34वां अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला हिमाचली संस्कृति के रंग में रंग गया

फरीदाबाद 1 फरवरी। 34वां अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला हिमाचली संस्कृति के रंग में रंग गया है। 24 साल बाद सूरजकुंड मेले में हिमाचल को थीम राज्य चुना गया है। इससे पहले 1996 में प्रदेश का चयन हुआ था। 24 साल बाद मिली इस बड़ी जिम्मेवारी को निभाने के लिए हिमाचल सरकार ने भरपूर तैयारियां की हैं। सूरजकुंड मेले में रंगीन हिमाचली टोपी, शॉल और लकड़ी की कलाकृतियां पर्यटकों को विशेष तौर पर आकर्षित करेंगी। मेले में हिमाचल की ओर से 70 हट्स लगाए गए हैं। इन हट्स के माध्यम से प्रदेश की हस्तकला, संस्कृति और शिल्पकला का प्रदर्शन किया जा रहा है। पर्यटन निदेशक यूनुस ने बताया कि मेले के सफल आयोजन के लिए नोडल अधिकारी तत्परता से लगे हुए हैं।

पूरा मेला हिमाचली रंग में रंगा हुआ दिखेगा। प्रदेश के मुख्य पर्यटन स्थलों के दर्शन दिल्ली से ही देश-दुनिया के लोगों को करवाने के प्रयास किया गया है। हिमाचल की पहचान दुनिया भर में अपने पर्यटन स्थलों के लिए है। शिमला, मनाली, मैक्लोडगंज, कसौली, डलहौजी, कुल्लू सहित अन्य मुख्य पर्यटक स्थलों को मेले में विभिन्न कलाओं के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।

एक से 16 फरवरी तक मेला चलेगा। मेले को हिमाचली रूप देने के लिए प्रदेश के साज सजावट के लोगों ने बखूबी काम किया है। इसके अलावा मेले में हिमाचल की लोक संस्कृति का भी लोग आनन्द उठा रहे हैं। हिमाचली खानपान से लोगों को अवगत करवाने के लिए विशेष फूड स्टाल लगाए गए हैं और लोग खानपान का खूब आनन्द उठा रहे हैं।

पर्यटन और नागरिक उड्डयन विभाग के निदेशक यूनुस ने कहा कि पर्यटन विभाग प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से राज्य को पर्यटन के दृष्टिकोण से प्रचारित कर रहा है। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री एक फरवरी को सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेले के उद्घाटन अवसर पर 16 फरवरी को समापन अवसर पर प्रदेश के राज्यपाल कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे।

थीम स्टेट के रूप में मेला मैदान में पहाड़ी वास्तुकला के एक स्थाई द्वार और भीमाकाली मंदिर सराहन के स्थाई स्मारक का निर्माण किया है। साक्य टंगयुद मठ स्पीति, चंबा मिलेनियम गेट, छिन्न मस्तिका, शक्तिपीठ चिंतपूर्णी, चिंडी माता गेट करसोग और ज्वालामुखी मंदिर गेट की शैली में शिल्प मेला मैदान के प्रत्येक प्रवेश स्थल पर पांच द्वार और पारंपरिक शैली में एक अपना घर भी स्थापित किया है। प्रदेश के अछुते पर्यटन स्थलों को प्रदर्शित करने के लिए एक सूचना केंद्र भी स्थापित किया गया है।

सूरजकुंड मेले में प्रदेश की देव संस्कृति की झलक भी देखने को मिलेगी। मेले के लिए पर्यटन विभाग ने चार बजंतरी दलों का चयन किया है। बजंतरी रोजाना ढोल, नगाड़ों से हिमाचल की देव संस्कृति से लोगों को अवगत करवाएंगे। सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला 1 फरवरी से शुरू होकर 16 फरवरी तक चलेगा। मेले के दौरान डिजाइनर रितु बेरी के बनाए हिमाचली परिधानों में कैटवॉक होगा। 9 फरवरी को होने वाले फैशन शो में हिमाचली युवा मॉडलिंग करेंगे। प्रदेश के सभी जिलों के परिधानों को फैशन शो में शामिल किया जाएगा। डिजाइनर रितु बेरी हिमाचल के साथ-साथ हरियाणा और उज्जबेकिस्तान के परिधानों को भी फैशन शो के माध्यम से प्रदर्शित करेगी। हिमाचली परिधान अनफॉरगेटेबल हिमाचल विषय पर आधारित होंगे।

हर शाम चौपाल पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम : यूनुस
पर्यटन विभाग के निदेशक यूनुस ने बताया कि मेले के दौरान दर्शकों को प्रदेश की उत्कृष्ट कारीगरी का नमूना देखने को मिल रहा है। मेले में हर शाम चौपाल पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मचेगी। दिनभर देश विदेश के कलाकार जहां चौपाल पर प्रस्तुति देंगे, वहीं शाम को हिमाचल प्रदेश की ओर से लाइट एंड साउंड शो होगा।

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