फरीदाबाद इनकम टैक्स बार एसोसिएशन की जनरल हाउस मीटिंग में टैक्स नियमों पर महामंथन

विदेशी संपत्ति छुपाने पर अब खैर नहीं, लगेगा भारी जुर्माना और होगी जेल- विशेषज्ञ

  • एसोसिएशन का यह संकल्प है कि फरीदाबाद का एक-एक कर सलाहकार हर नए कानून से पूरी तरह अपडेट रहे- आरुष गुप्ता

फरीदाबाद 26 अगस्त : औद्योगिक नगरी फरीदाबाद के कर सलाहकारों और करदाताओं के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा। नीलम बाटा रोड स्थित होटल डिलाइट सरोवर पोर्टिको के सभागार में फरीदाबाद इनकम टैक्स बार एसोसिएशन (पंजीकृत) की ओर से एक भव्य और विशेष जनरल हाउस मीटिंग का आयोजन किया गया। इस बैठक में देशभर में चर्चा का विषय बने विदेशी निवेश, ब्लैक मनी एक्ट और आगामी टैक्स ऑडिट सीजन को देखते हुए फॉर्म 3CB व 3CD के जटिल तकनीकी पहलुओं पर गहन मंथन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आरुष गुप्ता ने की। कार्यक्रम में शहर के सैकड़ों नामी चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और टैक्स अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित व राष्ट्रगान द्वारा की गई।

कार्यक्रम के प्रथम तकनीकी सत्र में देश के उभरते हुए टैक्स और कानून विशेषज्ञ मुख्य अतिथि वक्ता सीए (अधिवक्ता) शिखर गर्ग ने अपनी बात रखी। उन्होंने करदाताओं को चेतावनी भरे लहजे में आगाह करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर अब टैक्स विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान बेहद आसान और रीयल-टाइम हो चुका है।

सीए शिखर गर्ग ने अपने व्याख्यान में निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर खुलकर प्रकाश डालते हुए बताया कि बहुत से लोग विदेशों में छोटे-मोटे शेयर, म्यूचुअल फंड, विदेशी कंपनियों के कर्मचारी स्टॉक विकल्प या विदेशी बैंक खातों को मामूली समझकर अपने आईटीआर (ITR) में घोषित नहीं करते हैं। सरकार की नज़र अब ऐसे हर एक ट्रांजैक्शन पर है। भले ही उस संपत्ति से कोई कमाई न हुई हो, फिर भी उसका ब्योरा देना अनिवार्य है।

उन्होंने बताया कि यदि कोई नागरिक जानबूझकर या अनजाने में अपनी विदेशी संपत्ति की जानकारी छुपाता है, तो उस पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत ₹10 लाख तक का सीधा जुर्माना और अघोषित विदेशी संपत्ति के मूल्य पर 30% टैक्स के साथ-साथ भारी पेनल्टी लगाई जा सकती है। इसके अलावा, गंभीर मामलों में 3 से 7 साल तक की सश्रम जेल का भी प्रावधान है।

उन्होंने हाल ही में पेश की गई इस नई योजना की बारीकियों को समझाते हुए कहा कि यह उन लोगों के लिए एक आख़िरी और सुनहरा मौका हो सकता है, जिन्होंने पहले अनजाने में गलतियाँ की हैं। इसके तहत तय समय सीमा के भीतर स्वेच्छा से अपनी संपत्तियों का खुलासा करके करदाता दंडात्मक कार्रवाइयों से बच सकते हैं।

द्वितीय सत्र में टैक्स ऑडिट के महारथी और देश के वरिष्ठ कर विशेषज्ञ सीए दीपक भोलूसरिया ने मंच संभाला। चूंकि सितंबर का महीना टैक्स ऑडिट की अंतिम तिथियों के करीब होता है, इसलिए उनका यह सत्र सभी प्रोफेशनल सदस्यों के लिए बेहद व्यावहारिक और उपयोगी रहा।
सीए दीपक भोलूसरिया ने

उन्होंने फॉर्म 3CD के सबसे संवेदनशील क्लॉज जैसे कि क्लॉज 44 (GST खर्चों का विवरण), क्लॉज 21(a) (पूंजीगत बनाम व्यक्तिगत खर्चे) और क्लॉज 26 (धारा 43B के तहत भुगतान) पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन क्लॉज में किसी भी तरह का मिसमैच सीधे तौर पर टैक्स विभाग के ऑटोमेटेड सिस्टम द्वारा नोटिस (ASMT) जारी होने का कारण बनता है।

उन्होंने बताया कि अब टैक्स ऑडिट केवल एक फॉर्म भरना नहीं रह गया है, बल्कि यह सीए द्वारा क्लाइंट के खातों की शुद्धता की कानूनी गारंटी है। यदि कोई सीए बिना पुख्ता दस्तावेजों और वाउचर की जांच किए रिपोर्ट साइन करता है, तो अनुशासनहीनता के तहत उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। उन्होंने सभी प्रोफेशनल्स को सलाह दी कि वे क्लाइंट्स से डेटा लेते समय पूरी तरह से डिजिटल ट्रेल रखें और बैंक स्टेटमेंट्स के साथ-साथ इनवॉइस का गहन मिलान करें ताकि भविष्य में किसी भी स्क्रूटनी का सामना आसानी से किया जा सके।

दोनों सत्रों के समापन के बाद एसोसिएशन के अध्यक्ष आरुष गुप्ता ने मंच से सभी सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों मुख्य वक्ताओं ने जो जानकारी दी है वह हम सभी के लिए बहुत ही लाभकारी हैं । इस का लाभ आम जनता को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि समय समय पर इस तरह अपडेट जानकारी के लिए हमारी एसोसिएशन ऐसे सेमिनार करती रहती है।

आरुष गुप्ता ने अपने भाषण में एसोसिएशन के विज़न को सामने रखते हुए कहा कि “आज भारतीय अर्थव्यवस्था एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। सरकार का पूरा ध्यान पारदर्शिता लाने और टैक्स चोरी को जड़ से खत्म करने पर है। चाहे वह ब्लैक मनी एक्ट हो या टैक्स ऑडिट के सख्त होते नियम, एक टैक्स प्रोफेशनल के रूप में हमारी भूमिका अब देश के वित्तीय चौकीदार जैसी हो गई है। हमारी एसोसिएशन का यह संकल्प है कि फरीदाबाद का एक-एक कर सलाहकार हर नए कानून से पूरी तरह अपडेट रहे ताकि हम न केवल अपने क्लाइंट्स को सही रास्ता दिखा सकें, बल्कि देश के राजस्व निर्माण में भी अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे सकें। ईमानदारी, निरंतर सीखना और पेशेवर निष्ठा ही हमारे इस पेशे की असली ताकत है।” कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया । इस अवसर पर सीए उज्ज्वल चौधरी – संयुक्त सचिव, सीए हेमंत खत्री – उपाध्यक्ष , अधिवक्ता उमेश कुमार – कार्यकारिणी सदस्य, सीए तरुण गुप्ता – कार्यकारिणी सदस्य , सीए उमेश कुमार जिंदल – कार्यकारिणी सदस्य , अधिवक्ता संजय मट्टा – कार्यकारिणी सदस्य वरिष्ठ सदस्य में अधिवक्ता बलबीर सिंह, सीए राकेश गोयल,इसके साथ ही सदस्यता विकास समिति अध्यक्ष: अधिवक्ता शशिकांत सिंह, उपाध्यक्ष: अधिवक्ता विनोद राघव कार्यक्रम के अंत में नवीन सदस्यों को सदस्यता प्रमाण-पत्रों का वितरण अध्यक्ष अधिवक्ता शशिकांत सिंह एवं उपाध्यक्ष अधिवक्ता विनोद राघव और द्वारा किया गया।

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