ठाडे रहियो ओ बांके यार जी..सितार पर सुनी धुन तो खो गए श्रोता

  • दिल जीत लिया अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त डा. हरेंद्र शर्मा ने

सूरजकुंड : ठाडे रहियो ओ बांके यार जी..चलते चलते यूं ही कोई मिल गया था.. दिल है छोटा सा, छोटी सी आशा.. होठों से छू लो तुम, मेरा गीत अमर कर दो..सुमधुर गीतों की जब सितार के तारों से झड़ी लगी तो हर कोई सुनने वाला डा. हरेंद्र शर्मा को बार-बार दाद दे रहा था। उनके साथ संगत कर रहे तबलावादक रजनीश व बांसुरी की तान से वातावरण को मंत्रमुग्ध कर रहे श्याम थापा ने छोटी चौपाल के माहौल को और सुंदर बनाया हुआ था।

अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त मशहूर सितारवादक डा. हरेंद्र शर्मा ने छोटी चौपाल के मंच पर अपनी ऊंगलियां मासूमियत से सितार पर चलानी शुरू की। जिनकी सुमधुर धुनें सुन कर श्रोता खुद को ही भूल कुछ क्षणों के लिए परमलोक में चला गया। हरेंद्र शर्मा कालका के हैं और उस्ताद विलायत खां के शागिर्द हैं। सितारवादन में उन्होंने आज खूब श्रोताओं के दिल को लुभाया। आसपास घूम रहे पर्यटक ठिठक कर छोटी चौपाल में आकर बैठ गए। हिंदी गीतों पर डा. हरेंद्र शर्मा ने धुनें बजाना और उनको गाना शुरू किया तो श्रोता भी खुद को रोक नहीं पाए और उनके साथ गाने लगे। इस दौरान हरियाणा कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की कला अधिकारी दीपिका, रेनु हुड्डा, सुमन डांगी भी उपस्थित रहीं।

डा. हरेंद्र शर्मा ने फिल्म पाकीजा के गीतों के अलावा पंजाबी लोक गीत लो दी चादर, उस पे सलेटी रंग माहियां…का टप्पा पेश किया। इसके अलावा उन्होंने आएगा..आएगा.आएगा आने वाला, कै तेनु समझावां की…सुनाकर श्रोताओं का मन जीत लिया। छोटी चौपाल पर आज मणिपुर का श्रीकृष्ण राधा नृत्य में अपने मनमोहक अंदाज से कृष्ण व गोपियां बनी कलाकारों सफल प्रस्तुति दी। उत्तराखंड, हिमाचल के कलाकारों ने लोकगीत व नृत्य के माध्यम से अपनी देवभूमि को प्रणाम किया। फरीदाबाद राजकीय कन्या विद्यालय व लिटिल एंजेल स्कूल की छात्राओं की टीमों ने बेटी बचाओ, बेटी पढाओ तथा महिला सशक्तिकरण पर लोकनृत्य प्रस्तुत किए। मंच संचालन केयू के जनसंचार विभाग से आए प्राध्यापक डा. आबिद अली व अशरफ ने किया।

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