डा. बिस्वरूप रॉय चौधरी की ‘द लास्ट 4 मिनट्स’ पुस्तक का विमोचन

फरीदाबाद : डा. बिस्वरूप रॉय चौधरी ने क्लीनिक डेथ से जुड़ी अपनी सनसनीखेज पुस्तक द लास्ट 4 मिनट्स का एक होटल में विमोचन किया। इंडो-वियतनाम मेडिकल बोर्ड के साथ इस कार्यक्रम का आयोजन जाने-माने उद्यमी मानस सर्माि, मुनेश पंडित व सुमित गुप्ता द्वारा किया गया। कार्यक्रम में समाजसेवी वरुण श्योकंद भी शामिल हुए।

इस मौके पर लेखक डा. चौधरी ने पुस्तक की विशेषता को समेटते हुए कहा कि जब एक व्यक्ति की मृत्ये हो जाती है तो अवेयर दो की स्टडी के मुताबिक यह वास्तविक अर्थों में मृत्यु नहीं है। पहले दस मिनट बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। यह अस्थायी मृत्यु होती है और इसे नाड़ी, श्वास और कोई गति नहीं होने पर मृत्यु के परिवर्तनकारी अनुभव के रूप में जाना जाता है। शरीर की कोशिकाएं तुरंत मृृत नहीं होती हैं। कोशिकाओं को उनके लिए सभी प्रकार के भोजन उपलब्ध होते हैं—यह ऑक्सीजन या पोषण हैं। मस्तिष्क की कोशिकाएं चार मिनट तक जीवित रहती हैं और इन मिनटों को ग्रे जोन के रूप में जाना जाता है। ग्रे जोन अनिश्चित है। यह इन चार मिनटों में ही है, आपके पास एक जीवन वापस लाने का मौका होता है।

डा. चौधरी ने आगे बताया कि सीपीआर-कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन के रूप में जानी जाने वाली आमतौर पर निष्पादित प्रक्रिया की सीमाओं को उजागर करने का अवसर भी चिकित्सकीय रूप से मृत रोगियों पर और कार्डियक कम्प्रेशन नामक एक बेहतर और साक्ष्य आधारित पद्धति से दर्शकों को प्रशिक्षित भी किया है।

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