पेट की आग सब से बड़ा राम !

गुरुग्राम (मदन लाहौरिया) 17 अगस्त। आज हमारे देश में चारों ओर राममंदिर निर्माण का शोर मचा हुआ है परंतु यदि हम इस राममंदिर निर्माण के शोर के पीछे की तस्वीर देखें तो ऐसा लगता है कि राम के नाम पर हम ही देश की जनता से धोखा कर रहे हैं! राम तो हमारे देश की मिट्टी के कण- कण में सदियों से बसे हुए हैं तो फिर ये चंद कुछ सालों से राम के नाम पर साम्प्रदायिक दंगों या आंदोलनों की जरूरत क्यों पड़ी? यह एक बेहद राजनैतिक मामला लगता है!
हमारे देश की आजादी से पूर्व ही कुछ कट्टरवादी हिंदू संगठनों ने इस देश के राम को बाँटने की एक गहरी साजिश रच दी थी! राम तो गरीब वर्ग का सब से पहले है! यह तो हमारे रामायण जैसे महान ग्रंथ में भी वर्णित है तो फिर इस देश के राम को भिन्न भिन्न वर्गों व जातियों में बांटने की क्या जरूरत पड़ी?
किसी भी गरीब व्यक्ति का मन ही मंदिर है व उस गरीब का दिल व दिमाग तथा कर्म ही मंदिर है! किसी भी धर्म व जाति के गरीब व कामगार वर्ग के लोगों के मन व दिल में ही मंदिर व राम बसा हुआ है तो फिर इस हिंदुस्तान में राम के नाम पर धोखा करते हुए यह आंदोलन क्यों किये गये? यह बेहद गंभीर विषय है!
रोजी रोटी और व्यापार तथा खेती इस देश की मुख्य धारा है! सदियों से हमारे देश में सर्वधर्म समभाव का व्यवहार रहा है व सदियों से ही इस देश में सामाजिक समरसता का भाव रहा है! इस देश की करोड़ों गरीब जनता के पेट की आग ही सब से बड़ा राम है! रोजाना करोड़ों की संख्या में गरीब कामगार वर्ग के लोग सुबह सवेरे ही अपने मन-दिल-दिमाग में राम का नाम धारण कर के अपने कर्म को शुरू करते हैं! इन करोड़ों गरीब भारतवासियों को आज तक कभी भी किसी राममंदिर की जरूरत महसुस नहीं हुई क्यों कि इन के मन में ही सदियों से राम बसा हुआ है!

इस देश को धर्म के दंगों का देश बनाने वाले कुछ तथाकथित हिंदुत्व के ठेकेदारों के मन में व तन में राम नहीं बसा तभी ये हिंदुत्व के तथाकथित ठेकेदार समय समय पर इस देश में राम के नाम पर दंगें करवाते रहे हैं! इस वक्त वर्तमान काल में पूरा देश कोरोना वायरस की वजह से लॉक डाउन होने के कारण भयंकर आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है और ऐसे गंभीर हालातों के चलते राम के नाम की जाने वाली वर्तमान भारतीय सरकार के द्वारा राजनीति बेहद गलत है क्यों कि आज देश में लोगों के सामने रोटियों के लाले पड़े हुए हैं और देश की सरकार राम के नाम पर राजनैतिक रोटियां सेंकने पर लगी हुई है! यह सब भगवान राम के आदर्शों के विपरीत है! गरीब वर्ग व मध्यम वर्ग के लोगों के पेट की आग ही सब से बड़ा राम है और देश की वर्तमान भाजपा सरकार इस वक्त लोगों के पेट की आग बुझाने में पूर्णतया फेल है! इसलिए राम के नाम पर की जाने वाली राजनीति किस काम की? एक कहावत भी है भूखे पेट भजन ना हो गोपाला!
भारत की वर्तमान सत्तासीन केंद्रीय सरकार के प्रति जनता का विश्वास इस समय सब से निचले स्तर पर है क्यों कि लॉक डाउन के कारण भयंकर आर्थिक मंदी की वजह से देशभर में लगभग 10 करोड़ के करीब लोग अपनी नौकरियां खो चुके हैं व करीब 12 करोड़ लोग जबरदस्त गरीबी की खाई में गिर चुके हैं! जनता में असुरक्षा और भय की मनस्थिति अब तक के अपने शिखर पर है! आने वाले दिनों में अर्थव्यवस्था और रोजगार के मोर्चे पर देश को और भी बुरी खबरों के लिए तैयार रहना होगा!
5 अगस्त को राममंदिर निर्माण के लिए अयोध्या में नींव रखने के बाद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में जो शब्द ‘सब में राम सब के राम’ के कहे उसी शब्द के बारे में जरा चर्चा करते हैं! हमारे देश के उच्च वर्ग के लोगों के मन में अभी तक राम नहीं समाये और ना ही उच्च वर्ग के लोगों ने अभी तक राम को अपना बनाया क्यों कि भारत का अधिकांश उच्च वर्ग इस वक्त अपने पैसों की चमक धमक से राम के नाम को खरीदता है व उन तथाकथित कट्टर हिंदुत्व के ठेकेदारों की मदद अपने धन की ताकत से राम के नाम पर राजनीति करने के लिए करता है! सदियों से इस के बेहद गंभीर कारण हैं!
हमारे देश के कुछ तथाकथित कट्टरपंथी हिंदू सनातन धर्म व हिंदू धर्म की बारीकियों को समझने की कोशिश ही नहीं करते व धर्म का आचरण तक भी नहीं करते! परंतु कट्टरपंथिता इस्तेमाल करते हुए सारा साल इस देश में धर्म के नाम पर दंगें चलते रहते हैं! आरएसएस से संबंधित जितने भी संगठन इस देश में हैं उन के प्रचारक व पदाधिकारी अपने व्यक्तिगत जीवन में कतई धार्मिक नहीं है! हिंदू धर्म की परंपरा के अनुसार आज देश के अधिकांश हिंदू धर्म के ठेकेदार सिर पर शिखा नहीं रखते व जनेऊ धारण नहीं करते व अधिकांश हिंदू घरों में वर्तमान समय में सूर्य को जल नहीं दिया जाता! केवल हिंदू धर्म के नाम की दिमाग पर मूर्खता भरी काली पट्टी बांध रखी है! धर्म तो आचरण व व्यवहार में करने का है ना कि धर्म के नाम पर ढोंग करने का!

आज हमारे देश में हिंदुओं में जैन व सिख लोग रोजाना की दिनचर्या में हमारी सनातनधर्मी व हिन्दुधर्मी पूजा अर्चना को नहीं मानते यानि कि सूर्य को जल देना, शिवालय में जल देना, हनुमान चालिसा पढऩा व अन्य प्रकार की हिंदू पद्धति की कर्मकांड पूजा को हमारे हिंदुओं में जैन-सिख व निम्न वर्ग से संबंधित दलित वर्ग व पिछड़ा वर्ग भी नहीं मानते व साथ में ही ये सभी वर्ग हिंदू धर्म की पूजा पद्धति व मूर्ति पूजा को नहीं मानते! हमारे हिंदू भाई जो आर्य समाजी हैं वे भी किसी प्रकार की हिंदू कर्मकांड पूजा व मूर्ति पूजा को नहीं मानते तो फिर ये राममंदिर व राम की मूर्ति बनाने व लगाने के नाम पर कथित हिंदूवाद की राजनीति का ढोंग क्यों!
इसका सीधा-सीधा मतलब ये है कि हमारे देश के आरएसएस जैसे फर्जी कट्टर हिंदू संगठनों का ही यह सारा दोष है! इन सभी संगठनों ने ही पूरे हिंदू समाज को कभी भी राम का नहीं होने दिया व कभी भी किसी के मन में राम को बसने नहीं दिया! इन्हीं कट्टर हिंदू संगठनों ने देश में हजारों तथाकथित बाबाओं के डेरे बनवाये और उन डेरों ने अपनी अपनी अलग पूजा पद्धति लागू की और लाखों करोड़ों हिंदू उनके अनुयायी राम को ही नहीं मानते तो फिर ये बताइये कि हमारे देश में राम को कौन मानता है व राम के आदर्शों को अपने जीवन के व्यवहार में कौन उतारता है? सब में राम सब के राम का आचरण तो ये फर्जी कट्टर हिंदू संगठन ही नहीं कर रहे तो फिर ये राम के नाम पर राजनैतिक रोटियां क्यों सेंकी जा रही हैं?
राम ने सामाजिक समरसता व मान मर्यादा को अपने शासन की आधारशिला व एक आदर्श के तौर पर बनाया था! परंतु रामायण के प्रसंग में देखने को मिलता है कि राम ने स्वयं अपने द्वारा ही स्थापित मान मर्यादा व आदर्शों को भंग करते हुए अपनी गर्भवती पत्नी सीता को अयोध्या वासियों की गहरी साजिश के चलते अयोध्या वासियों की शिकायत पर सीता के चरित्र पर शक करते हुए परित्याग कर के अकेले घनघोर जंगल में छोड़ दिया! निष्कलंक सीता को मिथ्या कलंकित करने का पाप आज भी अयोध्या वासियों को सता रहा है! सीता ने तो राम के साथ वन जा कर पति धर्म निभाया परंतु राम ने पत्नी धर्म नहीं निभाया! सीता को बार बार पवित्रता की परीक्षा देनी पड़ी और राम ने एक गर्भवती पत्नी का परित्याग कर के पूरे संसार की नारी जाति का अपमान किया! इसी प्रकार रामायण के एक प्रसंग के अनुसार जिस भाई लक्ष्मण ने राम के साथ वन जा कर राम की पूरी रक्षा की व रावण को मारने के लिए युद्ध में पूरा साथ दिया उसी भाई लक्ष्मण का भी राम ने परित्याग कर दिया और अंत में लक्ष्मण सरयू नदी में जल समाधि लेकर विलीन हो गये!
क्या यही रामराज्य है? क्या देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसा ही रामराज्य चाहते हैं जहां रोजाना नारी जाति का अपमान किया जाता हो व एक भाई दूसरे भाई का घर संसार छिन कर उस भाई को धक्के मार कर घर से निकाल देता हो तथा जहां रोजाना बेकसूर लोग भूख व बेरोजगारी से तंग आ कर आत्महत्यायें कर रहे हों और जहां रोजगार छीन लिए गये हों? ऐसा रामराज्य किस काम का? ऐसी राम की मूर्ति पूजा किस काम की? ऐसा राममंदिर किस काम का? यह राममंदिर निर्माण तो महज एक राजनीति की महा साजिश का हिस्सा है! मंदिर तो देश में हजारों लाखों हैं परंतु आज तक आरएसएस जैसे हिंदू संगठन देश के लोगों के मन में केवल राम के नाम पर ढोंग व पाखंड की चादर ही चढ़ा पाये हैं!
हिंदुत्व का डंका पीटने वाले इस भारत देश में अभी तक तारीखों का अंग्रेजों का चलाया हुआ ईस्वी कैलेंडर ही चल रहा है! यह हमारे देश के हिंदुत्व व राम के तथाकथित ठेकेदारों के लिए बहुत ही शर्मनाक बात है! यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत के करोड़ों हिंदू व रामभक्त लोग व्यवहारिक जीवन में अंग्रेजों के चलाये हुए ईस्वी कैलेंडर के अनुसार ही अंग्रेजी तारीखें मानते हुए अपने सभी कार्य करते हैं! भारत के करोड़ों की संख्या में हिंदुओं को विक्रमी संवत कौन सा होता है व हमारी देशी तिथियां कौन सी होती हैं इस के बारे में कोई ज्ञान नहीं! हमारे देश के हिंदुत्व व राम के कथित ठेकेदार अपने व्यक्तिगत जीवन में कतई धार्मिक नहीं! धर्म के ये कथित ठेकेदार केवल भारत माता की जय या गाय माता की जय या गंगा मैया की जय के नारे लगवा लगवा कर ही हमारे देश की सामाजिक समरसता को नष्ट भ्रष्ट करने का कार्य निरंतर रूप से करते आ रहे हैं!
राममंदिर निर्माण की जल्दबाजी में तो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुभ मुहूर्त ही भूल गये! राममंदिर निर्माण के भूमि पूजन के मुहूर्त की कमियों व बहुत बड़ी खामियों का जिक्र करना यहां बेहद जरूरी है! 1 जुलाई 2020 को हमारे हिंदू धर्म की परंपरा के अनुसार देव सो गये थे जो कि 25 नवंबर 2020 को देव जागेंगे! जब देव सोये हुए हों तो इस प्रकार के महत्वपूर्ण भूमि पूजन व मंदिर निर्माण के कार्य शुरू करना शुभ नहीं माना जाता व ये कार्य बेहद अशुभ होते हैं!
4 अगस्त 2020 को रात्री 8 बज कर 47 मिनट पर पंचक लग गये थे जो कि 9 अगस्त शाम 7 बज कर 6 मिनट तक पंचक थे! पंचक के समय भी कोई शुभ कार्य नहीं होता! पंचक दोष जबरदस्त माना जाता है! 5 अगस्त 2020 को बुध ग्रह सुबह 5 बज कर 55 मिनट पर पूर्व में अस्त हो गया था! यह भी एक बड़ा दोष है! 5 अगस्त 2020 को राहु काल दोपहर 12 बज कर 26 मिनट से 2 बज कर 7 मिनट तक था! इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं हो सकता!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राममंदिर निर्माण का भूमि पूजन 12 बज कर 44 मिनट पर किया जो कि राहु काल का समय था और इस समय में भूमि पूजन करना भी अपने आप में एक बड़ा दोष व अपशुकन माना जाता है! 12 बज कर 44 मिनट पर अभिजित मुहूर्त भी नहीं था!
वैसे भी पूरे देश के ज्योतिष के सूत्रों के अनुसार रोजाना का अभिजित मुहूर्त केवल कुछ साधारण कार्यों के लिए ही देखा जाता है परंतु ऐसे महत्वपूर्ण राममंदिर निर्माण के भूमि पूजन के लिए नहीं देखा जाता! राममंदिर के भूमि पूजन जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए तो देव जागने पर ही शुभ मुहूर्त बनता है! इस समय देश आर्थिक मंदी की जबरदस्त मार से गुजर रहा है और जनता पेट की भूख की ज्वाला से तड़प रही है तो ऐसे समय में राम के नाम पर गरीबों की लाशों पर दीप जलाना भाजपा के लिए जबरदस्त श्राप ही साबित होगा!



