गुरु अर्जुन देव जी की शिक्षाएं हमेशा प्रासंगिक, धर्म के लिए हुए बलिदान

  • वीर योद्धा श्रीगुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस पर वर्चुअल कार्यक्रम आयोजित

फरीदाबाद : शहीदों के सरताज कहे जाने वाले वीर योद्धा श्रीगुरु अर्जुन देव जी के शहीदी दिवस पर राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एन एच तीन फरीदाबाद में जूनियर रेडक्रॉस, गाइड्स और सैंट जॉन एंबुलेंस ब्रिगेड ने प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचन्दा की अध्यक्षता में वर्चुअल कार्यक्रम आयोजित किया। 1606 में आज ही के दिन मुगल बादशाह जहांगीर ने उनकी जघन्य तरीके से यातना देकर हत्या करवा दी थी। आज ही के दिन उनका शहीदी दिवस मनाया जाता है। वे सिखों के पांचवें गुरु थे। उन्होंने अपना जीवन धर्म और लोगों की सेवा में बलिदान कर दिया। वे दिन रात संगत और सेवा में लगे रहते थे। वे सभी धर्मों को एक समान दृष्टि से देखते थे। इन की शहीदी के बाद इनके सुपुत्र गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने शांति के साथ-साथ सैनिक बनने का भी उपदेश दिया।

श्री गुरु अर्जुन देव जी का जन्म श्री गुरु रामदास जी के गृह में माता भानी जी की कोख से वैशाख 7 सम्वत 1620 को गोइंदवाल साहिब में हुआ। इनका पालन-पोषण गुरु अमरदास जी जैसे गुरु तथा बाबा बुड्ढा जी जैसे महापुुरुषों की देखरेख में हुआ। ये बचपन से ही बहुत शांत स्वभाव व पूजा भक्ति करने वाले थे। गुरु रामदास जी के तीन सुपुत्र बाबा महादेव जी, बाबा पृथी चंद जी तथा अर्जुन देव जी थे जिनमें से गुरु रामदास जी ने हर तरह की जांच-पड़ताल करने के बाद अर्जुुन देव जी को गुरुगद्दी सौंपी। उन्होंने ही अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब गुरुद्वारे की नींव रखवाई थी, जिसे आज स्वर्ण मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं इस गुरुद्वारे का नक्शा स्वयं अर्जुन देव जी ने ही बनाया था।

प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचन्दा ने बताया कि उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब का संपादन भाई गुरदास के सहयोग से किया था। उन्होंने रागों के आधार पर गुरु वाणियों का वर्गीकरण भी किया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब में स्वयं गुरु अर्जुन देव के हजारों शब्द हैं। उनके अलावा इस पवित्र ग्रंथ में भक्त कबीर, बाबा फरीद, संत नामदेव, संत रविदास जैसे अन्य संत-महात्माओं के भी शब्द हैं। रविंद्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि गुरु अर्जुन देव जी की शिक्षाएं हमेशा से ही प्रासंगिक हैं उन्होंने धर्म के लिए अपने आप को बलिदान कर दिया और सभी को सीख दी कि किस प्रकार हमें अपने धर्म की रक्षा के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर देना चाहिए। प्राध्यापिका डॉक्टर जसनीत कौर और छात्रा भूमिका ने भी पोस्टर बना कर गुरु अर्जुन देव जी के बलिदान से प्रेरणा लेने की सीख दी।

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