सामाजिक बुराईयों को समाप्त करने से ही होगा गरीबों का उत्थान

फरीदाबाद। समाज फैले भ्रम, मिथक और सामाजिक बुराईयों को समाप्त करने के लिए ग्लोबल फाउंडेशन ऑफ इंडिया के तत्वाधान में एक विचार गोष्ठा का आयोजन राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित राम नगर बुद्ध विहार में किया गया। इस अवसर पर बौद्धिष्ठ सोसाईटी ऑफ इंडिया हरियाणा के अध्यक्ष डॉ. लाल सिंह, वरिष्ठ पत्रकार जगन्नाथ गौतम एवं सामजसेवी शेरसिंह ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा समाज में फैले भ्रम, मिथक और सामाजिक बुराईयों को समाप्त किए बिना देश के गरीबों का उत्थान कभी नहीं हो सकता। इसलिए समाज के चिंतक और हितैषी गरीब लोगों की जागरूकता के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा देश के संविधान के मुताबिक हर गरीब को शिक्षा, रोजगार और निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने का काम सरकार का होता है। जबकि आजादी से लेकर अब तक की सरकारों ने इस काम को पूरी ईमानदारी से नहीं किया। आज भी सरकारी स्कूलों की हालत जर्जर और शिक्षा का स्तर खराब तथा बच्चों को भ्रमित करने वाला है। युवा पीडी से शिक्षा के संविधानिक अधिकार छीने जा रहे हैं, और उनको रोजगार के कोई नए विकल्प उपलब्ध नहीं किए गए। आज गरीब की हालत दिनों-दिन खराब हो रही है। व्यापार और निजि कम्पनियों में नौकरियों के अभाव के चलते देश का 85 प्रतिशत गरीब लोग बेरोजगारी की कगार पर है। वह सरकारों की गलत नीतियों और सामंतवादी सोच के चलते उपेक्षा के शिकार होकर भुखमरी की हालत पर पहुंच गए हैं।
समारोह के संयोजक एवं ग्लोबल फाउंडेशन ऑफ इंडिया के संस्थापक के.एल. गौतम ने कहा देश के मूलनिवासियों को दिनों दिन बुरी हालत में पहुंच रहे समाज की चिंता करते हुए उचित कदम उठाने चाहिए। समाज में एकता का अभाव बहुत बडी चिंता का विषय है। यदि हम समय पर नहीं जागे तो, जो कारवां हमारे पूर्वजों के अथक प्रयासों और कुबार्नियों की बदौलत यहां तक पहुंचा है, वह पीछे चला जाएगा। श्री गौतम ने कहा जिन बीमारियों का शिकार हमारा गरीब समाज है, उनका ईलाज समाज के शिक्षित और समरिद्ध लोगों को ही करना होगा। अन्यथा वो दिन दूर नहीं जब भारत का गरीब वर्ग असहाय और असमर्थ स्थिति में पहुंच जाएगा। इस अवसर पर सुरेश आर्य, तुलीराम बौद्ध, अनिल काटे, ब्रज मोहन, टीकम सिंह, मनोज चौधरी, स. उपकार सिंह, देशराज बौद्ध, धु्रव कुमार एडवोकेट, सुरेन्द्र बौद्ध, सुरेश गौतम, योगेश गौतम, रवि भास्कर, मनी कुमार, मदन बौद्ध व महेश बौद्ध सहित अनेक लोगों ने अपने विचार सांझा किए।



