युवा दिवस (विवेकानंद जयंती) के अवसर पर – फ़ार्मा इंडस्ट्री में युवाओं के अभिनव प्रयोगों ने कमाल किया है

(लेखकः डॉ. अनिल खरया (युवा फ़ार्मा उद्यमी) मॉडर्न ग्रुप ऑफ़ इंडस्ट्री एवं इंस्टीट्यूट्स के संचालक हैं।)

भारत युवाओं का देश है।देश की युवा जनसंख्या देश की समृद्धि की द्योतक है। एक अनुमान के अनुसार वर्ष 2055 तक भारत वर्ष एक युवा राष्ट्र के रूप में ही जाना और पहचाना जायेगा। ये अगले 33 वर्ष देश में सर्वाधिक युवा शक्ति की सकारात्मक ऊर्जा का वास्तविक उपयोग करने के लिये निर्णायक सिद्ध होंगे। कौशल विकास एवं उद्यमिता विकास के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमों ने भारत की बढ़ती शक्ति एवं युवा शक्ति की समुचित व्यवस्था कर समग्र विकास के समस्त सोपानों पर विजय प्राप्त करने की तैयारी कर रखी है।

भारतीय फार्मा उद्योग पिछले दो दशकों में घरेलू बाजार में लगभग 11% और निर्यात में ~16% की चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़ा है। जबकि घरेलू बाजार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के समान गति से बढ़ा है, समग्र विकास दुनिया भर के बाजारों में जेनेरिक फॉर्मूलेशन की आपूर्ति में भारतीय फ़ार्मास्यूटिकल्स उद्योग के नेतृत्व द्वारा संचालित किया गया है जो गौरव का विषय है। ऐसा प्रतीत होता है कि वर्ष 2020-2030 की अवधि में भारतीय फार्मा उद्योग ~12% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर 2030 तक US$130 बिलियन तक पहुंच जाएगा, जो वर्ष 2020 में 41.7 बिलियन US$ था अर्थात् दो दशकों में 13% जबकि पिछले दशक में सीएजीआर लगभग 8.5% रहा है और वर्तमान में, पिछले पांच वर्षों में यह लगभग 6.2% रहा है।आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और दुनिया की वास्तविक फार्मेसी बनने के लिए, हमें इस उद्योग के विकास इंजन को सुदृढ़ बनाने के लिए वर्तमान एवं भविष्य के नवाचारों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है, जो रणनीतिक होने के साथ-साथ आर्थिक महत्व का भी है। इस महत्वाकांक्षा को साकार करने से एक केंद्रित प्रयास की आवश्यकता होगी।

बतादें कि भारतीय फार्मास्युटिकल उद्योग के प्रमुख हितधारकों में भुगतानकर्ता, प्रदाता, नीति निर्माता, चिकित्सक, फार्मा उद्योग के उद्यमी, शिक्षाविद के साथ-साथ रसद और वितरण, आईटी, पूंजीगत पूल, पैकेजिंग और अन्य सहायक उद्योगों में सेवा प्रदाताओं का अंबार है। आवश्यकता है सुसंगठित होकर सारगर्भित प्रयोगों एवं प्रयासों की। तीव्रता से बढ़ रहे भारतीय फ़ार्मा इंडस्ट्री क्षेत्र में भी भारत की आत्मनिर्भरता के झंडे समूचे विश्व में लहरा रहे हैं। फ़ार्मा क्षेत्र में शोध विकास एवं अनवरत अनुसंधान फ़ार्मा इंडस्ट्री 4.0 की ओर अग्रसर हो रही है, जो विश्व विजय की सूचक है। कोरोना काल में सप्लाई चैन मैनेजमेंट के क्षेत्र में अभिनव प्रयोगों ने फ़ॉर्मा इंडस्ट्री की शक्ति को और बढ़ा दिया है। युवा उद्यमियों में चीन पर लगे प्रतिबंधों के बाद अपने देश में ही शोध एवं विकास की गंगा बहाने एवं आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहे हैं। वैक्सीन के उत्पादन से लेकर अन्य देशों तक वैक्सीन को पहुँचना भारत के विश्व गुरु स्वरूप को दर्शा रहा है। इससे फ़ार्मा उत्पादन के क्षेत्र में और व्यापक सुधार एवं नियोजन की आवश्यकता आन पड़ती है। विश्व परिदृश्य भारत की ओर आशा भरी निगाहों से अपेक्षा कर रहा है। वास्तव में यह 21 वीं सदी युवा भारत की सदी है। फ़ार्मा क्षेत्र के कुशल उद्यमी युवाओं के कुशल नेतृत्व से भारत विश्व की फ़ार्मेसी बनकर भारत के फ़ार्मा के क्षेत्र में भी विश्वगुरु बनायेगा।

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