जे.सी. बोस विश्वविद्यालय द्वारा जरूरतमंदों के सहयोग के लिए ‘जॉय ऑफ गिविंग’ अभियान की शुरूआत

युवाओं में परोपकार की भावना पैदा करने के लिए विश्वविद्यालय का प्रयास

– सहानुभूति एवं सामाजिक जिम्मेदारी का सबक सिखाते है ऐसे अभियानः कुलपति प्रो. तोमर

फरीदाबाद, 29 नवंबर – युवाओं में परोपकार की भावना पैदा करने के प्रयास के तहत जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के छात्र कल्याण कार्यालय द्वारा ‘जॉय ऑफ गिविंग’ अभियान की शुरूआत की गई है। इस अभियान का उद्देश्य पुराने कपड़े, जूते, किताबें और स्टेशनरी जैसी पुरानी वस्तुओं को इकट्ठा करना है, जिन्हें जरूरतमंद क्षेत्रों और अनाथालयों में दान किया जा सके।

डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. मुनीश वशिष्ठ की देखरेख में आयोजित इस पहल का नेतृत्व प्रो. सोनिया बंसल कर रही हैं। इस अभियान को विभिन्न क्लबों से जुड़े संकाय सदस्य तथा स्टूडेंट वालंटियर्स सफल बनाने के लिए प्रयासरत हैं। पहल की सराहना करते हुए कुलपति प्रो. सुशील कुमार तोमर ने कहा कि यह पहल विश्वविद्यालय के मूल मूल्यों की एक सुंदर अभिव्यक्ति है। यह न केवल जरूरतमंदों की मदद करती है, बल्कि हमारे छात्रों के अंतर्मन को भी समृद्ध बनाती है, उन्हें सहानुभूति और सामाजिक जिम्मेदारी का सही सबक सिखाती है।

अभियान के बारे में विस्तार से बताते हुए प्रो. सोनिया बंसल ने बताया कि ‘जॉय ऑफ गिविंग’ पहल के द्वारा उद्देश्य छात्रों को उन वस्तुओं का दान करके समाज में योगदान करने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिनकी उन्हें अब आवश्यकता नहीं है, लेकिन वे जरूरतमंदों के लिए बहुत उपयोगी हो सकती हैं। इस पहल का उद्देश्य युवाओं में सहानुभूति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना है, उन्हें देने की खुशी और दूसरों की मदद करने का महत्व सिखाना है। अभियान के अंतर्गत छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को पुरानी वस्तुओं को दान करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। एकत्र की गई वस्तुओं को अनाथालयों और अन्य जरूरतमंद क्षेत्रों में वितरित करने से पहले वालंटियर्स द्वारा छांटा, साफ और पैक किया जाएगा।

प्रो. मुनीश वशिष्ठ ने कहा कि इस पहल को विश्वविद्यालय समुदाय से काफी सहयोग मिल रहा है। संकाय सदस्य विश्वविद्यालय के भीतर संग्रह अभियान के लिए स्टूडेंट वालंटियर्स के साथ समन्वय करके सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी अपना पूरा समर्थन दिया है।

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