सोशल वर्क विद्यार्थियों के लिए ‘नशा और उसकी लत: जागरूकता से पुनर्वास तक’ पर मास्टर क्लास का आयोजन

नशा रोकथाम, शुरुआती लक्षणों की पहचान, काउंसलिंग और पीड़ितों के पुनर्वास पर मंथन आवश्यक: धर्मेद्र कसाना

  • नशे से दूर रह कर, नशा रोकथाम, पीड़ित के पुनर्वास में अपनी भूमिका निभाएं विद्यार्थी : प्रो.पवन सिंह

फरीदाबाद, 01 सितंबर। जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए के संचार एवं मीडिया प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा सोशल वर्क विद्यार्थियों के लिए ‘वीकली स्किल बूस्ट’ मास्टर क्लास श्रृंखला के तहत एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र का विषय ‘नशा और उसकी लत: जागरूकता से पुनर्वास तक’ रहा।

कार्यक्रम में ‘सोशल वेलफेयर एंड डी-एडिक्शन सर्विसेज’ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर धर्मेंद्र कसाना ने विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों को नशे की लत से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों, इसके सामाजिक-मानसिक प्रभावों और पुनर्वास की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सत्र के दौरान नशा रोकथाम, शुरुआती लक्षणों की पहचान, काउंसलिंग और समाज में पीड़ितों के पुनर्वास पर विशेष जोर दिया गया।

विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.पवन सिंह ने मास्टर क्लास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘नशे की समस्या केवल किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करती है। भविष्य के समाजसेवी के रूप में सोशल वर्क विद्यार्थियों के लिए यह आवश्यक है कि वे इस विषय को केवल चिकित्सीय दृष्टिकोण से न देखें, बल्कि संवेदनशीलता, सम्मान और गैर-निर्णायक दृष्टिकोण के साथ पुनर्वास में अपनी भूमिका निभाएं।

कोऑर्डिनेटर सहायक प्रोफेसर डॉ.अखिलेश त्रिपाठी और डॉ.नरेंद्र ढुल ने बताया कि मास्टरक्लास में यह संदेश दिया गया कि जागरूकता ही रोकथाम की पहली सीढ़ी है और कलंक के बजाय सहानुभूति के साथ मदद करने से ही पीड़ितों को मुख्यधारा में वापस लाया जा सकता है। यह सत्र विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ क्षेत्र के व्यावहारिक अनुभवों से समृद्ध करने में अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ।

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