बिल्डिंग खड़ी हो गई। जबकि यह जमीन सरकारी थी और है। समय-समय पर इसकी कंप्लेंट की गई लेकिन अधिकरियों ने मिलीभगत होने के चलते कार्रवाई नहीं की। आज इस जमीन की कीमत करीब 20 करोड़ रुपए से भी अधिक है।

पाराशर का कहना है कि मटिया महल का मुद्दा नगर निगम सदन में भी कई बार उठ चुका है। सदन ने इस जमीन के दस्तावेज देख हैरानी भी जताई थी और इस मामले की जांच विजिलेंस से कराने को लेकर प्रस्ताव पास हो गया था। इसके बाद आज तक भी इसकी जांच शुरू नहीं हो सकी। इस मामले में बड़े स्तर पर गोलमाल हुआ है। यही कारण है कि निगम अधिकारी इसकी जांच भी नहीं कराते। यदि इस जमीन का सही रिकॉर्ड देखना है तो एसडीएम ने राजस्व रिकॉर्ड, फील्ड बुक, मसाबी, सिजरा व अक्ष में देखे। इनमें यह जमीन आज भी सरकार के नाम पर है। किंतु बडे ही हैरानी की बात है कि जमीन का सारा रिकॉर्ड सरकार के नाम पर होने के बावजूद भी यहाँं अवैध निर्माण शुरू हो गया और भूमाफियाओं इमारत खड़ी कर ली। इसके बाद कई बार शिकायत के बाद भी माफियाओं पर कोई कार्यवाही नहीं हुई।

पाराशर ने कहा कि अब उन्होंने इसकी शिकायत मुख्य्मंत्री हरियाणा मनोहर लाल, गृह मंत्री अनिल विज, केबिनेट मंत्री मूलचंद शर्मा, डीसी फरीदाबाद से की है। अगर जल्द इस अवैध निर्माण को नहीं ढहाया गया तो ये मामला ग्रीवेंस कमेटी की बैठक में उठाया जाएगा।

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