फरीदाबाद : नेता जी सुभाष चन्द्र बोस जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित कर पराक्रम दिवस मनाया

फरीदाबाद ! राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एन एच तीन फरीदाबाद की सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड, गाइडस तथा जूनियर रेडक्रॉस प्रभारी  प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने पराक्रम दिवस पर नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की 125वीं जयंती पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। रविन्द्र कुमार मनचंदा ने बच्चों और एस एम सी अध्यक्ष श्री दिलीप को बताया कि 23 जनवरी 1897 का दिन विश्व इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। इस दिन स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक सुभाषचंद्र बोस का जन्म कटक के प्रसिद्ध वकील जानकीनाथ तथा प्रभावतीदेवी के यहां हुआ। सुभाष चन्द्र बोस महान क्रान्तिकारी और स्वतंत्रता सेनानी थे। आईसीएस की परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद सुभाष ने आईसीएस से इस्तीफा दिया। इस बात पर उनके पिता ने उनका मनोबल बढ़ाते हुए कहा – जब तुमने देशसेवा का व्रत ले ही लिया है, तो कभी इस पथ से विचलित मत होना।

जूनियर रेडक्रॉस, सैंट जॉन एम्बुलेंस अधिकारी और प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने देश के सर्वोच्च आदर्श नेता जी सुभाष चन्द्र बोस को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि अंग्रेज़ों द्वारा किए गए दमनचक्र, अत्याचारों और अन्याय के वे परम विरोधी थे। इन्होंने अपने दृढ़संकल्प पर  आज़ाद हिन्द फ़ौज का निर्माण कर उसे अंग्रेज़ों के विरूद्ध खड़ा कर दिया था। अपने देश और देशवासियों के प्रति इनके मन में अगाध श्रद्धा थी। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि एक ऐसा व्यक्तित्व जिसने अपने कार्यों से अंग्रेजी सरकार के होश छुड़ा दिये। तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा। राष्ट्रवाद, मानव जाति के उच्चतम आदर्श सत्यम्, शिवम् और सुन्दरम् से प्रेरित है। ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं। हमें अपने बलिदान और परिश्रम से जो आज़ादी मिलेगी, हमारे अन्दर उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के यही शब्द देश के नौजवानों में प्राण फूंकने वाला शब्द थे जो भारत ही नहीं विश्व के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित हैं।

अध्यापकों संजय मिश्रा और प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचंदा  ने कहा कि नेता जी का व्यक्तित्व प्रत्येक देशवासी के लिए प्रेरणा का पर्याय है उन्होंने हमें ये संदेश दिया कि विचार न मिलने से मनभेद नहीं होना चाहिए, नेता जी का गांधी जी से बहुत बार मतभेद हुआ परन्तु नेता जी ने ही जर्मनी से सर्वप्रथम उन्हें राष्ट्रपिता कह कर संबोधित किया। इसलिए हमे ऑब्जेक्टिविटी नहीं भूलनी चाहिए। नेता जी ने जय हिन्द की राष्ट्रीय नारा बना कर देश के लिए ताकत जुटाई। मनचंदा ने कहा अंग्रेजों ने भी नेता जी का लोहा माना और कहा कि नेता जी सुभाष चन्द्र बोस बहुत शीघ्र भारत को स्वतंत्रता दिलाने में सक्षम थे। आज प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचंदा, एस एम सी अध्यक्ष दिलीप, प्राध्यापिका जसनीत कौर, शिवानी, संजय मिश्रा, छात्रा सिमरन, मुस्कान, निशा, सायना, पूजा, स्वाति, निकिता, अंजुम, तारा और नेहा ने नेता जी के अविस्मरणीय योगदान और नेतृत्व के लिए उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।

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