मांसाहार पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया जाये !

गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 2 अप्रैल। कोरोना वायरस जैसे गंभीर रोग के कारण हरियाणा में मार्च माह के पहले सप्ताह के दौरान पोल्ट्री उधोग को बंद किया गया था परंतु प्रदेश सरकार पोल्ट्री उद्योग के कारोबारियों के भारी दबाव के आगे नतमस्तक हो गई और प्रदेश सरकार ने हरियाणा में अंडें, मीट व मछली की खुली बिक्री को कोरोना वायरस के चलते मंजूरी दे दी! हरियाणा सरकार की यह एक बेहद गंभीर लापरवाही है! हरियाणा सरकार ने जानबूझकर यह मान लिया कि अंडा व मीट प्रोटीन का सब से सस्ता साधन है! हरियाणा सरकार ने 1 अप्रैल को जारी एक आदेश में फिर से शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में नॉनवेज की बिक्री शुरू कर दी है! हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा दी गई मंजूरी को आधार बनाते हुए प्रदेश में यह आदेश लागू किये हैं!
हरियाणा सरकार का यह आदेश बहुत ही शर्मनाक है व कोरोना वायरस को बड़ी तेज गति से बढ़ाने वाला है क्यों कि हरियाणा प्रदेश के सब से बड़े साइबर सिटी गुरुग्राम में नॉनवेज, चिकन, मटन व मीट के वेस्ट कचरे के मैनेजमेंट का कोई भी सिस्टम नहीं है! कोरोना वायरस से फैलने वाले खतरनाक संक्रमण को देखते हुए गुरुग्राम में यदि मीट मांस व अंडों की खुली बिक्री की इजाजत दी जाती है तो इन का जो भी वेस्ट कचरा होगा उस वेस्ट कचरे से जबरदस्त संक्रमण फैलने का पूरा पूरा अंदेशा है! चिकन, मटन, मीट व मांस को काटते वक्त जानवरों का खून, हड्डियां व शरीर के अन्य अंगों के वेस्ट कचरे को इस वक्त कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से सफाई कर्मचारी कैसे इकठ्ठा करेंगे व कैसे इस कचरे को डिस्पोज करेंगे! क्या हरियाणा सरकार ने मीट मांस व अंडों की खुली बिक्री की कोरोना वायरस के चलते इजाजत देते वक्त इन के वेस्ट मैनेजमेंट के भी कोई नियम व मापदंड तय किये हैं? यह एक बहुत ही गंभीर सवालिया निशान हरियाणा सरकार के द्वारा पारित इस आदेश पर खड़ा हो गया है! यदि कोरोना वायरस के चलते मीट, मांस व अंडों के वेस्ट कचरे के कारण संक्रमण फैलने से मौतें होती हैं तो क्या उन मौतों के लिए हरियाणा सरकार जिम्मेवार होगी?
हरियाणा सरकार के संज्ञान में यह बात लाना बेहद जरूरी है कि गुरुग्राम में पहले से ही सफाई व्यवस्था की बहुत बुरी हालात है तो फिर इस कोरोना जैसे खतरनाक वायरस के चलते अंडें, मीट, चिकन व मटन के खतरनाक वेस्ट कचरे की सफाई व्यवस्था कैसे होगी? यह एक बेहद चिंता का विषय है!
एक बेहद चिंता का विषय और भी है कि दिनांक 22 मार्च 2020 को राष्ट्रीय समाचार पत्र दैनिक जागरण के जागरण सिटी गुरुग्राम के अंक पेज संख्या चार पर उत्तरी ब्रॉयलर ब्रीडर्स एसोसिएशन की तरफ से एक आधे पेज का विज्ञापन प्रकाशित किया गया जिसमें साफ-साफ खुले शब्दों में लिखा गया कि खूब चिकन और अंडा खायें और लिखा गया कि चिकन व अंडा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाता है! भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के द्वारा 10 फरवरी 2020 को व इंडियन वेटेरनरी एसोसिएशन के द्वारा 25 फरवरी 2020 को चिकन एवं अंडे को इम्युनिटी सिस्टम के लिए सुरक्षित मानते हुए सर्टिफिकेट जारी किये! यह एक बेहद खतरनाक साजिश है! उत्तरी भारत के अधिकांश राज्यों में नॉनवेज के वेस्ट कचरे का अभी तक सुचारु रूप से मैनेजमेंट ही नहीं है तो फिर कोरोना वायरस के चलते भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के द्वारा चिकन व अंडे को इम्यून सिस्टम के लिए अच्छा मानते हुए सर्टिफिकेट जारी कैसे कर दिये? यह भी एक सवालिया निशान है!
भारत की केंद्रीय सरकार यदि अंडें व चिकन से इम्यून सिस्टम को ठीक कर सकती है तो फिर अभी तक कोरोना वायरस के हजारों मरीजों को चिकन व अंडों का सेवन क्यों नहीं कराया गया? हमारे देश की मोदी सरकार की यह एक खतरनाक साजिश साबित होती है!
अब हम बात करते हैं अंडें, मीट मांस व मछलियों के सेवन से शरीर में पैदा होने वाले गंभीर रोगों की! जर्मनी के प्रोफेसर एगनबर्ग का निष्कर्ष है कि अंडा 51.83त्न कफ पैदा करता है और यह शरीर के पोषक तत्वों को असंतुलित कर देता है! हत्या से पहले कोई भी पशु पक्षी, मुर्गा मुर्गी या मछलियों आदि के स्वास्थ्य की जांच पूरे तरीके से नहीं की जाती और उन के शरीर में छुपी हुई बीमारियों का पता नहीं लगाया जाता! अंडें, पशु पक्षी व मछलियां भी कैंसर जैसे ट्यूमर आदि अनेक रोगों से ग्रस्त होते हैं और उनके मांस के सेवन से रोग मनुष्य में प्रवेश कर जाते हैं!
हैल्थ एजुकेशन काउंसिल के अनुसार विषाक्त भोजन से होने वाली मौतों का कारण मांसाहार ही है! मछली, अंडें व मांस आदि को प्रिजर्व करने के लिए बोरिक एसिड व विभिन्न बोरेट्स का प्रयोग होता है! यें कंपाउंड में एकत्र होकर गंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं! जब किसी जानवर की मीट व मांस के सेवन के लिए हत्या की जाती है तो उस का वध करते समय पशु या जानवर की आंखें गुस्से से लाल हो जाती हैं और मुंह में झाग आ जाते हैं! ऐसी अवस्था में उस के अंदर एक पद्वार्थ एड्रिनलिन उत्पन्न होता है जो उसके रक्तचाप को बढ़ा देता है व उस के मांस को जहरीला बना देता है! जब मनुष्य यह मांस खाता है तो उसमें भी एड्रिनलिन प्रवेश कर उसे घातक रोग की ओर धकेल देता है! जो व्यक्ति मांस या अंडें खाते हैं उनके शरीर में रिसपंटरों की संख्या में कमी हो जाती है! जिससे रक्त के अंदर कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक हो जाती है! इस से ह्रदय रोग, गुर्दे के रोग एवं पथरी जैसी बीमारियों को बढ़ावा मिलता है!
ब्रिटेन के डॉ. एम. रॉक ने एक सर्वेक्षण अभियान के बाद यह प्रतिपादित किया कि मांसाहारियों में संक्रामक और घातक बीमारियों के लक्षण ज्यादा पाये जाते हैं! बी.बी.सी. के टेलीविजन विभाग द्वारा शाकाहार पर एक साप्ताहिक कार्यक्रम द्वारा मांसाहारियों को स्पष्ट चेतावनी दी जाती रही है कि मांसाहार से आपको घातक बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है!
आज के इस वर्तमान युग में यदि कोई डॉक्टर चिकन, अंडें या चिकन सूप को स्वास्थ्य के लिए अच्छा व पौष्टिक बताये तो समझ लेना चाहिए कि उस डॉक्टर को आयुर्वेद व मैडिकल साइंस की जानकारी अधूरी है व ऐसे नौसिखिये डॉक्टर हमेशा लोगों को अपनी गलत राय से मौत के मुंह में पहुंचाने का कार्य करते हैं!



