चार महीने भी नहीं चली उत्तराखंड की ‘तीरथ यात्रा’ !

देहरादून : उत्तराखंड की सियासत में फिर नाटकीय मोड़ आ गया है। एक बार फिर पहाड़ी राज्य में इतिहास ने खुद को दोहराया है और एक मुख्यमंत्री अपने तय कार्यकाल से पहले ही विदाई ले ली है। तीरथ सिंह रावत ने देर रात राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनकी तरफ से संवैधानिक संकट का हवाला देते हुए ये इस्तीफा दिया गया। वे महज 115 दिनों के लिए राज्य के सीएम बन पाए। उनका सीएम सफर जरूर कुंभ मेले से पहले शुरू हुआ लेकिन चारधाम यात्रा से पहले समाप्त भी हो गया। ऐसे में उत्तराखंड के लिए तीरथ यात्रा खत्म हो चुकी है और अब नए सीएम का स्वागत किया जाएगा।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने राज्यपाल बेबी रानी मौर्य से मुलाकात कर अपना इस्तीफा उन्हें सौंप दिया। अब शनिवार यानि आज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक दल की बैठक में वर्तमान विधायकों में से ही किसी को विधायक दल का नेता चुना जाएगा।

दिल्ली से लेकर देहरादून तक दिन भर चली मुलाकातों और बैठकों के दौर के बाद रावत ने रात करीब साढ़े ग्यारह बजे अपने मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सहयोगियों के साथ राज्यपाल से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा। इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री रावत ने संवाददाताओं को बताया कि उनके इस्तीफा देने का मुख्य कारण संवैधानिक संकट था, जिसमें निर्वाचन आयोग के लिए चुनाव कराना मुश्किल था ।

उन्होंने कहा कि संवैधानिक संकट की परिस्थितियों को देखते हुए मैंने अपना इस्तीफा देना उचित समझा। रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अपने केंद्रीय नेतृत्व का आभार व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने उन्हें उच्च पदों पर सेवा करने का मौका दिया। पौड़ी से लोकसभा सदस्य रावत ने इस वर्ष 10 मार्च को मुख्यमंत्री का पद संभाला था और संवैधानिक बाध्यता के तहत उन्हें छह माह के भीतर यानी 10 सितंबर से पहले विधानसभा का सदस्य निर्वाचित होना था।

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