हरियाणा में एनबीए मान्यता प्राप्त करने वाले संस्थानों को मिलेगा ₹5 लाख का प्रोत्साहन
जे.सी. बोस विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग संस्थानों के लिए आउटकम बेस्ड एजुकेशन एवं एनबीए प्रत्यायन पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित

- गुणवत्ता, नवाचार और उत्कृष्टता के प्रति पूर्णतः समर्पित है जे.सी. बोस विश्वविद्यालय : कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार
- एनबीए मान्यता को बढ़ावा देने के लिए शिक्षण संस्थानों को प्रोत्साहन राशि तथा प्रत्यायन शुल्क की प्रतिपूर्ति करेगी प्रदेश सरकार : प्रभजोत सिंह
- एनबीए मान्यता उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम : प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा
- छात्र-शिक्षक अनुपात एवं गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करें शिक्षण संस्थान : डॉ. अनिल कुमार नासा
फरीदाबाद, 13 मई : जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद में नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडिटेशन (एनबीए), हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद तथा तकनीकी शिक्षा निदेशालय, हरियाणा सरकार के संयुक्त तत्वावधान में हरियाणा के इंजीनियरिंग कॉलेजेस के लिए आउटकम बेस्ड एजुकेशन एवं प्रत्यायन विषय पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में प्रदेशभर के तकनीकी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों, प्राचार्यों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में प्रो. राजीव कुमार, कुलगुरु, जे.सी. बोस विश्वविद्यालय; श्री प्रभजोत सिंह, महानिदेशक, तकनीकी शिक्षा, हरियाणा; प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा, अध्यक्ष, हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद; प्रो. एस.के. गक्खड़, उपाध्यक्ष, हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद; डॉ. वाई.पी.एस. बेरवाल, निदेशक, तकनीकी शिक्षा, हरियाणा; डॉ. अनिल कुमार नासा, सदस्य सचिव (एनबीए) तथा प्रो. आर.एस. राठौर, राज्य परियोजना निदेशक, हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल समन्वयन प्रो. कोमल कुमार भाटिया, निदेशक, आईक्यूएसी तथा प्रो. मुनिश वशिष्ठ, अधिष्ठाता (संस्थान), जे.सी. बोस विश्वविद्यालय द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के स्वागत संबोधन में प्रो. आर.एस. राठौर ने कहा कि तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता सुनिश्चित करने और वैश्विक मानकों के अनुरूप संस्थानों को तैयार करने के लिए ऐसी कार्यशालाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने एनबीए का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हरियाणा में इस प्रकार की पहल संस्थानों को आउटकम बेस्ड एजुकेशन को बेहतर ढंग से समझने और लागू करने में सहायक होगी।
कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. अनिल कुमार नासा ने बताया कि एनबीए प्रत्यायन विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा एवं रोजगार के अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि एनबीए, वॉशिंगटन समझौता का सदस्य होने के कारण मान्यता प्राप्त संस्थानों के छात्रों को वैश्विक स्तर पर अकादमिक स्वीकार्यता मिलती है। उन्होंने संस्थानों से संशोधित ग्रेजुएट एट्रिब्यूट और प्रोफेशनल कॉम्पिटेंसी ग्रेजुएट एट्रिब्यूट्स और प्रोफेशनल कॉम्पिटेंसीज़ (जीएपीसी संस्करण 4) के अनुरूप अपने पाठ्यक्रमों को ढालने तथा आवश्यक छात्र-शिक्षक अनुपात एवं गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
अपने उद्बोधन में प्रो. राजीव कुमार ने विश्वविद्यालय की गौरवशाली विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1969 में स्थापित यह संस्थान तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत पहचान रखता है। उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को साझा करते हुए बताया कि यहां एंटी-ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, अत्याधुनिक सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन लैब, सशक्त इन्क्यूबेशन सेंटर तथा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ सक्रिय सहयोगात्मक परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय गुणवत्ता, नवाचार और उत्कृष्टता के प्रति पूर्णतः समर्पित है।
हरियाणा तकनीकी शिक्षा के महानिदेशक श्री प्रभजोत सिंह ने हरियाणा सरकार की ओर से एनबीए प्रत्यायन को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण प्रोत्साहन योजनाओं की घोषणा की। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल के बाद एनबीए प्रत्यायन प्राप्त करने वाले संस्थानों को ₹5 लाख की प्रोत्साहन राशि तथा प्रत्यायन शुल्क की प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी, जबकि पहले से प्रत्यायित संस्थानों को शुल्क का 50 प्रतिशत वापस किया जाएगा। उन्होंने सरकारी एवं निजी दोनों प्रकार के संस्थानों से गुणवत्ता सुधार और प्रत्यायन के लिए सक्रिय प्रयास करने का आह्वान किया।
डॉ. वाई.पी.एस. बेरवाल ने कहा कि एनबीए प्रत्यायन से न केवल छात्रों को वैश्विक स्तर पर लाभ मिलता है, बल्कि संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता, रोजगारपरकता और सरकारी सहायता प्राप्त करने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं। उन्होंने बताया कि तकनीकी शिक्षा विभाग संस्थानों को प्रत्यायन के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध है।
प्रो. एस.के. गक्खड़ ने उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, शोध संस्कृति और संस्थागत आत्ममंथन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि छोटे-छोटे सुधार भी शिक्षा व्यवस्था में बड़े परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने शोध एवं नवाचार को राष्ट्रीय विकास का आधार बताते हुए संस्थानों से इन क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने की अपील की।
प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा ने एनबीए प्रत्यायन को उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे संस्थान वैश्विक मानकों के अनुरूप अपनी शैक्षणिक गुणवत्ता को स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने छात्र-शिक्षक अनुपात, शोध, नवाचारी शिक्षण पद्धतियों तथा छात्रों में ज्ञान, कौशल, दृष्टिकोण एवं नैतिक मूल्यों के विकास पर विशेष बल दिया।
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में प्रो. संजय अग्रवाल एवं प्रो. आर.वी. रंगनाथ ने प्रतिभागियों को प्रोग्राम आउटकम्स, मूल्यांकन प्रक्रियाओं तथा सेल्फ असेसमेंट रिपोर्ट (एसएआर) की तैयारी से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की।
कार्यशाला में हरियाणा के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं इंजीनियरिंग महाविद्यालयों से कुल 214 प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यशाला के विभिन्न सत्रों के संचालन एवं व्यवस्थापन में आईक्यूएसी टीम के सदस्य डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता, डॉ. हरीश कुमार, डॉ. रश्मि पोपली एवं डॉ. उमेश कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



