चोरी की लग्जरी गाडिय़ों की फर्जी आरसी बनाने के खेल का पर्दाफाश, दो साल में 500 गाडिय़ां बेच दीं

रोहतक 23 जून। चोरी की लग्जरी गाडिय़ों की महम एसडीएम ऑफिस से फर्जी आरसी बनाने के खेल में एसटीएफ की जांच में कई अहम खुलासे हो रहे हैं। एसटीएफ के अनुसार महम एसडीएम ऑफिस के तीन कर्मचारी जिन लोगों के लिए आरसी बनाते थे उन लोगों के दिल्ली और यूपी के 4 बड़े चोर गिरोह से सीधे संपर्क थे। साल 2017 से 2019 तक ये चोर गिरोह दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम से करीब 500 लग्जरी गाडिय़ों की चोरी को अंजाम दे चुका है। सबसे ज्यादा गाडिय़ा रोहतक, हिसार, चरखी दादरी और सोनीपत में बेची गईं। पंजाब में भी कुछ गाडिय़ां इन आरोपियों ने बेची हैं। एसटीएफ ने 14 ऐसी गाडिय़ां बरामद की हैं।
जांच में ये बात सामने आई है कि महम ऑफिस में सेंटिंग करने वाले अपने ग्राहक को पहले गाड़ी की फोटो दिखा उन्हें गाड़ी पसंद कराते और बाद में चोर गिरोह को उसे चुराने का टारगेट देते। रैकेट से जुड़े लोग ग्राहक को मार्केट रेट से 5 से 7 लाख रुपए कम में गाड़ी उपलब्ध कराने का लालच दे फंसा लेते। एसटीएफ के अनुसार इस गिरोह से व्यापारी, छुटभैया नेता और यहां तक की माफिया से जुड़े लोगों ने वाहन खरीदे हैं। इन सब की पहचान की जा रही है।
गिरोह से गाडिय़ां खरीदने वाले 100 लोगों को एसटीएफ ने दिए नोटिस : एसटीएफ के अनुसार फर्जी आरसी तैयार करवाने वाले चोर गिरोह से कोई भी गाड़ी 3 से छह लाख रुपए में खरीदता था। पुलिस ने जो गाडिय़ां बरामद की हैं उनमें हिसार, दादरी, महम और रोहतक के लोग शामिल हैं। इसके अलावा एसटीएफ की ओर से करीब 100 लोगों को नोटिस दिए गए हैं, जिनके पास फर्जी आरसी तैयार कर बेची गई गाडिय़ां है। पुलिस इन गाडिय़ों की स्क्रीनिंग करने के बाद ही चोरी की कार खरीदने वाले गिरोह के लोगों के खिलाफ एक्शन लेगी।
फिलहाल एसटीएफ मामले में गिरफ्तार महम एसडीएम ऑफिस के एमआरसी अनिल, कम्प्यूटर ऑपरेटर कृष्ण व सोमबीर को चार दिन के रिमांड पर लिए हुए हैं। वहीं इन तीनों से फर्जीवाड़ा कर चोरी की गाडिय़ों के लिए नई आरसी बनवाने वाले गिरोह के गिरफ्तार हुए प्रवीन, अमित व रमेश से पूछताछ कर रही है।
छुट्टी वाले दिन होता था चोरी के वाहनों की फर्जी आरसी बनाने का काम, भेद खुलने से पहले ही कांट्रेक्ट पर लगा सोमबीर छोड़ गया था नौकरी महम 7 चोरी के वाहनों की फर्जी आरसी बनाने के मामले की जांच एसटीएफ के पास जाते ही इस खेल की सारी परतें उघडऩे लगी हैं। एसडीएम महम की ओर से भी की जा रही जांच में आरोपी एमआरसी अनिल, कम्प्यूटर ऑपरेटर कृष्ण व सोमबीर के कारनामे खुल रहे हैं।
एसडीएम अभिषेक मीणा ने बताया कि चोरी की गाडियों को वैध बनाने का धंधा जुलाई 2017 से जून 2019 के बीच किया गया। इस काम को छुट्टी वाले दिन किया जाता था। मैंने करीब पांच महीने पहले महम में कार्यभार संभाला था। उसके बाद केवल 40 गाडियों की बैकलॉग इंट्री हुई। उनका रिकार्ड सुरक्षित है। तीन साल के दौरान लगभग 570 गाडियों को बैकलॉग किया गया है। सभी गाडियों का रिकार्ड एसटीएफ को सौंप दिया गया है।



