जिला भिवानी के रोहनात गांव का कुआं याद दिला रहा है जलियावाला बाग के कुएं की

- महिलाओं ने अपनी इज्जत बचाने के लिए बच्चों सहित इस कुएं में लगाई थी छलांग
- कुआं, बरगद का पेड़ बुजुर्गों पर की गई बर्बरता व शहादत के हैं मूक गवाह
सूरजकुंड (फरीदाबाद) : आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत आयोजित 35वें सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला में सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग द्वारा लगाए गई डिजिटल प्रदर्शनी मेला में आने वाले पर्यटकों को देश के स्वतंत्रता संग्राम में हरियाणा के योगदान तथा इस संग्राम से जुड़ी घटनाओं की जानकारी मिल रही है। इस प्रदर्शनी में स्वतंत्रता संग्राम में प्रदेश की भूमिका व घटनाओं की विभिन्न अभिलेखों व तस्वीरों के माध्यम से जानकारी दी गई है।
डिजिटल प्रदर्शनी में अंग्रेजों के जुल्मों की याद दिलाता जिला भिवानी के रोहनात गांव का ऐतिहासिक कुआं, बरगद का पेड़ तथा तालाब दिखाया गया है। यह कुआं ठीक जलियांवाला बाग के कुएं की याद दिलाता है, जहां पर महिलाओं ने अपनी इज्जत बचाने के लिए बच्चों सहित इस कुएं में छलांग लगा दी थी। यह कुआं और इसके पास खड़ा बरगद का पेड़ यहां के बुजुर्गों पर की गई बर्बरता एवं उनकी शहादत के मूक गवाह हैं। यह नई पीढ़ी को राष्ट्र भक्ति के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं कि हमें किसी भी समय देश पर प्राण न्यौछावर करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
जिला भिवानी के गांव रोहनात में 1857 की जनक्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंग्रेजों ने दमन चक्र शुरू किया और जनक्रांति में भाग लेने वालो को या तो फांसी दे दी गई या उन्हें गोली से उड़ा दिया गया। गांव रोहनात के सैकड़ों क्रांतिकारी शहीद हुए। अंग्रेजों ने 20 जुलाई 1958 को रोहनात गांव के तालाब की जमीन को छोडक़र बाकी सारे गांव का रकबा व अन्य सम्पत्ति नीलाम कर दी।



