भावांतर भरपाई योजना के तहत बागवानी किसानों के लिए यह योजना अभूतपूर्व कदम : उपायुक्त यशपाल

फरीदाबाद, 9 जुलाई। उपायुक्त यशपाल ने बताया कि जिला में भावांतर भरपाई योजना व मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के तहत बागवानी फसल किसानों को बागवानी फसलों में प्रतिकूल मौसम व प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान की भरपाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि भावांतर भरपाई योजना के तहत बागवानी किसानों के लिए यह योजना अभूतपूर्व कदम है। यह योजना किसानों को सब्जियों फलों के भाव को जोखिम मुक्त कर उन्हें फसल का उचित दाम दिलाने में कारगर साबित हो रही है। यह योजना किसानों को बागवानी की ओर प्रोत्साहित कर रही है।

सरकार द्वारा जारी हिदायतों के अनुसार भावांतर भरपाई योजना व मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के तहत 14 सब्जियों, चार फल व दो मसालों की खेतीयों को शामिल किया गया है। इसमें सब्जियों में टमाटर, प्याज, आलू, गोभी, मटर, गाजर, भिंडी, घीया, करेला, बैंग, न हरी मिर्च, शिमला मिर्च, पत्ता गोभी और मूली तथा फलों में आम, अमरुद, बेरव कीनू तथा मसालो में हल्दी व लहसुन शामिल है। उन्होंने आगे बताया कि सरकार द्वारा फल सब्जियों और मसालों पर न्यूनतम आरक्षित मूल्य की निर्धारित किया गया है।

जिला उद्यान अधिकारी डॉ रमेश कुमार ने भावांतर भरपाई योजना के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि सरकार द्वारा जारी हिदायतों के अनुसार भावांतर भरपाई योजना में फल, सब्जियों और मसालों खेती शामिल की गई है। किसानों के लिए बागवानी करने, सब्जियों और मसालों की खेती करने पर प्रतिकूल मौसम व प्राकृतिक आपदाएं इन में ओलावृष्टि, तापमान, पाला, जल के कारण बाढ़, बादल फटना, नहर व ट्रेन का टूटने से जलभराव होना, आंधी तूफान में आग लगना आदि शामिल है। जोखिमों को पूरा करने के लिए किसानों को भावांतर भरपाई योजना के तहत लाभ दिया जाता है।

जिला उद्यान अधिकारी डॉ रमेश ने बताया कि सरकार द्वारा जारी हिदायतों के अनुसार भावांतर भरपाई योजना के तहत 14 सब्जियों, चार फल व दो मसालों की खेतीयों को शामिल किया गया है। इसमें सब्जियों में टमाटर, प्याज, आलू, गोभी, मटर, गाजर, भिंडी, घीया, करेला, बैंग,न हरी मिर्च, शिमला मिर्च, पत्ता गोभी और मूली तथा फलों में आम,अमरुद,बेरव कीनू तथा मसालो में हल्दी व लहसुन शामिल है। उन्होंने आगे बताया कि सरकार द्वारा फल सब्जियों और मसालों पर न्यूनतम संरक्षित मूल्य की निर्धारित किया गया है।

डॉ रमेश ने बताया कि आलू 5 रुपये प्रति किलो, गोभी 7 रुपये 50 पैसे प्रति किलो, गाजर 7 रुपये प्रति किलो, मटर 11रुपये प्रति किलो, टमाटर 5 रुपये प्रति किलो, प्याज 6 रूपये 50 पैसे प्रति किलो, शिमला मिर्च 9 रूपये प्रति किलो, बैंगन 5 रूपये प्रति किलो भिंडी 10 रुपये 50 पैसे प्रति किलो, घीया 4रुपये 50 पैसे प्रति किलो, हरी मिर्च 9 रुपये 50 पैसे प्रति किलो, बैंगन 5 रुपये प्रति किलो, करेला 13 रूपये 50 पैसे प्रति किलो, बंद गोभी 6 रुपये 50 पैसे प्रति किलो और मूली 45 पैसे प्रति किलो की दर सरकार द्वारा निर्धारित की गई है। इसी प्रकार फलों मे कीनू 11रुपये प्रति किलो, अमरुद 13 रुपये प्रति किलो, आम 19रुपये 50 पैसे प्रति किलो, बेर 11 रुपये 50 पैसे प्रति किलो की दर संरक्षित निर्धारित की गई है। लहसुन 23 रुपये प्रति किलो और हल्दी 14 रुपये प्रति किलो संरक्षित मूल्य राशि निर्धारित की गई है।

डॉ रमेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री बागवानी योजना के तहत किसानों को अपनी फल, सब्जियों और मसालों की खेतीयों का पंजीकरण मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर आँन लाइन करना होता है। इसके लिए सब्जियों और मसालों के लिए 750 रुपये प्रति रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से बीमा योजना के तहत जमा करवाना होता है। जबकि किसानों को 30 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से लाभ मिलता है।

इसी प्रकार फलों पर सरकार द्वारा 40000 प्रति एकड़ निर्धारित किया गया है। जिसमें से 1000 प्रति एकड़ की दर से बीमा राशि किसान को जमा करवानी होती है। डॉ रमेश ने मुख्यमंत्री बागवानी योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए आगे बताया कि किसानों की फल, सब्जी व मसालों की खेती पर 26 से 100 प्रतिशत तक नुकसान होने पर अलग-अलग मदों में भरपाई योजना का लाभ दिया जाता है। उन्होंने बताया कि सब्जियों पर 26 से 51 प्रतिशत के नुकसान पर 50 प्रतिश मुआवजा यानी 15000 रुपये की धनराशि प्रति एकड़, 51 से 75 प्रतिशत के नुकसान पर 75 प्रतिश यानी 22500 रुपये की धनराशि प्रति एकड़ का मुआवजा और 75 प्रतिशत से अधिक नुकसान पर 30000 रुपये की धनराशि प्रति एकड़ का मुआवजा किसानों को दिया जाता है।

इसी प्रकार फल की खेतीयों में 26 से 51 प्रतिशत पर 20000 रुपये की धनराशि रुपये की धनराशि प्रति एकड़, 51 से 75 प्रतिश पर 30000 रुपये की धनराशि प्रति एकड़ और 75 प्रतिशत से अधिक नुकसान पर 40000 रुपये की धनराशि प्रति एकड़ किसान को मुख्यमंत्री भावांतर बागवानी बीमा योजना के तहत मुआवजा दिया जाता है।

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