गैस्ट टीचर्स की नौकरी तो सुरक्षित, परिवार सुरक्षित नहीं

फरीदाबाद : दिवंगत अतिथि अध्यापक ताहिर खान की विधवा ने मुख्यमंत्री को खून से पत्र लिखकर अपने परिवार की सुरक्षा की मांग की है। हरियाणा सरकार ने 2019 में “अतिथि शिक्षक सेवा सुरक्षा बिल” बनाकर अतिथि अध्यापकों की नौकरी को सुरक्षित तो कर दिया, लेकिन आज तक कोई भी सुविधा अतिथि अध्यापकों को सरकार नहीं दे सकी। अतिथि अध्यापकों के परिवार मुश्किल जीवन जीने को मजबूर हो रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी उन विधवा महिलाओं के परिवारों को हो रही है, जिनके पति नौकरी करते हुए असमय दिवंगत हो गए। दिवंगत अतिथि अध्यापक की पत्नी ने अपने परिवार के साथ मुख्यमंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर मांग की है कि आपने नौकरी तो सुरक्षित कर दी लेकिन परिवार सुरक्षित नहीं हो पाए हैं।

खून से लिखे पत्र को शिक्षामंत्री कंवरपाल गुर्जर को 14 मई को सौंपा जाएगा। अतिथि अध्यापक अपने परिवारों का इलाज कराने के लिए अपनी जमीन बेचने को मजबूर हो रहे हैं। पति के मरने के बाद बच्चों की भूख का कोई इंतजाम सरकार के द्वारा नहीं किया गया। संघ के जिला प्रधान रघु वत्स के अनुसार अतिथि अध्यापकों को किसी भी प्रकार की सुविधा सरकार के द्वारा उपलब्ध नहीं कराई जाती। असमय मृत्यु होने पर कोई वेतन भी नहीं दिया जाता। फरीदाबाद की रजिया बेगम ने अपने तीन लड़कों और दो लड़कियों के साथ खून से पत्र लिखा। अतिथि अध्यापक की विधवा ने कहा है कि लाखों रुपये बीमारी में लग गए। हमारा सब बिक गया और अब रोटी के लाले पड़ रहे हैं। इस अवसर पर उपप्रधान विजयपाल नरवाल, ब्लॉक प्रधान सुन्दर भड़ाना, वीरेन्द्र कुमार, जितेन्द्र दीक्षित, हरि सिंह, किशोरी लाल विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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