डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘ज्योतिसर: गीता का जन्म स्थल’ के निर्देशक धीरेन सिंह को मिला ‘सर्वश्रेष्ठ डायरेक्टर’ अवार्ड
11वें देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में अभिनेता दीपक पाराशर और हेमंत पांडेय ने दिया पुरुस्कार

- कुलगुरु प्रो.संजय कौशिक ने कहा कि धीरेन सिंह की यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है
फरीदाबाद। जे.सी.बोस विश्वविद्यालय वाईएमसीए के संचार एवं मीडिया टेक्नोलॉजी विभाग के लिए गौरव का क्षण है। विभाग की डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘ज्योतिसर : गीता का जन्म स्थल’ के निर्देशक धीरें सिंह ने 11वें देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रोफेशनल श्रेणी में ‘सर्वश्रेष्ठ डायरेक्टर’ अवार्ड अपने नाम किया है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय एवं मीडिया विभाग के साथ-साथ हरियाणा के लिए भी गौरव की बात है।
फिल्म ‘ज्योतिसर: गीता का जन्म स्थल’ में कुरुक्षेत्र स्थित ज्योतिसर की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्ता को सिनेमाई दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है। फिल्म को दर्शकों और फिल्म जगत से मिली सराहना के बीच निर्देशक धीरेन सिंह को मिला यह सम्मान उनकी रचनात्मक सोच, निर्देशन क्षमता और समर्पण को दर्शाता है। इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में किसी विद्यार्थी की डाक्यूमेंट्री को प्रोफेशनल श्रेणी में अवार्ड मिलना एक ऐतिहासिक कीर्तिमान है।
विश्वविद्यालय कुलगुरु प्रो.संजय कौशिक ने कहा कि धीरेन सिंह की यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। विद्यार्थियों एवं युवा फिल्मकारों की ऐसी रचनात्मक उपलब्धियां उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए प्रेरित करती हैं। विश्वविद्यालय परिवार की ओर से उन्हें हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं।
डीन प्रो.अनुराधा शर्मा और प्रो.रेणुका गुप्ता ने भी मीडिया विभाग की इस बड़ी उपलब्धि पर बधाई देते हुए छात्र धीरेन सिंह के उज्जवल भविष्य की कामना की। विभागाध्यक्ष प्रो.पवन सिंह ने कहा कि यह पुरस्कार धीरेन सिंह की मेहनत, रचनात्मकता और विषय के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है। विभाग के लिए यह गर्व का क्षण है कि हमारे विद्यार्थियों की प्रतिभा अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के फिल्म मंचों पर बड़ी पहचान बना रही है।
अपनी उपलब्धि पर धीरेन सिंह ने कहा कि यह सम्मान मेरे लिए केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि मेरे सभी गुरुओं, मेंटर्स और उन सभी लोगों के विश्वास एवं मार्गदर्शन का परिणाम है, जिन्होंने मेरी रचनात्मक यात्रा में मेरा साथ दिया। मैं अपने सभी शिक्षकों और मेंटर्स का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। यह सम्मान मैं उन्हें समर्पित करता हूं।



