जे. सी. बोस विश्वविद्यालय द्वारा स्पेक्ट्रोस्कोपिक तकनीकों पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

प्रमाणित कैलिब्रेशन सेवाओं के माध्यम से विश्वविद्यालय उद्योगों को सशक्त बनाने में सहयोग देगा: कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार

फरीदाबाद, 19 जनवरी : जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद की केंद्रीय उपकरण प्रयोगशाला (सीआईएल) द्वारा स्पेक्ट्रोस्कोपिक एवं विश्लेषणात्मक तकनीकों पर आयोजित एक-सप्ताह की राष्ट्रीय कार्यशाला एवं हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण का शुभारंभ हो गया। यह कार्यशाला 19 से 23 जनवरी 2026 तक आयोजित की जा रही है।

कार्यशाला का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार द्वारा किया गया तथा डॉ. मोहना कृष्णा रेड्डी मुदियाम, निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ पेस्टीसाइड फॉर्मुलेशन टेक्नोलॉजी (आईपीएफटी), गुरुग्राम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

उद्घाटन सत्र में बोलते हुए प्रो. राजीव कुमार, कुलपति ने कहा कि परीक्षण एवं कैलिब्रेशन में प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) उद्योगों में गुणवत्ता प्रबंधन प्रणालियों तथा तकनीकी योग्यता स्थापित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि जे.सी. बोस विश्वविद्यालय में केंद्रीय उपकरण प्रयोगशाला (सीआईएल) उच्च स्तरीय उपकरणों से सुसज्जित एक अत्याधुनिक सुविधा है, जो उद्योगों तथा शैक्षणिक समुदाय को उन्नत विशेषता निर्धारण तकनीकें, परीक्षण एवं विश्लेषणात्मक अनुसंधान सहायता प्रदान करने के लिए सक्षम है।

प्रयोगशाला अब उद्योगों के उपकरणों एवं परीक्षण एवं गुणवत्ता आश्वासन से संबंधित उपकरणों के लिए न्यूनतम (सस्ती) दरों पर कैलिब्रेशन सेवाएं प्रदान करने के लिए पूर्णतः तैयार है, जिससे उद्योगों को कठोर गुणवत्ता आश्वासन मानकों को बनाए रखने में सहायता मिलेगी। उन्होंने आगे कहा कि ऐसी कार्यशालाएं फैकल्टी सदस्यों के लिए अत्यंत मूल्यवान हैं क्योंकि ये विश्वविद्यालय की उन्नत अनुसंधान, कौशल विकास तथा उद्योग-अकादमिक सहयोग की पहलों को मजबूत करती हैं।

मुख्य अतिथि डॉ. मोहना कृष्णा रेड्डी मुदियाम, निदेशक, आईपीएफटी, गुरुग्राम ने ऐसी कार्यशालाओं की उच्च प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने उन्नत स्पेक्ट्रोस्कोपिक एवं विश्लेषणात्मक तकनीकों में व्यावहारिक विशेषज्ञता की विशेष रूप से कीटनाशक फॉर्मुलेशन, पर्यावरण मॉनिटरिंग, गुणवत्ता नियंत्रण तथा नियामक अनुपालन जैसे क्षेत्रों में बढ़ती आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. मुदियाम ने इस पहल की सराहना की कि यह शैक्षणिक प्रशिक्षण एवं वास्तविक औद्योगिक अनुप्रयोगों के बीच प्रभावी सेतु का कार्य करती है, जो नवाचार को बढ़ावा देने तथा विश्लेषणात्मक विज्ञानों में सटीकता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

प्रो. मनीषा गर्ग, निदेशक (सीआईएल) ने सुविधा के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सीआईएल एक सामान्य, केंद्रीकृत सुविधा है जो विभिन्न विभागों में शिक्षण, अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों को सहयोग देने के लिए उन्नत वैज्ञानिक उपकरणों का संग्रह करती है। यह उन परिष्कृत विश्लेषणात्मक, विशेषता निर्धारण एवं परीक्षण उपकरणों तक पहुंच प्रदान करती है जो व्यक्तिगत स्तर पर उपलब्ध नहीं हो सकते।

प्रो. गर्ग ने आगे कहा कि पांच दिवसीय कार्यशाला प्रतिभागियों को संबंधित क्षेत्रों में गहन ज्ञान तथा कौशल विकास प्रदान करने के लिए डिजाइन की गई है। कार्यशाला में विशेषज्ञ व्याख्यान, तकनीकी प्रस्तुतियां तथा समूह-वार हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण सत्रों का गहन कार्यक्रम शामिल है। सत्र जे.सी. बोस विश्वविद्यालय के प्रख्यात वक्ताओं, आईपीएफटी गुरुग्राम के विशेषज्ञों तथा होरिबा इंडिया, ज़ीस, सेमीलैब, शिमाद्ज़ू इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एवं आई.आर. टेक्नोलॉजी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड जैसे प्रमुख उद्योग भागीदारों के प्रशिक्षकों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।

कार्यशाला का संचालन कार्यशाला संयोजक डॉ. विनोद कुमार द्वारा किया गया। सत्र का समापन उप निदेशक (अनुसंधान एवं विकास) डॉ. दीपांश शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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