‘गधे’ को पांच मिनट में मिल गया नर्सिंग सर्टिफिकेट, जाति वाले कॉलम में लिखा था जानवर फिर भी जारी हुआ
मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल से पांच मिनट में एक गधे का टेम्पररी नर्सिंग सर्टिफिकेट जारी हो गया। एनएसयूआई ने इसे लेकर बड़ा आरोप लगाया है। पोर्टल पर सारी चीजें फर्जी तरीके से अपलोड की गई थीं। हालांकि नर्सिंग काउंसिल की कोई प्रतिक्रिया इस पर नहीं आई है।

भोपाल : मध्य प्रदेश में नर्सिंग काउंसिल किसी न किसी वजह से सुर्खियों में रहता है। अब मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने एक गधे के नाम पर जमा किए गए ऑनलाइन नर्सिंग रजिस्ट्रेशन एप्लीकेशन को मंजूरी दे दी है, जिससे काउंसिल के नए लॉन्च किए गए पोर्टल की वेरिफिकेशन प्रोसेस पर सवाल उठने लगे हैं।
गधे की तस्वीर पर मिल गई मंजूरी
दरअसल, यह आवेदन एनएसयूआई के राज्य उपाध्यक्ष रवि परमान ने काउंसिल के ऑनलाइन सिस्टम को टेस्ट करने के लिए जमा किया था। परमार के मुताबिक, फॉर्म में नाम डंकी था, गधे की तस्वीर लगी थी और फर्जी जानकारी दी गई थी। माता-पिता के कॉलम में डंकी फादर और डंकी मदर लिखा था। साथ ही जाति वाले कॉलम में एनिमल लिखा था।
टेम्पररी नर्सिंग सर्टिफिकेट जारी कर दिया
वहीं, परमार ने दावा किया है कि इतनी अजीब जानकारी होने के बावजूद 2050 रुपए का ऑनलाइन पेमेंट हो गया। इसके बाद टेम्पररी नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि 25 सितंबर को एप्लीकेशन जमा करने और पेमेंट करने के लगभग पांच मिनट बाद ही सर्टिफिकेट बन गया था।
दी गई थी परीक्षा में मनमानी की जानकारी
इसके साथ ही एप्लीकेशन में 10वीं और 12वीं क्लास की परीक्षा की मनमानी जानकारी भी दी गई थी, जबकि ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट के तौर पर भोपाल नर्सिंग कॉलेज और भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर का नाम डाला गया था। परमार ने आरोप लगाया कि ट्रेनिंग पूरी होने और डिग्री या डिप्लोमा सर्टिफिकेट के बजाए खाली कागज अपलोड किए गए थे।
गौरतलब है कि इस मसले पर नर्सिंग काउंसिल की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। परमार ने पोर्ट और उसे मैनेज करने वाली एजेंसी की जांच की मांग की है और कहा है कि जांच से यह पता चलना चाहिए कि बिना वेरिफिकेशन के एप्लीकेशन को मंजूरी कैसे मिल गई।



