नियमित व्यायाम व संतुलित आहार से कैंसर को हराना संभव

फरीदाबाद ! राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एन एच तीन फरीदाबाद में जूनियर रेडक्रॉस, सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड और गाइडस ने प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस पर वर्चुअल कार्यक्रम का आयोजन किया। ब्रिगेड अधिकारी व प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस 7 नवंबर को भारत में कैंसर इसके लक्षणों और उपचार के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है।
राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस की घोषणा पहली बार सितंबर 2014 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने की थी। पहली बार इसे वर्ष 2014 में मनाया गया था। यह दिन भौतिकी में 1903 के नोबेल पुरस्कार के विजेता मैरी स्कोलोडोवस्का क्यूरी की जयंती के साथ मनाया जाता है। इस की जागरूकता का उद्देश्य कैंसर के शुरुआती चरणों में ही इसका पता लगाने और उसका समय पर उपचार करने पर केंद्रित है।
प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने बताया कि विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर को कोशिकाओं के अप्रतिबंधित बहिर्वाह के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। विशिष्ट कोशिकाएं एक गांठ को जन्म देते हुए विभाजित और गुणा करना शुरू करती हैं। कैंसर सौ से अधिक प्रकार के होते हैं। जब शरीर में कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि होती है तो इससे कैंसर होता है और अन्य ऊतकों पर भी आक्रमण करता है। यह शरीर के लगभग किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है। सबसे महत्वपूर्ण है कि शुरुआत में ही कैंसर को डायग्नोस कर लिया जाए। लेकिन जब तक प्रभावी तरीके से हम यह नहीं बता सकते हैं कि हर प्रकार के कैंसर का कारण क्या होता है, तब तक हम सबसे आम लक्षणों को समझने की कोशिश कर सकते हैं। अगर हम हमारे शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलाव पर ध्यान देंगे तो कैंसर को लक्षणों को पहचान सकेंगे। यहां ऐसे ही संकेतों के बारे में बताया है जो शरीर हमें देता है।
ब्रिगेड और जूनियर रेडक्रॉस प्रभारी और प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि ज्यादातर मामलों में, कैंसर के मामलों का अंत चरण में निदान किया जाता है, जिससे रोगी के बचने की संभावना कम हो जाती है। भारत में, यह अनुमान लगाया गया है कि भारत में हर 8 मिनट में एक महिला की मृत्यु सर्वाइकल कैंसर से होती है। 2018 में पुरुषों और महिलाओं के बीच तंबाकू के उपयोग के कारण 3,17,928 मौतें हुईं। एक अध्ययन के अनुसार पुरुषों में मौखिक गुहा और फेफड़ों के कैंसर में 25% से अधिक मौतें होती हैं, और महिलाओं में स्तन और मौखिक गुहा के कैंसर में मृत्यु का 25% हिस्सा होता है।
प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि उचित दिनचर्या, संतुलित और मौसम अनुकूल आहार, व्यायाम, योग और नियमित चिकित्सीय परीक्षण द्वारा कैंसर से बचाव और उपचार संभव है। उन्होंने बताया कि बदलती जीवन शैली और वायु, जल एवम् पर्यावरण प्रदूषण के कारण कैंसर जैसी भयंकर बीमारियां दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही हैं। सकारात्मक सोच और समय रहते निदान द्वारा निश्चित ही कैंसर जैसी बीमारी के इलाज पर विजय प्राप्त हो सकती है। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा और प्राध्यापिका पूनम एवम् छात्राओं हर्षिता, निशा, तबिंदा, चंचल यादव तथा गुलबहार ने पोस्टर द्वारा कैंसर से जागरूक किया।



