जे.सी. बोस विश्वविद्यालय में यूएवी प्रशिक्षण कार्यक्रम का प्रथम चरण सम्पन्न, कुलगुरु ने ड्रोन तकनीक में स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास पर दिया बल

फरीदाबाद, 23 जुलाई : जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद में विशेषीकृत यूएवी एवं एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम चरण के सफल समापन पर प्रमाण-पत्र वितरण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का प्रथम चरण यूएवी एवं ड्रोन प्रशिक्षण पर केंद्रित रहा। यह विश्वविद्यालय द्वारा संचालित तीन चरणों वाले उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम की पहली महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसमें यूएवी एवं ड्रोन प्रशिक्षण, टेथर्ड ड्रोन प्रशिक्षण तथा एंटी-ड्रोन प्रशिक्षण शामिल हैं।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार, कुलसचिव प्रो. अजय रँगा तथा प्रो. मुनीश वशिष्ठ, अधिष्ठाता संस्थान एवं अध्यक्ष, इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग उपस्थित रहे।
प्रतिभागियों से संवाद करते हुए कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के उत्साह की सराहना की और उन्हें स्वदेशी ड्रोन तकनीकों के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विशेष रूप से स्वदेशी ड्रोन कंट्रोलर तथा अन्य महत्वपूर्ण घटकों के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया, जिनके लिए वर्तमान में भारत को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि तेजी से विकसित हो रहा ड्रोन तकनीक का क्षेत्र युवा नवोन्मेषकों और शोधकर्ताओं के लिए व्यापक अवसर प्रदान करता है। इस क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकों का विकास भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने तथा रणनीतिक क्षेत्र में देश की क्षमताओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
कुलगुरु ने प्रतिभागियों का आह्वान किया कि वे नवाचार आधारित विचारों को आगे बढ़ाएं तथा ऐसे अनुसंधान कार्य करें, जिनसे ड्रोन और रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्वदेशी समाधान विकसित किए जा सकें। उन्होंने कहा कि उभरते हुए रणनीतिक तकनीकी क्षेत्रों में कुशल मानव संसाधन तैयार करने और नई तकनीकों के विकास को बढ़ावा देने में शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कुलसचिव प्रो. अजय रांगा ने एंटी-ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की पहलों को संस्थागत रूप देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय में एंटी-ड्रोन टेक्नोलॉजी पर एक समर्पित स्टूडेंट क्लब स्थापित करने का सुझाव दिया। यह क्लब विद्यार्थियों को इस उभरते क्षेत्र में निरंतर सीखने, प्रयोग करने, नवाचार करने और सहयोगात्मक रूप से कार्य करने के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान करेगा तथा इस पहल को एक दीर्घकालिक और स्थायी संस्थागत विरासत के रूप में विकसित करने में सहायक होगा।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने यूएवी और एंटी-ड्रोन तकनीक जैसे उन्नत एवं भविष्य उन्मुख क्षेत्र में विश्वविद्यालय द्वारा की गई इस पहल की सराहना की। उन्होंने रक्षा प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों में इस प्रकार के और अधिक विशेषीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम को और अधिक उपयोगी बनाते हुए, उद्योग सहयोगियों द्वारा प्रतिभागी विद्यार्थियों के लिए दो इंटर्नशिप अवसरों की घोषणा की गई। इन इंटर्नशिप के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने तथा रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र से संबंधित लाइव प्रोजेक्ट्स पर कार्य करने का अवसर मिलेगा। यह पहल उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की तकनीकी चुनौतियों पर अपने ज्ञान को लागू करने का महत्वपूर्ण अनुभव प्रदान करेगी।
इस अवसर पर कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने यह भी जानकारी दी कि विश्वविद्यालय द्वारा अपने एडवांस्ड सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस के लिए एक समर्पित पोर्टल विकसित किया जा रहा है। इस पोर्टल के माध्यम से विभिन्न उन्नत केंद्रों तथा उनके द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली विशेषीकृत सेवाओं एवं संसाधनों को उपयुक्त सेवा एवं संसाधन दर सूची के साथ प्रदर्शित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य विश्वविद्यालय की उन्नत सुविधाओं तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करना, उद्योग सहभागिता को बढ़ावा देना तथा इन विशेषीकृत केंद्रों की दीर्घकालिक स्थिरता और आत्मनिर्भरता के लिए राजस्व सृजन को प्रोत्साहित करना है।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर कुलपति प्रो. राजीव कुमार, कुलसचिव प्रो. अजय रँगा एवं प्रो. मुनीश वशिष्ठ द्वारा सफल प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
अब विश्वविद्यालय इस कार्यक्रम के द्वितीय चरण, टेथर्ड ड्रोन प्रशिक्षण, की दिशा में आगे बढ़ेगा। इसके माध्यम से विश्वविद्यालय यूएवी, ड्रोन एवं रक्षा प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों में विद्यार्थियों को विशेषीकृत कौशल और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा।



