अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस – शिक्षा से सबल होंगी बेटियां

फरीदाबाद ! राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एन एच तीन फरीदाबाद में सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड और जूनियर रेडक्रॉस ने प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा के निर्देशानसार अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर बेटियों से आग्रह किया कि वे अच्छी प्रकार से शिक्षा ग्रहण करें क्योंकि शिक्षा से ही सभी समस्याओं को समाप्त किया जा सकता है।ब्रिगेड, जूनियर रेडक्रॉस प्रभारी और प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि यत्र नार्यस्तु पूज्यते, रमन्ते तत्र देवता; यानी जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवताओं का वास होता है। हमारी संस्कृति में सृष्टि की शुरुआत से ही महिलाओं का सम्मान किया जाता रहा है। लेकिन युग, काल और सदियां बीतने के साथ महिलाओं के प्रति लोगों की सोच बदलती चली जा रही है। बाल विवाह, दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या जैसी समस्याएं अभी भी समाज में व्याप्त है। प्रति दिन यौन शोषण, दुष्कर्म, गैंगरेप और हत्या की घटनाएं सामने आती रहती हैं। विश्वभर में बेटियों के प्रति समाज का दोहरापन दिखता है। बेटियों को आज भी शिक्षा, पोषण, चिकित्सा, मानवाधिकार और कानूनी अधिकारों से वंचित रखा जाता है। बेटियों को उनके सभी अधिकार देने और बालिका सम्मान के प्रति दुनिया को जागरूक करने के उद्देश्य से ही हर वर्ष 11 अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है।

प्रधानाचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की थीम है- “हमारी आवाज और हमारा समान भविष्य”। इस वर्ष की थीम “हमारी आवाज और हमारा समान भविष्य” का उद्देश्य समाज में ये संदेश देना है कि कैसे छोटी बालिकाएं आज पूरे विश्व को एक मार्ग दिखाने का प्रयास कर रही हैं तथा इसके अलावा विश्व भर में लड़कियों के प्रति होने वाली लैंगिक असामानताओं को समाप्त करने की दिशा में भी प्रयास करना है। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने यह भी कहा कि  अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने की प्रेरणा कनाडियाई संस्था प्लान इंटरनेशनल के बिकॉज आई एम गर्ल अभियान से मिली। इस अभियान के अन्तर्गत वैश्विक स्तर पर लड़कियों के पोषण के लिए जागरूकता फैलाई जाती है। आज आवश्यकता है कि बेटियों की परिस्थितियों  पर विचार करके इनकी भलाई की ओर सक्रिय कदम बढ़ाना। गरीबी, संघर्ष, शोषण और भेदभाव का शिकार होती बेटियों की शिक्षा और उनके सपनों को पूरा करने के लिए कदम उठाने पर ध्यान केंद्रित करना ही इसका मुख्य उद्देश्य है।

ब्रिगेड अधिकारी और जूनियर रेडक्रॉस काउन्सलर रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि बाहर ही नहीं बल्कि घर में भी बेटियां भेदभाव, घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं। अतः बेटियों को शिक्षित करना हमारा पहला दायित्व है और नैतिक अनिवार्यता भी। शिक्षा से बेटियां न सिर्फ शिक्षित होती हैं बल्कि उन का आत्मविश्वास भी उत्पन्न होता है। वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होती हैं साथ ही यह गरीबी दूर करने में भी सहायक होती है। उल्लेखनीय है कि हमारी सरकार ने भी बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए बहुत सी योजनाओं को लागू किया है, जैसे ‘बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ’  एक उल्लेखनीय योजना है। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा, शिवानी, कॉर्डिनेटर जसनीत कौर, प्रवीण और शीतू ने बालिकाओं अंजलि, शालू, ताबिंदा, नेहा, निशा तथा खुशी का बालिकाओं को पेंटिग द्वारा शिक्षा के प्रति प्रेरित करने के लिए प्रशंसा की।

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