वर्ल्ड स्ट्रोक डे पर मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, फरीदाबाद में एडवांस्ड न्यूरोमॉड्यूलेशन यूनिट (rTMS) का शुभारंभ
नई तकनीक से बिना सर्जरी के ब्रेन की गतिविधियों को नियंत्रित करने में मिलेगी मदद, न्यूरोलॉजी के मरीजों को मिलेंगे आधुनिक उपचार के विकल्प

फरीदाबाद, 30 अक्टूबर : वर्ल्ड स्ट्रोक डे के अवसर पर मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, फरीदाबाद ने एडवांस्ड न्यूरोमॉड्यूलेशन यूनिट की शुरुआत की है। इस यूनिट में रिपीटेटिव ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (rTMS) जैसी एडवांस्ड तकनीक उपलब्ध कराई गई है, जिसके जरिए बिना किसी सर्जरी के मैग्नेटिक पल्स की मदद से ब्रेन के विशेष हिस्सों की गतिविधियों को नियंत्रित किया जा सकता है। इस यूनिट का उद्घाटन मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के फाउंडिंग मेंबर, ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ डॉ. राजीव सिंघल ने किया। इस नई सुविधा के साथ अस्पताल ने न्यूरोसाइंसेज सेवाओं को और मजबूत करते हुए न्यूरोलॉजिकल और कुछ मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
वर्ल्ड स्ट्रोक डे न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से प्रभावित मरीजों की चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। अस्पताल की नई एडवांस्ड न्यूरोमॉड्यूलेशन यूनिट में स्ट्रोक के बाद हाथ-पैरों की गतिविधियों में कमी, मूवमेंट डिसऑर्डर, लंबे समय से बने दर्द, माइग्रेन, टिनिटस (कानों में लगातार आवाज आना), डिप्रेशन, ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर (OCD) और निकोटीन की लत छुड़ाने में सहायक उपचार जैसी स्थितियों के लिए rTMS की उपयोगिता का विशेषज्ञों द्वारा आकलन किया जाएगा। मरीज की स्थिति, उपलब्ध मेडिकल एविडेंस और व्यक्तिगत जरूरतों के आधार पर उपचार की उपयुक्तता तय की जाएगी। इसके अलावा विशेषज्ञों की निगरानी में अन्य चुनिंदा बीमारियों में भी इस तकनीक के संभावित उपयोग का मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि मरीजों को उनकी जरूरतों के अनुसार पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट उपलब्ध कराया जा सके।
मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, फरीदाबाद की प्रोग्राम क्लिनिकल डायरेक्टर – न्यूरोलॉजी, डॉ. सुषमा शर्मा ने बताया, “हमारे ब्रेन में परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने और न्यूरल कनेक्शन्स को दोबारा व्यवस्थित करने की अद्भुत क्षमता होती है, जिसे न्यूरोप्लास्टिसिटी कहा जाता है। rTMS तकनीक में ब्रेन के विशेष हिस्सों तक मैग्नेटिक पल्स पहुंचाकर न्यूरल एक्टिविटी को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। सही मरीजों के चयन के बाद इस तकनीक को मौजूदा उपचार के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। स्ट्रोक के बाद रिहैबिलिटेशन, पार्किंसनिज्म में मांसपेशियों की अकड़न को कम करने, फाइब्रोमायल्जिया, अन्य न्यूरोलॉजिकल दर्द संबंधी समस्याओं तथा डिप्रेशन, OCD और निकोटीन की लत छुड़ाने में सहायक उपचार जैसी स्थितियों में इसके उपयोग की संभावनाएं हैं। स्ट्रोक से उबर रहे मरीजों में नियमित रिहैबिलिटेशन के साथ इस तकनीक के उपयोग से हाथ-पैरों की मूवमेंट में सुधार और रिकवरी में मदद मिलने की संभावनाओं का आकलन किया जा सकता है। बेहतर परिणामों के लिए सही मरीज का चयन, उसकी जरूरत के अनुसार ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल और लगातार क्लिनिकल मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है।”
मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, फरीदाबाद के फैसिलिटी डायरेक्टर, डॉ. (कर्नल) नवनीत सिंह छाबड़ा ने कहा, “वर्ल्ड स्ट्रोक डे पर एडवांस्ड न्यूरोमॉड्यूलेशन यूनिट की शुरुआत मरीजों तक आधुनिक मेडिकल टेक्नोलॉजी पहुंचाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। न्यूरोलॉजिकल बीमारियां न केवल मरीज के शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं, बल्कि उसकी आत्मनिर्भरता, मानसिक स्थिति और जीवन की गुणवत्ता पर भी गहरा असर डालती हैं। rTMS तकनीक के आने से हमारी न्यूरोलॉजी सेवाओं का विस्तार होगा और हम मरीजों को अधिक व्यापक और उनकी जरूरतों के अनुसार पर्सनलाइज्ड केयर प्रदान कर सकेंगे। हमारा उद्देश्य है कि फरीदाबाद और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को नई और आधुनिक उपचार सुविधाएं विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में अपने ही शहर में उपलब्ध हों, ताकि उन्हें इलाज के लिए दूर-दराज के बड़े मेडिकल सेंटर्स का रुख न करना पड़े।”
एडवांस्ड न्यूरोमॉड्यूलेशन यूनिट की शुरुआत के साथ मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, फरीदाबाद ने न्यूरोसाइंसेज के क्षेत्र में अपनी सेवाओं को और मजबूत किया है। अस्पताल में एडवांस्ड डायग्नोस्टिक सुविधाओं, एक्यूट स्ट्रोक मैनेजमेंट, रिहैबिलिटेशन और आधुनिक उपचार तकनीकों को एक साथ उपलब्ध कराकर मरीजों को संपूर्ण न्यूरोलॉजिकल केयर प्रदान करने पर जोर दिया जा रहा है। यह पहल अस्पताल के पेशेंट-सेंट्रिक और मल्टीडिसिप्लिनरी ट्रीटमेंट के दृष्टिकोण को और मजबूती देती है।



