“सेक्सुअल और प्रजनन स्वास्थ्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक कल्याण से भी जुड़ा हुआ है : डॉ. श्वेता मेंदिरत्ता

फरीदाबाद (मनीष शर्मा) : 12 फरवरी को सेक्सुअल एंड रिप्रोडक्टिव हेल्थ अवेयरनेस डे मनाने का मकसद लोगों को यौन और प्रजनन स्वास्थ्य (Sexual and Reproductive Health) के महत्व के बारे में जागरूक करना है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर व्यक्ति को अपनी यौन और प्रजनन से जुड़ी समस्याओं के लिए सही जानकारी, स्वास्थ्य सुविधाएं और जरूरी देखभाल मिल सके।
मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स में ऑब्स्टेट्रिक्स एवं गायनोकॉलोजी विभाग की एसोसिएट क्लीनिकल डायरेक्टर एवं हेड यूनिट-2 डॉ. श्वेता मेंदिरत्ता ने कहा, “सेक्सुअल और प्रजनन स्वास्थ्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक कल्याण से भी जुड़ा हुआ है। अपनी सेहत को लेकर जागरूक रहें, सही जानकारी लें और झिझक छोड़कर जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें। सुरक्षित संबंध, सही खानपान और समय-समय पर जांच कराना एक स्वस्थ जीवन के लिए बहुत जरूरी है।”
आज के समय में सेक्सुअल और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिनमें शामिल हैं: पीसीओडी/पीसीओएस (PCOD/PCOS): महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, अनियमित पीरियड्स और इनफर्टिलिटी की समस्या बढ़ रही है। एसटीडी (Sexually Transmitted Diseases): असुरक्षित संबंधों के कारण यौन संचारित रोग (HIV, सिफलिस, गोनोरिया) बढ़ रहे हैं। इनफर्टिलिटी (Infertility): जीवनशैली में बदलाव और तनाव के कारण गर्भधारण में दिक्कतें बढ़ रही हैं। मेंटल हेल्थ इश्यूज: यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं डिप्रेशन और एंग्जायटी जैसी मानसिक बीमारियों का कारण बन रही हैं। कम उम्र में यौन समस्याएं: युवा पुरुषों में इरेक्टाइल डिसफंक्शन और प्रीमैच्योर इजैकुलेशन जैसी समस्याएं आम हो रही हैं।
हर अस्पताल और क्लिनिक में मरीजों की संख्या अलग हो सकती है, लेकिन औसतन हर महीने 500-1000 मरीज यौन और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के लिए ओपीडी में आते हैं। इनमें सबसे ज्यादा संख्या 20 से 40 साल के पुरुषों और महिलाओं की होती है, क्योंकि इसी उम्र में लोग सबसे ज्यादा प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का सामना करते हैं, चाहे वह पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं हों, इनफर्टिलिटी हो या यौन संचारित रोग।



