जे.सी. बोस विश्वविद्यालय में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में रुझान और प्रगति पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन प्रारम्भ

मैकेनिकल इंजीनियरिंग औद्योगिक विकास की रीढ़, 'सतत नवाचार' की आवश्यकता: कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार

  • विश्वविद्यालयों प्रगति के साथ पाठ्यक्रम को अपडेट करना होगा: एस.एस. बंगा
  • भविष्य के इंजीनियरिंग समाधानों के लिए बायोमिमिक्री को प्रोत्साहित करने की जरुरत: डॉ. सुभाष शर्मा
  • आधुनिक तकनीक मनुष्यों को दैवीय गुण संपन्न बनाने में सक्षम: प्रो. डी.एस. चौहान

फरीदाबाद, 16 अप्रैल : जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फरीदाबाद के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित ‘मैकेनिकल इंजीनियरिंग में रुझान और प्रगति’ पर दो-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन यहाँ शुरू हो गया। सम्मेलन में 200 से ज्यादा प्रतिभागी हिस्सा ले रहे है।

अगले दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में प्रतिष्ठित शिक्षाविद प्रो. डी.एस. चौहान (पूर्व कुलपति, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय, लखनऊ) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सत्र की अध्यक्षता जे.सी. बोस विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने की। इस अवसर पर विक्टोरा इंडस्ट्रीज़ (फरीदाबाद) के प्रबंध निदेशक एस.एस. बंगा, सेंट्रल क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी (ऑस्ट्रेलिया) के वरिष्ठ व्याख्याता डॉ. सुभाष शर्मा, और आईएमटी इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन (फरीदाबाद) के अध्यक्ष प्रमोद राणा आमंत्रित अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कुलसचिव प्रो. अजय रँगा और डीन (एफईटी) प्रो. राज कुमार भी इस अवसर पर मौजूद रहे।

सम्मेलन का उद्घाटन दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ, जिसके बाद विभाग के अध्यक्ष प्रो. अरविंद गुप्ता ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने सम्मेलन और विभाग के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह सम्मेलन शिक्षा जगत और उद्योग जगत को आपस में जोड़ेगा। इसमें 160 स्वीकृत शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे, साथ ही अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों से पांच विशेषज्ञ दो प्लनेरी सत्रों में व्याख्यान देंगे। इसके अलावा, पांच तकनीकी सत्र और एक ‘औद्योगिक सम्मेलन’ भी आयोजित किया जाएगा। औद्योगिक सम्मेलन का उद्देश्य इस क्षेत्र के उद्योगों के सामने आने वाली प्रमुख समस्याओं का समाधान खोजना है। इस महत्वपूर्ण संवाद को आगे बढ़ाने में दस विशेषज्ञ पैनलिस्ट सहयोग करेंगे।

इस अवसर पर बोलते हुए कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग को औद्योगिक विकास की रीढ़ बताया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम को पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर ‘सतत नवाचार’ की ओर विकसित होना चाहिए, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंडस्ट्री 4.0 और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसी उभरती हुई तकनीकों को शामिल किया जाए। प्रो. कुमार ने कहा कि सीमेंस के सहयोग से विश्वविद्यालय ‘ऑटोमेशन और मेकाट्रॉनिक्स’ के क्षेत्र में एक उन्नत ‘उत्कृष्टता केंद्र’ स्थापित करने जा रहा है।

सत्र को संबोधित करते हुए, एस.एस. बंगा ने पिछले 30-40 वर्षों में उन्नत मैकेनिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आए तीव्र परिवर्तनों, विशेष रूप से इंडस्ट्री 4.0 और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एकीकरण के संदर्भ में पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि विश्वविद्यालयों को इंजीनियरिंग के क्षेत्र में हो रही प्रगति के साथ कदम मिलाकर चलने के लिए अपने पाठ्यक्रम को लगातार अपडेट करते रहना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने कारखानों में ‘लाइव डेटा’ और ‘ऑटोमेशन’ के उदाहरण भी दिए। उन्होंने छात्रों को विभिन्न क्षेत्रों में अपनी रुचियों को खोजने, तकनीकी प्रगति से अपडेट रहने और प्रोफेसरों के साथ सक्रिय रूप से जुड़कर प्रश्न पूछने और उत्तर पाने के लिए प्रोत्साहित किया।

अपने संबोधन में, डॉ. सुभाष शर्मा ने समझाया कि मैकेनिकल इंजीनियरों की भूमिका पारंपरिक डिज़ाइन और रखरखाव से आगे बढ़ गई है, खासकर ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में जहाँ मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र सिकुड़ रहा है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इंजीनियरों के केवल गणित और ड्राइंग पर निर्भर रहने का युग समाप्त हो गया है, और इंडस्ट्री 5.0 के साथ, सामाजिक प्रभाव और मानवीय कारकों की व्यापक समझ होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने निरंतर नवाचार, ‘प्लान, डू , चेक, एक्ट’ चक्र का उपयोग करके रणनीतिक योजना बनाने और भविष्य के इंजीनियरिंग समाधानों के लिए बायोमिमिक्री पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया।

मुख्य अतिथि प्रो. डी.एस. चौहान ने सुझाव दिया कि आधुनिक तकनीक मनुष्यों को ऐसे गुण प्राप्त करने में सक्षम बनाती है जो कभी केवल देवताओं में माने जाते थे, जैसे कि सर्वव्यापकता, सर्वशक्तिमानता और सर्वज्ञता। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह करते हुए अपना संबोधन समाप्त किया कि वे अपने ज्ञान के स्तर को ऊँचा उठाएँ ताकि अपने देश के लिए अधिक सम्मान अर्जित कर सकें और मानवता के कल्याण में योगदान दे सकें।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!