डॉ. मेहा शर्मा ने संभाला जे.सी. बोस विश्वविद्यालय के कुलसचिव का कार्यभार

– डाॅ सुनील कुमार गर्ग का कार्यकाल पूरा होने पर दिया गया अतिरिक्त कार्यभार

फरीदाबाद, 16 अगस्त : जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के कुलसचिव का कार्यभार डॉ. मेहा शर्मा को दिया गया है। डाॅ. मेहा शर्मा विश्वविद्यालय में उप-कुलसचिव है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव का पद 14 अगस्त, 2023 को निवर्तमान कुलसचिव डॉ. सुनील कुमार गर्ग का कार्यकाल पूरा हो जाने के उपरांत रिक्त हो गया था। इस संबंध में कुलसचिव सचिवालय द्वारा आदेश जारी कर दिये गये है।

डॉ. मेहा शर्मा ने डीन (इंस्टीट्यूशन्स) प्रो. संदीप ग्रोवर की उपस्थिति में कुलसचिव का पदभार ग्रहण किया। इस अवसर पर कुलपति के सलाहकार डॉ. पवन सिंह, प्रो. पूनम सिंघल, उप कुलसचिव श्री मनीष गुप्ता, कार्यशाला अधीक्षक डॉ. विवेक शर्मा, सहायक कुलसचिव विशाल कुमार, सहायक विधि अधिकारी श्रीमती रेणू डागर भी उपस्थित थीं।
कुलपति प्रो. सुशील कुमार तोमर ने डॉ. मेहा शर्मा को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी है तथा उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं। डॉ. मेहा शर्मा ने विश्वविद्यालय के प्रमुख प्रशासनिक पद की जिम्मेदारी सौंपने के लिए कुलपति प्रो. सुशील कुमार तोमर का आभार व्यक्त किया है।

इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से संबंध रखने वाली डॉ. मेहा शर्मा को शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रशासनिक कार्यों में 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह राजस्थान के वनस्थली विद्यापीठ से इलेक्ट्रॉनिक्स में पीएचडी है। उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों में बीटेक (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन) में स्वर्ण पदक तथा महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से एमटेक (सिग्नल प्रोसेसिंग) शामिल हैं। इससे पहले वह अंसल विश्वविद्यालय, गुड़गांव में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान कर चुकी है।

डॉ. शर्मा के शैक्षणिक रुचिकर क्षेत्रों में माइक्रोप्रोसेसर सिस्टम, डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग, सिग्नल्स एवं सिस्टम्स, वीएचडीएल और नैनोटेक्नोलॉजी शामिल हैं। उनकी शोध गतिविधियां मुख्य रूप से क्वांटम वेल लेजर और लेजिंग नैनो हेटेरो-स्ट्रक्चर्स जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित रही हैं। प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में उनके 25 शोध पत्र प्रकाशित हैं। डॉ. मेहा शर्मा ने पीएचडी स्तर पर शोध कार्यों का तथा इंजीनियरिंग की लगभग 15 आईओटी-आधारित परियोजनाओं का पर्यवेक्षण किया है।

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