फरीदाबाद के उद्योगपतियों ने बिजली दरों पर जताई आपत्ति, मेन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने सरकार से की हस्तक्षेप की मांग

फरीदाबाद : हरियाणा के प्रमुख औद्योगिक शहर फरीदाबाद के उद्यमियों ने राज्य में बढ़ती बिजली दरों और नीति असमानताओं को लेकर कड़ा ऐतराज़ जताया है। इस संबंध में मेन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन फरीदाबाद (MAF) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर राज्य सरकार और बिजली विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
एसोसिएशन ने मांग की है कि गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे औद्योगिक रूप से उन्नत राज्यों की तर्ज पर हरियाणा में भी बिजली की दरों, व्यवस्थाओं और नीतियों का गहन विश्लेषण किया जाए। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति के गठन की मांग की गई है, जो इन राज्यों की बिजली व्यवस्था का अध्ययन कर हरियाणा के उद्योगों के लिए भी समान और सुविधाजनक नीतियां तैयार करे।
प्रेस विज्ञप्ति में चार मुख्य मांगों को प्रमुखता से उठाया गया है:
1. फिक्स चार्ज को वापस लिया जाए।
2. बिजली की यूनिट दरों को व्यावसायिक दृष्टिकोण से उचित स्तर पर लाया जाए।
3. ट्रांसमिशन से संबंधित नीतियों में राहत दी जाए।
4. एक उच्चस्तरीय समिति का गठन कर बिजली नीतियों की समीक्षा की जाए।
एसोसिएशन के महासचिव रमनीक प्रभाकर द्वारा हस्ताक्षरित इस बयान में कहा गया है कि हरियाणा के उद्योगों को भी वही सहूलियत मिलनी चाहिए जो अन्य अग्रणी राज्यों में दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि “यदि बिजली दरों में जल्द सुधार नहीं किया गया, तो राज्य के उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।”
प्रेस विज्ञप्ति की एक प्रति माननीय मुख्यमंत्री, हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ को भी भेजी गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामला केवल फरीदाबाद तक सीमित नहीं, बल्कि राज्य की औद्योगिक नीति से जुड़ा हुआ है।
मेन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन का यह भी कहना है कि फिक्स्ड चार्ज और महंगी दरों के चलते उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ रही है, जिससे वे अन्य राज्यों के मुकाबले पिछड़ रहे हैं। संगठन ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द ठोस नीति-निर्णय की मांग की है।
फरीदाबाद एक पुराना और अहम औद्योगिक क्षेत्र है, जहां हजारों लघु, मध्यम और बड़े उद्योग कार्यरत हैं। बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता और दरें, इन उद्योगों की कार्यक्षमता और टिकाऊ विकास में अहम भूमिका निभाती हैं।
उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार इस मुद्दे पर संज्ञान लेकर शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लेगी, जिससे हरियाणा की औद्योगिक प्रगति को नया बल मिलेगा।



