लोधी राजपूत जनकल्याण समिति ने अमर शहीद वीरांगना महारानी अवंती बाई लोधी का 169वां बलिदान दिवस मनाया

फरीदाबाद : लोधी राजपूत जनकल्याण समिति (रजि) फरीदाबाद द्वारा अमर शहीद वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी चौक एनआईटी फरीदाबाद में शहीद वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी जी का 169 वां बलिदान दिवस समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता नंदकिशोर लोधी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में फरीदाबाद की मेयर श्रीमती प्रवीण बत्रा जोशी तथा विशिष्ठ अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री के मीडिय़ा कोर्डिनेटर मुकेश वशिष्ठ, संस्थापक महासचिव लाखनसिंह लोधी, अध्यक्ष रूपसिंह लोधी, कोषाध्यक्ष धर्मपाल सिंह लोधी, भोपाल कश्यप, सुरेश पाठक द्वारा दीप प्रज्ज्वलित किया गया। सभी उपस्थित अतिथियों ने पुष्प अर्पित कर नमन् किया।

इस अवसर उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए मेयर श्रीमती प्रवीण बत्रा जोशी ने 1857 की क्रांति को नई दिशा देने वाली, रेवांचल मुक्ति आंदोलन की सूत्रधार, महान वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी के बलिदान दिवस पर नमन करते हुए कहा कि इस माटी का कण-कण अवंतीबाई लोधी की वीरता, साहस और शौर्य गाथा से धन्य व गौरवान्वित है। उनका साहस राष्ट्र की सेवा और सम्मान के लिए मर-मिटने की प्रेरणा देती रहेंगी। उनका जीवन नारी शक्ति और राष्ट्रभक्ति का प्रेरक उदाहरण है।

मुख्यमंत्री के मीडिय़ा कोर्डिनेटर मुकेश वशिष्ठ ने रानी अवंतीबाई लोधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि मातृभूमि की रक्षा और स्वाभिमान के लिए उनका सर्वोच्च बलिदान देशवासियों के हृदय में राष्ट्रप्रेम की ज्योति सदैव प्रज्वलित रखेगा। राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए समर्पित उनका शौर्यपूर्ण इतिहास आने वाली पीढिय़ों के लिए सदैव मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

इस अवसर पर समिति संस्थापक/महासचिव लाखनसिंह लोधी ने अवंतीबाई लोधी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अमर शहीद वीरांगना महारानी अवंतीबाई लोधी का जन्म 16 अगस्त 1831 को मध्यप्रदेश के जबलपुर के पास मनकेड़ी के जमींदार राव जुझार सिंह लोधी परिवार में हुआ थाए बचपन से ही शस्त्रों से लगाव था। इनका विवाह रामगढ़ के युवराज विक्रमादित्य के साथ हुआ जिनकी दो संतानें अमान सिंह और शेरसिंह थे। 1857 स्वतंत्रता संग्राम की पहली नायिका जिन्होंने अंग्रेजों से लोहा लिया, एफआरआर रैडमैन द्वारा 1912 में सम्पादित मण्डला गजेटियर में इनकी वीरता की गौरवगाथा अंकित है। 15 जनवरी 1858 के युद्ध में रानी के पलटवार से कैप्टन वाडिंग्टन तो अपनी जान बचाकर भाग गया परन्तु वाडिंग्टन का बेटा रोमियो नामक बालक मैदान में रह गया जिसे सहृदयता रानी ने अंग्रेजी कैम्प में अपने सैनिकों से भिजवा दिया, वाडिंग्टन ने प्रभावित होकर रानी को पत्र लिखा कि आप बगावत छोड़ दें तो सरकार की ओर से आपका राज्य सुरक्षित रहेगा। रानी के मना करने पर वाडिंग्टन ने हमले किये जिस कारण रानी के कुशल नेतृत्व में कई युद्ध हुए, पुन: वाडिंग्टन ने 20 मार्च 1858 को लैफ्टिनेंट वार्टन एवं लैफ्टिनेंट कॉकवर्न और रीवा नरेश के साथ मिलकर हमला किया दोनों ओर से भयंकर युद्ध हुआ अंग्रेजी सेना काफी बड़ी होने के कारण। रानी ने घायल होने पर चारों ओर से घिरा देख स्वयं की कटार आत्मबलिदान कर देश पर शहीद हो गई। ऐसी वीरांगना की गाथा पाठ्यक्रम में शामिल करनी चाहिए। जिससे युवा पीढ़ी को पता चले कि आजादी कैसे मिली।

इस अवसर पर मुख्य रूप से रवि वर्मा, अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा के प्रदेशाध्यक्ष, महामंत्री देव लोधी, सचिन तंवर प्रदेशाध्यक्ष जेडीयू, दिगपाल सिंह, संजीव कुशवाहा, अशोक डी स्टार, अतुल सचदेवा, दिनेश प्रसाद सिंह, शीशपाल शास्त्री, कृष्ण जीत डंग, किशन कुमार सैन, ओमप्रकाश लोधी, राजेश लोधी, मंजेश लोधी, रामगोपाल लोधी, आनन्द लोधी, अर्जुन कौशिक, मनीष कुमार आदि उपस्थित रहे।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!