K R Mangalam University में एग्रो-मार्केटिंग स्ट्रेटेजी प्रतियोगिता संपन्न

फरीदाबाद : केआर मंगलम विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज द्वारा एग्रो-मार्केटिंग स्ट्रेटेजी कॉन्टेस्ट का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी नवाचारपूर्ण विपणन रणनीतियों का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो.(डॉ.) जे.एस. यादव के नेतृत्व में डॉ. जय नाथ पटेल, असिस्टेंट प्रोफेसर के स्वागत संबोधन से हुआ, जो इस कार्यक्रम के फैकल्टी आयोजक भी थे। उन्होंने आधुनिक कृषि में मार्केटिंग इंटेलिजेंस, उपभोक्ता विश्लेषण और रणनीतिक योजना की बढ़ती आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसी प्रतियोगिता विद्यार्थियों को वास्तविक बाजार परिस्थितियों को समझने में सहायक होती हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि काशी राम, उद्यमी एवं संस्थापक सहजल फार्म्स रेवाड़ी ने कृषि उद्यमिता के उभरते अवसरों, नवाचार आधारित स्टार्टअप मॉडल तथा बाजार–उन्मुख उत्पादन की महत्वत्ता पर प्रेरक विचार साझा किए। काशी राम स्वयं भी बहुत सारे जैविक उत्पाद एनसीआर में उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर बिक्री करते हुए अच्छा मुनाफ़ा कमाते है। प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों पर अपनी रणनीतियाँ प्रस्तुत कीं, जिनमें नैनो कैप्सूल, मशरूम मार्केटिंग, मिलेट आधारित मूल्य-वर्धित उत्पादों की मार्केटिंग रणनीति, ग्रो स्मार्ट मॉडल, तथा प्राकृतिक शहद उत्पादों की ब्रांडिंग रणनीति प्रमुख रहीं। सभी प्रस्तुतियों में बाजार विश्लेषण, लक्षित उपभोक्ता, ब्रांड निर्माण और स्थिरता के महत्वपूर्ण घटकों को सम्मिलित किया गया।

प्रतियोगिता के न्यायाधीशों काशी राम, डॉ. मानसी यादव और डॉ. आदिल, के गंभीर मूल्यांकन के बाद प्रतियोगिता के परिणाम घोषित किए गए जिनमें प्रथम पुरस्कार नीतू शर्मा,द्वितीय पुरस्कार अनिशा,तृतीय पुरस्कार प्रिया ने हासिल किया। विजेताओं को प्रमाण पत्र एवं नकद पुरस्कार प्रदान किए गए। निर्णायकों ने प्रतिभागियों की प्रस्तुति शैली, तार्किक दृष्टिकोण और व्यावहारिकता की सराहना की। स्कूल ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज के डीन प्रो.(डॉ.) जे.एस. यादव ने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में करियर बनाने के लिए विपणन कौशल एक आवश्यक घटक है, और ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों की पेशेवर दक्षता को प्रोत्साहित करते हैं। कार्यक्रम का समापन आयोजन टीम तथा संकाय सदस्यों डॉ. अंजलि तोमर (कार्यक्रम समन्वयक), डॉ. अंबिका भंडारी के साथ ही छात्र समन्वयकों वंश सैनी, पुनीत और देवांश जैन के उत्कृष्ट सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए किया गया।

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