हमें अपने सैनिकों के बलिदान से प्रेरणा लेनी होगी : यशपाल

  • शहीद स्मारक पर पहुंच वीर शहीदों को किया नमन
  • उपायुक्त ने विजय दिवस के अवसर पर युद्ध वीरांगनाओं को सक्वमानित भी किया

फरीदाबाद : 6 दिसंबर 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के 50 साल पूर्ण होने पर विजय दिवस के अवसर पर फरीदाबाद जिला प्रशासन की ओर से वीर शहीदों को उपायुक्त यशपाल ने नमन किया। बुधवार को शहीद स्मारक पर जिला प्रशासन व जिला सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण विभाग के अधिकारियों, युद्ध वीरांगनाओं ने उपायुक्त के साथ 1971 के भारत-पाक युद्ध के वीर शहीदों को पुष्प चक्रअर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। पुलिस टुकड़ी की ओर से शस्त्र झुकाकर सलामी दी गई। उन्होंने इस अवसर पर युद्ध वीरांगनाओं को सक्वमानित भी किया।

उपायुक्त यशपाल ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्रअर्पित करते हुए कहा कि हमें अपने वीर-जवानों के शौर्य व बलिदानों से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि विजय दिवस 1971 में हुए भारत-पाक युद्ध में भारत को मिली जीत की स्मृति में मनाया जाता है। 1971 में आज ही के दिन पाकिस्तान के करीब 93 हजार सैनिकों ने भारतीय सेना के 1500 सैनिकों के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। यह इतिहास में आज तक का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण माना जाता है। इसके बाद ही पूर्वी पाकिस्तान को बांग्लादेश के रूप में नया राष्ट्र बनाया गया था। उन्होंने बताया कि 1971 में भारत ने पाकिस्तान को न सिर्फ सबक सिखाया बल्कि बांग्लादेश नाम का एक स्वतंत्र देश बना दिया। इस युद्ध को बांग्लादेश का स्वतंत्रता संग्राम भी कहा जाता है। 16 दिसंबर, 1971 को पाकिस्तानी सेना ने सरेंडर कर दिया था और ढाका में पाकिस्तानी लेक्रिटनेंट जनरल एएके नियाजी ने भारत के लेक्रिटनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के समक्ष आत्मसमर्पण पत्र पर हस्ताक्षर किए और भारत ने विजय दिवस मनाया।

उन्होंने कहा कि आज सब देशवासी अपने वीर सेनानियों के शौर्य व बहादुरी के कारण ही अमन व चैन से रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम सबको अपने सैनिकों के बलिदान से प्रेरणा लेनी चाहिए और देशहित में अपना योगदान करना चाहिए। इस अवसर पर कवि सुरेश कुमार कौशिक ने अपनी देशभञ्चित की कविताएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम में सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण विभाग के कल्याण अधिकारी नरेश चंद्र शर्मा, कर्नल ऋषि पाल, होशियार सिंह अहलावत, सूबेदार विजेंद्र सिंह ठाकरान, सेना मैडल, वीर चक्र प्राप्त सेना के अधिकारी, युद्ध वीरांगनाएं एवं उनके परिवारों के सदस्य भी विशेष तौर पर आमंत्रित किए गए थे।

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