अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भारत की ताकत का प्रतीक है सूरजकुंंड मेला

  • लाखों के मन को नया उत्साह देकर जाएगा मेला

सूरजकुंड : कोविड महामारी से बोझिल हुए मानव मन को सुकून के कुछ पल मिल सकें, इसी उद्देश्य से इस बार आयोजन किया गया है अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले का। मेले में लगभग दस लाख पर्यटकों के आने की संभावना है।

यह कहना है हरियाणा पर्यटन विभाग के महानिदेशक एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अमरजीत मान का। मेला सचिवालय में उन्होंने बताया कि अब तक करीब दो लाख लोग यह मेला देखने के लिए आ चुके हैं। मेले में देश-विदेश की करीब 1200 स्टालें लगाई गई हैं। हमारे देश के बुनकर, शिल्पकार, स्वर्णकार व अन्य कारीगर कोविड के बाद आर्थिक तंगी का सामना कर रहे थे। अब देश महामारी की चपेट से बाहर आया है तो अर्थव्यवस्था भी फिर से पटरी पर लौटने लगी है। एक बार तो ऐसा लग रहा था कि सूरजकुंड मेला का आयोजन होगा या नहीं। लेकिन पर्यटन विभाग व मेला प्राधिकरण ने निश्चय किया कि यह आयोजन अवश्य किया जाए। इससे लोगों को भी थोड़ा हल्कापन महसूस होगा और वे फिर से उत्साह के साथ अपने-अपने कामों में जुट सकेंगे।

महानिदेशक अमरजीत मान ने बताया कि इसी संकल्प के साथ पहले इंग्लैंड को थीम देश बनाने का विचार किया गया था। किंतु कोविड के कारण यह बात सिरे नहीं चढ़ सकी। इस बारे में उज्बेकिस्तान से बात की गई तो वे फौरन तैयार हो गए। उनकी हामी से अंतर्राष्टï्रीय पटल पर भारत की ताकत का एहसास हुआ। इसके बाद और भी देशों ने आयोजन में शिरकत के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान की। थीम स्टेट जम्मू-कश्मीर ने भी आयोजन में बेमिसाल सहयोग देते हुए अनूठी कलाकृतियां मेला परिसर में बनाई हैं। उन्होंने कहा कि भले ही यह मेला इस बार थोड़ी देरी से शुरू हुआ है। किंतु जाते-जाते सूरजकुंड मेले का आयोजन पर्यटकों में नई ताजगी भरकर जाएगा। मेले में पर्यटकों व शिल्पकारों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए व्यापक स्तर पर इंतजाम किए गए हैं। हरियाणा प्रदेश व केंद्र स्तर के उच्चाधिकारी एवं न्यायिक अधिकारी भी मेले का अवलोकन करने के लिए आ रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि चार अप्रैल तक दस लाख से अधिक दर्शक इस मेले का अवलोकन कर लेंगे।

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