पॉक्सो एक्ट के दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास व 2 लाख जुर्माना की सजा
मामले को चिन्हित अपराध की श्रेणी में रखकर फरीदाबाद पुलिस द्वारा की गई ठोस पैरवी

फरीदाबाद, 30 अक्टूबर। वर्ष 2022 में थाना सेक्टर-08 क्षेत्र के अंतर्गत 10 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में करीब चार साल चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, फरीदाबाद श्री अभिषेक फुटेला की अदालत ने शुक्रवार को दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास व 2 लाख जुर्माने की सजा सुनाई है। फरीदाबाद पुलिस की ओर से प्रभावी अनुसंधान के साथ-साथ मजबूत पैरवी करने के लिए केस को चिन्हित अपराध की श्रेणी में रखा गया और विचारण के दौरान माननीय न्यायालय में केस की ठोस पैरवी की गई।
पुलिस प्रवक्ता अनुसार वर्ष 2022 में थाना सेक्टर-08 क्षेत्र में एक 10 वर्षीय नाबालिक बच्ची से दुष्कर्म का मामला सामने आया था। पीड़िता की मां की शिकायत पर थाना सेक्टर 8 में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
मामला गंभीर और जघन्य प्रकृति का होने पर महिला उपनिरीक्षक सविता ने मामले की जांच करते हुए साक्ष्य जुटाए और दोषी रणजीत को 18 अगस्त 2022 को गिरफ्तार किया। इसके बाद पुलिस ने मामले में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए जांच को आगे बढ़ाया और भौतिक एवं तकनीकी साक्ष्य एकत्रित कर 07 सितंबर 2022 को माननीय न्यायालय में चालान पेश कर किया।
पुलिस प्रवक्ता अनुसार मामले को चिन्हित श्रेणी में रखा गया तथा प्रत्येक सुनवाई पर फरीदाबाद पुलिस की ओर से माननीय अदालत में प्रभावी पैरवी की गई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से 26 गवाहों की गवाही न्यायालय के समक्ष दर्ज हुई। गवाहों के बयान, भौतिक व तकनीकी साक्ष्यों और पुलिस द्वारा की गई जांच के आधार पर अभियोजन पक्ष ने माननीय अदालत में मामले की मजबूत पैरवी सुनिश्चित की जिसके फलस्वरुप इस जघन्य अपराध के दोषी को कानून के तहत सजा दिलाने में सफलता मिली। 30 अक्टूबर 2026 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्री अभिषेक फुटेला की अदालत ने दोषी को 6 पोक्सो एक्ट के अंतर्गत 20 साल के कठोर कारावास व ₹200000 जुर्माना तथा 342 आईपीसी के अंतर्गत 1 साल की कैद की सजा सुनाई है।
पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि आरोपितों की गिरफ्तारी के साथ-साथ न्यायालय में मामले की प्रभावी पैरवी भी पुलिस की प्राथमिकता है। पुलिस टीमों द्वारा गंभीर मामलों में वैज्ञानिक एवं साक्ष्य आधारित जांच पर जोर दिया जा रहा है, ताकि दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाई जा सके।



