डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं, साइबर ठगों के झांसे में न आएं – पुलिस उपायुक्त मुख्यालय, हिमाद्री कौशिक

साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें कॉल

फरीदाबाद : साइबर ठग लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए “डिजिटल अरेस्ट” जैसे हथकंडे अपना रहे हैं। ठग स्वयं को पुलिस, सीबीआई, ईडी, कस्टम, आयकर विभाग अथवा अन्य सरकारी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन या वीडियो कॉल करते हैं और पीड़ित को किसी अपराध में फंसाने, गिरफ्तारी होने या उसके नाम पर पार्सल मिलने व अन्य भय वाली बातें बोलकर भयभीत करते हैं। पीड़ित को वीडियो कॉल पर लगातार निगरानी में रखकर डिजिटल अरेस्ट करने बारे कहा जाता है और बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने का भी दबाव बनाया जाता है।

पुलिस उपायुक्त मुख्यालय, हिमाद्री कौशिक ने बताया कि भारत में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। कोई भी लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी किसी नागरिक को फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से हिरासत में नहीं लेती और न ही किसी जांच या केस से बचाने के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहती है।

फरीदाबाद के साइबर ठगी के मामलों से भी यह सामने आया है कि साइबर अपराधी पहले लोगों में विश्वास बनाते हैं और उसके बाद डर, धमकी एवं मानसिक दबाव बनाकर उन्हें अपने जाल में फंसा लेते हैं। साइबर अपराधियों का उद्देश्य पीड़ित को इतना भयभीत करना होता है कि वह बिना सोचे-समझे उनकी बात मानने लगे और अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठे।

उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं को सरकारी अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर बात करने, मोबाइल की स्क्रीन शेयर करने, कोई ऐप डाउनलोड करने अथवा पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहे तो घबराएं नहीं। तुरंत कॉल काटें, अपने परिवार के सदस्य या किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी दें और पुलिस से संपर्क करें।

फरीदाबाद पुलिस की अपील

– याद रखें—भारत में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है।

– पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी के नाम पर धमकी मिलने पर घबराएं नहीं।

– किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर वीडियो कॉल पर लगातार जुड़े न रहें।

– किसी के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग अथवा रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड न करें।

– OTP, UPI PIN, CVV, नेट बैंकिंग पासवर्ड अथवा अन्य बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

– गिरफ्तारी से बचाने, जांच बंद करने या खाता सुरक्षित करने के नाम पर किसी को पैसे ट्रांसफर न करें।

– किसी संदिग्ध कॉल की स्थिति में अपने स्तर पर संबंधित विभाग से आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करें।

– यदि ऐसी कोई कॉल आए तो तुरंत कॉल काटकर घटना की सूचना स्थानीय पुलिस को दें और अपने परिवार के सदस्यों को अवगत करायें।

पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि यदि आपके साथ साइबर ठगी हो गई है या आपके बैंक खाते से राशि निकल गई है, तो बिना समय गंवाए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें तथा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। ठगी के तुरंत बाद की गई शिकायत रकम को रोकने और वापस दिलाने की कार्रवाई में महत्वपूर्ण हो सकती है।

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