आपातकाल लोकतंत्र का काला अध्याय, लेकिन इसी ने जनता को लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति का एहसास कराया: मनोहर लाल

  • लोकतंत्र रक्षा सेनानियों के संघर्ष ने बचाई लोकतांत्रिक व्यवस्था, आपातकाल से मिली बड़ी सीख : मनोहर लाल
  • 1975 में आपातकाल लगाकर कांग्रेस ने की लोकतंत्र और संविधान की निर्मम हत्या : मनोहर लाल
  • कांग्रेस ने संविधान को पैरों तले कुचलने का किया घोर पाप: मनोहर लाल
  • आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर “लोकतंत्र रक्षा सेनानियों का सम्मान कार्यक्रम का आयोजन

फरीदाबाद : केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री व हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि “25 जून 1975 की रात देश के लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला हुआ। उस रात सत्ता की लालसा में कांग्रेस ने भारत के संविधान और लोकतंत्र की निर्मम हत्या की थी। आपातकाल का वो काला अध्याय आज भी लोकतंत्र प्रेमियों की रूह को कंपा देता है। 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, संवैधानिक मूल्यों और नागरिक स्वतंत्रताओं को गहरा आघात पहुंचाया था। प्रेस पर सेंसरशिप, नागरिक अधिकारों का हनन, लाखों गिरफ्तारियाँ और अत्याचार यह सब संविधान की मूल आत्मा के खिलाफ था। उन्होंने कहा कि उस दौर को याद रखना इसलिए आवश्यक है ताकि आने वाली पीढ़ियां लोकतंत्र के महत्व को समझ सकें और संविधान की रक्षा के प्रति सजग रहें।

कांग्रेस द्वारा लगाये गए आपातकाल के काले अध्याय का 51वाँ वर्ष पूर्ण होने पर फरीदाबाद के सेक्टर-12 स्थित सेंट्रल पार्क में “संविधान हत्या दिवस” के तहत लोकतंत्र रक्षा सेनानियों का सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल मुख्य वक्ता और केन्द्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर के तौर पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में हरियाणा के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल, कार्यक्रम संयोजक धनेश अदलखा, जिला अध्यक्ष पंकज पूजन रामपाल, विधायक सतीश फागना, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं विधायक मूलचंद शर्मा, मुख्यमंत्री के राजनैतिक सचिव अजय गौड़, महापौर प्रवीण बत्रा जोशी, राष्ट्रीय परिषद् सदस्य संदीप जोशी, प्रदेश प्रशिक्षण प्रमुख दीपक मंगला, भारत विकास परिषद् राजकुमार अग्रवाल, जिला प्रभारी नरेंद्र वत्स मुख्य तौर पर उपस्थित रहे ।

इस अवसर पर आपातकाल के दौरान मीसा के तहत बंदी बनाए गए एवं यातना सहने करने वाले लोकतंत्र सेनानी व उनके परिवार के सदस्य मौजूद रहे । लोकतंत्र रक्षा सेनानी जगराम गुप्ता, महावीर भारद्वाज, उत्तम राज, सोहन लाल गोगिया, कृष्ण मुखी, महावीर भरद्वाज, सुनील ग्रोवर, रवि भूषण खत्री, अरविन्द सूद ने अपने अनुभव साँझा किये। मंच संचालन पूर्व जिला महामंत्री मूलचंद मित्तल ने किया। केंद्रीय ऊर्जा तथा शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल और केंद्रीय राज्य मंत्री चौधरी कृष्णपाल गुर्जर ने लोकतंत्र रक्षा सेनानियों को प्रशस्ति पत्र भेंट किए और उनके परिवारों का शाल ओढाकर सम्मान किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मनोहर लाल ने कहा कि कार्यक्रम में ऐसे अनेक लोग उपस्थित हैं जिन्होंने आपातकाल की यातनाएं स्वयं झेली हैं तथा जेल गए थे। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जिन लोगों ने आपातकाल का दौर नहीं देखा, उनके लिए उस कालखंड को समझना और उससे सीख लेना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि आपातकाल का एक ऐसा पहलू भी है जिसने देश की जनता को लोकतंत्र की वास्तविक ताकत का अनुभव कराया। उस समय आम लोगों के मन में यह धारणा बन गई थी कि देश में केवल कांग्रेस ही शासन कर सकती है। लेकिन आपातकाल के विरोध में जनता का आक्रोश इतना बढ़ा कि 1977 के आम चुनाव में पहली बार केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार बनी। इससे देशवासियों को यह विश्वास मिला कि लोकतंत्र में अंतिम शक्ति जनता के पास होती है और वह किसी भी सरकार को बदल सकती है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आपातकाल के दौरान लाखों लोकतंत्र सेनानियों ने संघर्ष किया। सत्याग्रह और जनआंदोलनों के माध्यम से लोकतंत्र की रक्षा के लिए विभिन्न संगठनों एवं विचारधाराओं के लोगों ने एकजुट होकर आवाज उठाई। लोकनायक जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, जॉर्ज फर्नांडिस सहित अनेक नेताओं ने लोकतांत्रिक अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मनोहर लाल ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले और उसके बाद उत्पन्न राजनीतिक परिस्थितियों के बीच तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने आपातकाल लागू किया। इंदिरा गांधी ने सत्ता बचाने के लिए संविधान में संशोधन किए तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास हुआ। उन्होंने कहा कि उस समय सत्ता का अहंकार इतना बढ़ गया था कि इंदिरा इज़ इंडिया जैसे नारे दिए जाने लगे थे।

मनोहर लाल ने कहा कि आपातकाल के दौरान लोगों की जबरन उठाकर नसबंदी की गई, वह लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय है। उस समय बड़े पैमाने पर भय और दमन का माहौल था। यह एक ऐसा समय था जब प्रशासनिक शक्ति का दुरुपयोग अपने चरम पर था। मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन हुआ। अनेक लोगों को जेल में डाल दिया और यातनाएं दी। उन्होंने कहा कि ऐसे अनुभव सुनकर आज भी मन विचलित हो जाता है कि अपने ही स्वतंत्र देश में ऐसा समय भी आया था। इसीलिए आज इन घटनाओं को याद करना आवश्यक है। लोकतंत्र की रक्षा के प्रति हम सजग रहें और भविष्य में ऐसी परिस्थितियाँ दोबारा न उत्पन्न हों। यह केवल इतिहास नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक चेतावनी भी है।

मनोहर लाल ने कहा कि इंदिरा गांधी ने उस समय मीडिया पर भी कठोर नियंत्रण था। अख़बारों पर सेंसरशिप लागू कर दी। उस कठिन समय में कुछ लोग छिपकर लोकतंत्र की रक्षा और जनजागरण के कार्य में लगे रहे। वे संदेशों और प्रकाशनों के माध्यम से लोगों तक सच्चाई पहुँचाने का प्रयास करते थे। यह संघर्ष लोकतंत्र को जीवित रखने की एक महत्वपूर्ण कड़ी था।

मनोहर लाल ने कहा कि बाद में जब परिस्थितियाँ बदलीं और चुनाव हुए, तो जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से अपना निर्णय दिया और नई राजनीतिक दिशा का निर्माण हुआ। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। इसकी रक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक की भी जिम्मेदारी है।

मनोहर लाल ने कहा कि लोगों को लोकतंत्र का अर्थ समझाना और उसका एहसास कराना जरूरी है। लोकतंत्र के सबसे मजबूत स्तंभ संविधान, स्वतंत्र न्यायपालिका, स्वतंत्र प्रेस, सक्रिय समाज और जागरूक नागरिक हैं, जिन्हें किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा का भी नाम है। आपातकाल की घटनाएं हमें यह संदेश देती हैं कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए समाज को सदैव जागरूक और सक्रिय रहना चाहिए।

25 जून 1975 लोकतंत्र पर लगा काला धब्बा, जिसे इतिहास कभी नहीं भुला सकता : कृष्णपाल गुर्जर

मुख्य वक्ता केन्द्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि 25 जून भारत के लोकतांत्रिक इतिहास की कोई सामान्य तिथि नहीं है। यह वह दिन है जब सत्ता के अहंकार ने संविधान की आत्मा को चुनौती दी और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने का प्रयास किया गया। 25 जून 1975 की रात केवल आपातकाल की घोषणा नहीं थी, बल्कि नागरिक स्वतंत्रताओं, अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगाया गया एक कठोर प्रतिबंध था।

उन्होंने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर लगा ऐसा काला अध्याय है जिसे इतिहास कभी भुला नहीं सकता। विपक्षी नेताओं, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और हजारों नागरिकों को केवल इसलिए जेलों में डाल दिया गया क्योंकि उन्होंने सत्ता के विरुद्ध आवाज उठाने का साहस किया था।

कृष्णपाल गुर्जर ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत रहता है जब सत्ता स्वयं को संविधान से ऊपर न समझे। दुर्भाग्यवश, सत्ता बचाने के लिए उस समय पूरे देश को आपातकाल की आग में झोंक दिया गया। यह कांग्रेस की एक ऐसी मानसिकता का परिणाम था जो लोकतंत्र को परिवारवाद और सत्ता-केंद्रित राजनीति के अधीन मानती थी।

श्री गुर्जर ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि आपातकाल लगाने वाली कांग्रेस ने इस काले अध्याय पर आज तक कोई गंभीर आत्ममंथन नहीं किया। शब्दों में लोकतंत्र, हाथों में संविधान की प्रति और भाषणों में स्वतंत्रता की बातें तब तक अधूरी हैं, जब तक संविधान के प्रति वास्तविक सम्मान व्यवहार में दिखाई न दे। संविधान को हाथ में लेकर चलना आसान है, लेकिन उसे हृदय में बसाना कठिन है।

श्री गुर्जर ने कहा कि आज का भारत आकांक्षाओं, अवसरों और जनभागीदारी का भारत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकतंत्र को जनकल्याण और सुशासन का माध्यम बनाया गया है। सरकार की योजनाओं ने गरीब, किसान, महिला और युवा को सशक्त बनाने का कार्य किया है।

उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि 25 जून केवल अतीत को याद करने का दिन नहीं, बल्कि यह संकल्प लेने का अवसर है कि भारत में फिर कभी लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों पर ऐसा हमला नहीं होने दिया जाएगा। लोकतंत्र की रक्षा ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है।

कांग्रेस ने न कभी जनादेश का सम्मान किया, न विपक्ष की गरिमा बनाए रखी: पंकज पूजन रामपाल

जिला अध्यक्ष पंकज पूजन रामपाल ने कहाः “25 जून 1975 को कांग्रेस द्वारा लगाया गया आपातकाल देश के इतिहास का एक काला अध्याय है । आज कांग्रेस के नेता लोकतंत्र की बातें करते हैं, पर देश उन्हें कभी माफ नहीं करेगा।” आज भी कांग्रेस का वाही तानाशाही रवैया है। न्याय पालिका में हस्तक्षेप, ’फ्री स्पीच’ के नाम पर अराजकता और मीडिया ट्रायल को बढ़ावा देकर कांग्रेस आज नए तरीकों से वही आपातकाल लागू करना चाहती है। जब-जब कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया गया है, उसने न जनादेश का सम्मान किया है, न विपक्ष की गरिमा बनाए रखी है।

इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता बचाने के लिए संविधान को कुचलने और संविधान की आत्मा की हत्या करने का काम किया : धनेश अदलखा

कार्यक्रम संयोजक धनेश अदलखा ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता बचाने के लिए संविधान को कुचलने और संविधान की आत्मा की हत्या की। उन्होंने कहा कि भाजपा 25 जून को संविधान की हत्या दिवस के रूप में मना रही है। उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ता युवा पीढ़ी को कांग्रेस के काले इतिहास की जानकारी जरूर दें।

इस अवसर पर संजय अरोड़ा, पूर्व विधायक टेक चन्द शर्मा, जिला परिषद् चेयरमैन विजय लोहिया, वरिष्ठ भाजपा नेता टिपर चन्द शर्मा, पूर्व जिला महामंत्री मूल चन्द मित्तल, आर एन सिंह, ओम प्रकाश रक्षवाल पूर्व महिला आयोग चेयर पर्सन रेनू भाटिया, पूर्व महामंत्री मूलचंद मित्तल, पूर्व महापौर सुमन बाला, आर. एन. सिंह, जिला महामंत्री शोभित अरोड़ा, चौधरी प्रवीण गर्ग, वजीर सिंह डागर, संघ चालक अरविंद सूद और काफी संख्या में आपत्काल सेनानी एवं जन प्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी, लोकतंत्र सेनानी, उनके परिजन सहित बड़ी संख्या में सहित भाजपा के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता, उद्योगपति, धार्मिक सामाजिक संस्थाओं के सदस्य, फरीदाबाद के वरिष्ठ बुद्धिजीवी एवं प्रबुद्ध जन गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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