धैर्य और समर्पण से मिली सफलता – सराय ख्वाजा के विद्यार्थियों ने वैज्ञानिकों को किया नमन

फरीदाबाद : गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सराय ख्वाजा फरीदाबाद में प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा की अध्यक्षता में जूनियर रेडक्रॉस, स्काउट्स गाइड्स और सैंट जॉन एंबुलेंस ब्रिगेड प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों, अध्यापकों और प्राचार्य ने चंद्रयान 3 की अद्वितीय सफलता के पीछे भारत के वैज्ञानिकों के अथक प्रयासों, निरंतर परिश्रम एवं देश के शीर्ष नेतृत्व को नमन करते हुए बधाइयां दी और सभी विद्यार्थियों एवम स्टाफ सदस्यों को अवगत करवाया।

 

विद्यालय की जूनियर रेडक्रॉस और सैंट जॉन एंबुलेंस ब्रिगेड अधिकारी प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने बताया कि बारहवीं विज्ञान के मॉनिटर्स, छात्राओं, हिंदी प्राध्यापक दिलबाग, अंग्रेजी प्राध्यापक ललित, गणित प्राध्यापक रविंद्र, अध्यापिका सोनिया ने चंद्रयान 3 की सफलता के लिए देश के शीर्ष वैज्ञानिकों, इसरो की टीम के सभी वैज्ञानिकों, डॉक्टर एस सोमनाथ, सुधांशु तथा परोक्ष रूप से लगे सभी टेक्नीशियंस एवम कर्मचारियों की प्रशंसा करते हुए नमन किया। विद्यालय के छात्र छात्राओं ने मिशन चंद्रयान 3 के उद्देश्यों तथा इस से होने वाले लाभ और उपयोग से भी विस्तार से अवगत करवाया। अध्यापिका सोनिया और छात्राओं ने कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र को प्रोत्‍साहन मिलेगा। इस क्षेत्र में अधिक स्टार्टअप के बढ़ने की संभावना है। देश में कई नए स्टार्टअप स्थापित हो सकते हैं! इसके साथ ही इस क्षेत्र से जुड़े जो स्‍टार्टअप पहले से प्रारंभ हो चुके हैं उन्‍हें अब बेहतर फंडिंग मिलने की संभावना बढ़ेगी।

प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने कहा कि संपूर्ण विश्व का ध्यान चंद्रयान-3 पर टिका थी। इस सफलता के साथ ही भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करने वाला पहला देश बन गया है। चंद्रयान 3 की सफलता के साथ ही हमारा देश सॉफट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन गया है। इससे पूर्व रूस, चीन और अमेरिका ने चंद्रमा पर सॉफ़्ट लैंडिंग की है। परंतु इन सबका काम भूमध्यरेखीय क्षेत्र में था विक्रम लैंडर ने दक्षिणी ध्रुव के निकट सॉफ़्ट लैंडिंग की है जो भारत के लिए बहुत गर्व की बात है। प्राचार्य मनचंदा ने कहा कि चंद्रयान 3 की चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग के बाद अब रोवर मॉड्यूल इसरो के वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए 14 दिवसीय कार्य शुरू करेगा। उसके विभिन्न कार्यों में चंद्रमा की सतह के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए वहां प्रयोग करना भी सम्मिलित है। लैंडर और रोवर दोनों का जीवन काल एक एक चंद्र दिवस है जो पृथ्वी के 14 दिन के समान है। प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने सभी अध्यापकों और विद्यार्थियों के साथ देश के सभी कर्णधारों को नमन करते हुए कहा कि यह भारत के एक सौ चालीस करोड़ देशवासियों के धैर्य, समर्पण और आत्मविश्वास की विजय है।

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