विश्व एड्स दिवस : एड्स पीड़ितों के पुनर्वास में करे सहायता

फरीदाबाद ! राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एन एच तीन फरीदाबाद की जूनियर रेडक्रॉस, गाइडस और सैंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड ने प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा की अध्यक्षता में विश्व एड्स दिवस पर एड्स पीड़ितों की सहायता के लिए आगे बढ़ कर सहायता करने का आह्वान किया। एन एच तीन फरीदाबाद कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि एड्स एक ऐसी बीमारी है जिसमें इंसान की संक्रमण से लड़ने की शरीर की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। इतने वर्षों बाद भी अबतक एड्स का कोई प्रभावी इलाज नहीं है।

इस बार की थीम एचआईवी महामारी समाप्त करना लचीलापन और प्रभाव रखी गई है। प्रतिवर्ष विश्व एड्स दिवस पूरे विश्व में 1 दिसम्बर को लोगों को एड्स के बारे में जागरुक करने के लिये मनाया जाता है। एड्स ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी एचआईवी वायरस के संक्रमण के कारण होने वाला महामारी का रोग है। प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने बताया कि विश्व एड्स दिवस की पहली बार कल्पना 1987 में अगस्त के महीने में थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न द्वारा की गई थी। थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न दोनों डब्ल्यू एच ओ, विश्व स्वास्थ्य संगठन जिनेवा स्विट्जरलैंड के एड्स ग्लोबल कार्यक्रम के लिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी थे। वर्ष 1988 में 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस के रुप में मनाना शुरु कर दिया। उनके द्वारा हर साल 1 दिसम्बर को सही रुप में विश्व एड्स दिवस के रुप में मनाने का निर्णय लिया गया।

ब्रिगेड और जूनियर रेडक्रॉस प्रभारी और प्राचार्य रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने कहा कि एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति में निम्न प्रकार के लक्षण पाएं जाते हैं जैसे गले में खराश, वजन घटना, बुखार, थकान, दुर्बलता, जोड़ो और मांसपेशियों में दर्द आदि। मनचन्दा ने बताया कि यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार अब तक तीन करोड़ उन्हत्तर लाख से ज्यादा लोग एच आई वी के शिकार हो चुके हैं जबकि भारत सरकार द्वारा जारी किए गए आकड़ों के अनुसार भारत में एचआईवी के रोगियों की संख्या लगभग सत्ताइस लाख के आसपास है। उन्होंने कहा कि सब से अधिक आवश्यकता यह है कि एड्स पीड़ितों का तिरस्कार अथवा सामाजिक बहिष्कार न करें बल्कि उन्हें सपोर्ट करें, उन के पुनर्वास में आर्थिक और सामाजिक रूप से सहायता करें, इस प्रकार से उन्हें मनोवैज्ञानिक आश्रय मिलेगा और उन में रोग से लड़ने की ताकत मिलेगी। आज ऑनलाइन कार्यक्रम में प्राध्यापिका जसनीत कौर, छात्रा गुलबहार, ताविंदा, हर्षिता, खुशी, नेहा और निशा ने कोरोना काल में एड्स महामारी से सावधान रहने और एड्स पीड़ितों के पुनर्वास में सभी को सहायता करने के लिए आगे आने का आग्रह किया।

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