नकली राष्ट्रभक्तों की खुली पोल !

गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 25 अगस्त। देश की मोदी सरकार झूठ बोलने व जनता को उल्लु बनाने में तो बहुत माहिर है परंतु यह जानकर और भी हैरानी होगी कि बेहद गंदी और घटिया राजनीति करते हुए मोदी सरकार के बहुत से सांसदों, मंत्रियों, विधायकों व नेताओं के द्वारा देश की जनता को अपनी नकली राष्ट्रभक्ति की एक महा नौटंकी के माध्यम से उल्लु बनाने की कोशिश की गई जो कि समय रहते पकड़ ली गई! नकली राष्ट्रभक्ति का मामला यह है कि 18 अगस्त 2020 को भाजपा के कुछ नेताओं, विधायकों व मंत्रियों ने सोशल मीडिया पर अपने-अपने विज्ञापन बनवाकर देश के महान क्रांतिकारी आजाद हिंद फौज के मुखिया सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु की तारीख 18 अगस्त को झूठे तौर पर पुण्य तिथि मानकर उनको श्रद्वांजलि देने का झूठा प्रयास करते हुए उस महान दिवंगत आत्मा के साथ खिलवाड़ किया! जब कि सच्चाई यह है कि देश की केंद्रीय भाजपा सरकार ने अभी तक नेता जी सुभाष चंद्र बोस के मृत्यु दिवस को कोई भी अधिकृत रूप से मान्यता नहीं दी व इस देश के इतिहास में आरएसएस व भाजपा ने कभी भी सत्ता में रहते हुए या सत्ता से बाहर रहते हुए भी केंद्र स्तर पर नेता जी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु से संबंधित लंबित मामले को निपटाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया!

अब यहां पर एक बहुत ही गंभीर सवाल उठता है कि वर्ष 2020 में ही 18 अगस्त को अचानक भाजपा नेताओं को नेता जी सुभाष चंद्र बोस के मृत्यु दिवस को पुण्य तिथी के रूप में केवल सोशल मीडिया पर अपने विज्ञापनों के माध्यम से पोस्ट लगाकर मनाने की कैसे याद आ गई? इस सारे मामले की जब खोजबीन की गई तो पाया कि यह एक बेहद गंभीर राजनैतिक साजिश है! पाठकों के ध्यानार्थ यहां पर जिक्र कर रहे हैं कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को एक हवाई दुर्घटना में निश्चित तौर पर हो गई थी! परंतु भाजपा सरकार सीधे तौर पर नेता जी की मृत्यु की जांच को लंबित रखते हुए अप्रत्यक्ष तौर पर साजिश रचते हुए नेता जी के मृत्यु दिवस को पुण्य तिथी मनाकर राजनैतिक लाभ लेना चाहती है!

इस खबर के लेखक व पत्रकार मदन लाहौरिया के पिता स्व.जुगल किशोर लाहौरिया आजाद हिंद फौज में नेता जी सुभाष चंद्र बोस के बहुत करीबी साथी थे व स्वयं लेखक एवं पत्रकार मदन लाहौरिया ने अपने पिता के क्रांतिकारी इतिहास की उनकी लिखित व्यक्तिगत डायरी पर कई वर्षों तक शोध किया है व पिछले 15 वर्षों से लगातार नेता जी सुभाष चंद्र बोस के क्रांतिकारी इतिहास पर गहरा शोध करने के बाद और रानी झांसी रेजिमेंट की अध्यक्ष स्व. लक्ष्मी सहगल की बेटी सुभाषनी अली से बातचीत के बाद निकले पुख्ता निष्कर्ष के अनुसार नेता जी सुभाष चंद्र बोस की हवाई दुर्घटना में मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ही हो गई थी! परंतु इस देश का दुर्भाग्य है कि आरएसएस व भाजपा की गहरी साजिशों के कारण नेता जी की मृत्यु के मामले को लंबित रखा गया ताकि आरएसएस व भाजपा नकली राष्ट्रभक्ति का नाटक रचते हुए नेता जी की मृत्यु पर राजनीति करते हुए इस देश की सत्ता का गंदा खेल खेल सके!

अब यहां पर चर्चा करते हैं कि 18 अगस्त 2020 को इस मामले में क्या हुआ? इस बारे में क्रम के अनुसार जिक्र करते हैं! 18 अगस्त 2020 को गुरुग्राम के भाजपा विधायक सुधीर सिंगला का एक विज्ञापन सोशल मीडिया पर नेता जी के मृत्यु दिवस पर पुण्य तिथि का लगाया गया और उसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं अजय जैन, शीतला मंडल अध्यक्ष सीता राम सिंघल, कुलभूषण भारद्वाज एडवोकेट, दीपक कटारिया एडवोकेट, युवा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनीष यादव तथा पलवल के भाजपा विधायक दीपक मंगला के विज्ञापन सोशल मीडिया पर लगे!

इस विषय में जब गुरुग्राम के भाजपा विधायक सुधीर सिंगला से बातचीत की गई तो उन्होंने माना कि यह विज्ञापन उन्हीं का है और यह भी स्वीकार किया कि देश की केंद्रीय भाजपा सरकार के द्वारा अभी तक नेता जी सुभाष चंद्र बोस के मृत्यु दिवस की अधिकृत रूप से कोई घोषणा नहीं की गई और नेता जी की मृत्यु को अभी तक मान्यता भी नहीं दी गई! इसके बाद क्रमश: जब गुरुग्राम के अन्य भाजपा नेताओं से भी जब बात की गई तो उन्होंने बड़े हैरानी भरे उत्तर दिये कि उन्होंने ने तो इस प्रकार के विज्ञापन एक दूसरे के विज्ञापन देखकर सोशल मीडिया पर लगाये यानि कि किसी भी भाजपा नेता ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि नेता जी की मृत्यु दिवस को कोई अधिकृत मान्यता दी गई है या नहीं और अंधभक्ति में अपने विज्ञापन सोशल मीडिया पर लगाते चले गये!

इसी प्रकार पलवल के भाजपा विधायक दीपक मंगला के विज्ञापन के बारे में पूछा गया तो कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला! इसके बाद जब पूरे देश स्तर पर गहरी खोजबीन की गई तो मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व पश्चिम उत्तर प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष अश्वनी त्यागी के भी विज्ञापन सोशल मीडिया पर लगे पाये गये! बिहार के बहुत से भाजपा नेताओं व सांसदों तथा राजस्थान के भी कई भाजपा नेताओं के विज्ञापन सोशल मीडिया पर पाये गये!

यहां पर यह एक बेहद गंभीर सवाल उठता है कि आरएसएस व भाजपा के द्वारा नेता जी सुभाष चंद्र बोस के मृत्यु दिवस को अप्रत्यक्ष तौर पर मानते हुए पर्दे के पीछे से एक गुप्त रूप से सुनियोजित तरीके से एक बड़ा अभियान चला कर एक गहरी राजनैतिक साजिश के तहत नेता जी की दिवंगत आत्मा के साथ गंदा खिलवाड़ क्यों किया गया? इस सारे मामले पर देश के सभी स्वतंत्रतासेनानी परिवार आरएसएस के मुखिया मोहन भागवत व देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगते हैं!

इस सारे मामले के उजागर होने के बाद जब आजाद हिंद फौज की रानी झाँसी रेजिमेंट की अध्यक्ष स्व. लक्ष्मी सहगल की बेटी सुभाषनी अली से बातचीत की गई तो उन्होंने बड़े स्पष्ट शब्दों में कहा कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु एक हवाई दुर्घटना में 18 अगस्त 1945 को हो गई थी व आजाद हिंद फौज के सभी परिवार व नेता जी तथा उनका परिवार इस मृत्यु को निश्चित तौर पर मानता है व सुभाषनी अली ने कहा कि भारत सरकार ने अभी तक नेता जी की मृत्यु को मान्यता नहीं दी व इस मामले को अभी तक लंबित रखे हुए है!

इसके बाद हरियाणा के कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री व स्वतंत्रतासेनानी परिवार से संबंधित भूपेंद्र सिंह हुड्डा से जब बातचीत की गई तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि नेता जी की मृत्यु से संबंधित मामला अभी लंबित है व उन्हें इस बात की कोई भी जानकारी नहीं है कि कोई भारत सरकार ने नेता जी सुभाष चंद्र बोस के मृत्यु दिवस को कोई पुण्य तिथी घोषित किया हो! इसके बाद फरीदाबाद से कांग्रेस नेता विजय प्रताप ने बातचीत में कहा कि भाजपा सरकार राजनैतिक लाभ उठाने के लिए नेता जी सुभाष चंद्र बोस के मृत्यु दिवस पर भ्रम फैला कर राजनैतिक रोटियां सेंकने का काम कर रही हैं!

फरीदाबाद एनआईटी से कांग्रेस विधायक नीरज शर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि नेता जी की मृत्यु से संबंधित भारत सरकार के किसी फैसले का उन्हें मालूम नहीं और साथ में यह भी कहा कि यदि भाजपा सरकार नेता जी के मृत्यु दिवस पर कोई भ्रम फैलाने का काम करती है तो वह बेहद गलत है! फरीदाबाद की तिगांव विधानसभा के पूर्व विधायक व वरिष्ठ कांग्रेस नेता ललित नागर ने भी स्पष्ट तौर पर मना किया कि भारत सरकार के द्वारा नेता जी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु पर किये गये किसी भी फैसले का उन्हें मालूम नहीं!

अंत में जब हरियाणा की भाजपा सरकार के किसान आयोग के चेयरमैन डा. रमेश यादव से इस बारे में बातचीत की गई तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि भाजपा के विधायकों व नेताओं के द्वारा नेता जी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु पर बगैर केंद्र सरकार के मान्यता दिये विज्ञापन सोशल मीडिया पर लगाना बेहद गलत है! प्रदेश के किसान आयोग के चेयरमैन डा. रमेश यादव ने बताया कि देश की केंद्रीय सरकार ने अभी तक नेता जी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु के मामले को मान्यता नहीं दी व उनका कहना है कि अभी भविष्य में ऐसा लगता भी नहीं!

प्रदेश के विश्वहिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी व कर्मठ नेता प्रद्दुम्न शर्मा ने भी स्पष्ट तौर पर कहा कि भाजपा नेताओं के द्वारा नेता जी सुभाष चंद्र बोस के मृत्यु दिवस के बारे में बिना भारत सरकार के किसी आदेश के सोशल मीडिया पर विज्ञापन लगाना बेहद गलत है!

इस प्रकार नेता जी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु पर भाजपा नेताओं के द्वारा की जा रही घटिया व गंदी राजनीति एक बेहद गंभीर अपराध है जो कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस की दिवंगत आत्मा व देश के सभी स्वतंत्रतासेनानी परिवारों के साथ एक बहुत बड़ा धोखा है!

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!